तरुण तेजपाल की सजा पर रोक लगाने से SC का इनकार, दिवाली के दौरान छूट की मांग भी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने रेप केस में तरुण तेजपाल को सुनाई गई सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. तेजपाल और गोवा सरकार के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने कहा कि वह सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है.

रेप केस में सज़ा काट रहे पत्रकार तरुण तेजपाल की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दी है. न्यायालय ने तेजपाल की 10 साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. तेजपाल ने अनुरोध किया था कि दीवाली के दौरान उन्हें जेल से बाहर रहने दिया जाए.
सजा स्थगित करने के इस आवेदन का गोवा सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मांग का विरोध किया था. जस्टिस एम एम सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने तेजपाल की सजा पर रोक लगाने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. तेजपाल और गोवा सरकार के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने कहा कि वह सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है.
6 अगस्त को हुआ था सजा का ऐलान
6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तेजपाल को रेप का दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट के इस फैसले ने ट्रायल कोर्ट के उस पुराने फैसले को पलट दिया, जिसमें 'तहलका' पत्रिका के पूर्व संपादक तेजपाल को बरी कर दिया गया था.
तरुण तेजपाल पर क्या है आरोप?
उन्हें 2013 में गोवा में पत्रिका की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, एक होटल की लिफ्ट में अपनी एक जूनियर सहकर्मी के साथ रेप करने का दोषी पाया गया था. 62 वर्षीय पत्रकार ने दावा किया है कि वह राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार हुए हैं. 20 अगस्त को तेजपाल ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
तरुण तेजपाल के खिलाफ गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका में सजा की अवधि को 10 साल से बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है.
तहलका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल ने 14 सितंबर को गोवा की एक अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि 10 साल की जेल की सजा भुगतने के लिए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करें. सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण से छूट के अनुरोध वाली तेजपाल की याचिका खारिज कर दी थी.























