Shani Pradosh 2026: शनि प्रदोष समझकर 7 नवंबर को व्रत रख रहे हैं? पहले जान लें सही तारीख
Shani Pradosh 2026: 7 नवंबर को शनिवार और सुबह त्रयोदशी होने पर भी शनि प्रदोष नहीं है. जानें प्रदोष व्रत 6 नवंबर को क्यों है और इसकी तारीख कैसे तय होती है.

Shani Pradosh Vrat 2026: शनिवार को त्रयोदशी पड़ रही है, लेकिन प्रदोष व्रत शुक्रवार को है. व्रत रखने से पहले समझ लें सुबह की तिथि और शाम की पूजा का अंतर.
दिवाली से पहले 7 नवंबर को शनि प्रदोष का व्रत रखने की तैयारी है तो तारीख ठीक कर लें. इस बार कार्तिक कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 6 नवंबर, शुक्रवार को है. पंचांग की नई दिल्ली की गणना में इसे शुक्र प्रदोष बताया गया है.
अगले दिन शनिवार को सुबह त्रयोदशी जरूर रहेगी, लेकिन इससे वह शनि प्रदोष नहीं बन जाता.
शनिवार और त्रयोदशी, फिर शनि प्रदोष क्यों नहीं?
इसका जवाब पूजा के समय में छिपा है. प्रदोष व्रत का निर्णय सूर्यास्त के आसपास रहने वाली त्रयोदशी से होता है. केवल सुबह की तिथि देखकर इसकी तारीख तय करना गलत हो सकता है.
इसे ऐसे समझें. 7 नवंबर को सूर्योदय के समय त्रयोदशी है, लेकिन सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर चतुर्दशी शुरू हो जाएगी. शाम को सूर्यास्त 5 बजकर 32 मिनट पर होगा. यानी प्रदोष की पूजा के समय त्रयोदशी रहेगी ही नहीं. ये समय नई दिल्ली के लिए हैं.
शनि प्रदोष और शनि देव की पूजा में फर्क
प्रदोष भगवान शिव की उपासना का व्रत है. यह शनिवार को पड़ता है तो शनि प्रदोष कहलाता है. इसलिए 'शनिवार की पूजा' और 'शनि प्रदोष का व्रत' को एक समझना ठीक नहीं है.
7 नवंबर को अपनी परंपरा के अनुसार शनि देव की नियमित उपासना कर सकते हैं. लेकिन उस पूजा को शनि प्रदोष का विशेष अवसर बताना तारीख की सही जानकारी नहीं होगी.
7 नवंबर को कौन से पर्व हैं ?
पंचांग में इस दिन काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि दर्ज हैं. इसलिए दिवाली से पहले की इस तारीख का अपना धार्मिक महत्व है; उसे शनि प्रदोष बताने की जरूरत नहीं.
व्रत की तारीख देखते समय सिर्फ 'शनिवार' और 'त्रयोदशी' पढ़कर फैसला न लें. यह भी देखें कि संबंधित पूजा के समय कौन सी तिथि रहेगी. इसी अंतर से इस बार प्रदोष शुक्रवार को है, जबकि शनिवार की सुबह भी पंचांग में त्रयोदशी दिखाई देगी.
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