गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से पूजा की जाती है।
Magh Gupt Navratri 2026: 19 या 20 कब शुरू होगी गुप्त नवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व!
Gupt Navratri 2026: इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो रही है. वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा. ज्योतिषाचार्य से जानिए इसका महत्व, नियम, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र के बारे में.

Magh Maas Navratri 2026: हिंदू धर्म में का विशेष महत्व है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में शक्ति की साधना की जाती है. हिंदू धर्म के कैलेंडर के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि का पर्व होता है. चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि पड़ती है.
पंचांग के अनुसार पहली गुप्त नवरात्रि माघ मास में और दूसरी आषाढ़ मास में पड़ती है. गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलावा मां भगवती दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है.
माघ मास की नवरात्रि कब?
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि, माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है. पंचाग के अनुसार इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो रही है. वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा.
इस गुप्त नवरात्र की शुरुआत जहां सर्वार्थसिद्धि योग के महासंयोग में होगी तो समापन के दिन 27 जनवरी को भी सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग रहेगा. खास बात यह है कि इन नौ दिनों में शुभ और मांगलिक कार्य हो सकेंगे, जो शुक्र अस्त होने के कारण नहीं हो पा रहे हैं. इन नौ दिनों में किए मांगलिक कार्य फलदायी भी रहेंगे.
इन नौ दिन में 10 महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से पूजा की जाएगी.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानिए गुप्त नवरात्रि का महत्व
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि माघ महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तक चलती है. मां दुर्गा को उपासक 9 दिन तक गुप्त तरीके से शक्ति साधना व तंत्र सिद्धि करते हैं. गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
पूरे वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और दो प्रकट नवरात्रि होती हैं. माघ और आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि होती हैं और प्रकट नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि तथा आश्विन माह की शारदीय नवरात्रि होती है. देवी भागवत महापुराण में मां दुर्गा की पूजा के लिए इन चार नवरात्रियों का उल्लेख है.
माघ गुप्त नवरात्रि
- प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 19 जनवरी 2026, सोमवार को सुबह 01:21 बजे.
- प्रतिपदा तिथि का समापन: 20 जनवरी 2026, मंगलवार को सुबह 02:14 बजे.
- उदयातिथि के अनुसार: माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को होगा.
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
- घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक.
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक.
माघ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार सोमवार 19 जनवरी को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा. मध्यान काल में शुभ अभिजीत के समय सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा.
सर्वार्थसिद्धि योग प्रत्येक शुभ कार्य को सफल करने वाला माना गया है. इस योग में किए गए शुभ मांगलिक कार्य मनोरथ पूर्ण करते हैं. इस योग में साधना, आराधना की शुरुआत करने से यह शीघ्र फलित होती है.
चार रवियोग का संयोग
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि दो सर्वार्थसिद्धि व चार रवि योग का संयोग माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी पर्यंत गुप्त नवरात्रि का अनुक्रम रहता है. यह साधक और आराधकों के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है. इस कालखंड में चुंकी सूर्य का उत्तरायण होता है, जो शुभ मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.
ग्रह योग की गणना भी इस बार श्रेष्ठ है जो साधना का अनुकूल और मनवांछित फल प्रदान कर सकती है. इस बार नवरात्र के नौ दिनों में दो सर्वार्थ सिद्धि योग है और चार रवि योग का संयोग बन रहा है.
- 19 जनवरी: कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 20 जनवरी: द्विपुष्कर योग, राजयोग
- 21 जनवरी: राजयोग, रवि योग
- 22 जनवरी: रवि योग
- 23 जनवरी: कुमार योग, रवि योग
- 24 जनवरी: रवि योग
- 25 जनवरी: रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 27 जनवरी: सर्वार्थ सिद्धि योग.
गुप्त नवरात्रि में साधना
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि प्रत्यक्ष नवरात्रि में मां भगवती की पूजा जहां माता के ममत्व के रूप में की जाती है तो वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा शक्ति रूप में की जाती है.
मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में देवी साधना किसी को बता कर नहीं की जाती है. इसलिए इन दिनों को नाम ही गुप्त दिया गया है. गुप्त नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक गुप्त अनुष्ठान किये जाते हैं. इन दिनों देवी दुर्गा के दस रूपों की पूजा की जाती है.
मान्यता है कि इन नवरात्रि में देवी साधना से शीघ्र प्रसन्न् होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं. जितनी अधिक गोपनीयता इस साधना की होगी उसका फल भी उतनी ही जल्दी मिलेगा. देवी के मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी देवी, भुनेश्वरी देवी, मां धूम्रावती, बगलामुखी माता, मातंगी माता और देवी कमला की गुप्त नवरात्रि में पूजा की जाती है.
मंत्र जाप, श्री दुर्गा सप्तशती, हवन के द्वारा इन दिनों देवी साधना करते हैं. यदि आप हवन आदि कर्मकांड करने में असहज हों तो नौ दिन का किसी भी तरह का संकल्प जैसे सवा लाख मंत्रों का जाप कर अनुष्ठान कर सकते हैं. या फिर राम रक्षा स्त्रोत, देवी भागवत आदि का नौ दिन का संकल्प लेकर पाठ कर सकते हैं. अखंड जोत जलाकर साधना करने से माता प्रसन्न होती हैं.
सामग्री
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल आदि.
मां दुर्गा की ऐसे करें पूजा
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं. मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है.
इसके बाद मां के चरणों में पूजा सामग्री को अर्पित किया जाता है. मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है. सरसों के तेल से दीपक जलाकर 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए.
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Frequently Asked Questions
गुप्त नवरात्रि का क्या महत्व है?
माघ गुप्त नवरात्रि 2026 में कब से शुरू हो रही है?
पंचांग के अनुसार, इस साल माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी 2026 से हो रही है और इसका समापन 27 जनवरी को होगा।
गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की पूजा की जाती है?
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलावा मां भगवती दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जैसे मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी आदि।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त क्या है?
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक है, और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक है।
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