फिलीपींस में खनन अभियान के दौरान मिले 10,000 साल पुराने त्रिशूल और वज्र! शोधकर्ता हुसैन का चौंकाने वाला दावा!
भारतीय शोधकर्ता सैयद शमीम हुसैन ने दावा करता हुए बताया कि, फिलीपींस में खनन के दौरान उन्हें सनातन धर्म की आस्था से जुड़े 10,000 साल पुराना त्रिशूल और व्रजा मिला है. ये वस्तु शिव और इंद्र से जुड़ी हैं.

भारतीय शोधकर्ता सैयद शमीम हुसैन ने दावा करते हुए बताया है कि, फिलीपींस में एक खनन अभियान के दौरान सनातन धर्म की आस्था से जुड़े प्रतीक त्रिशूल और वज्र मिले हैं. उनके मुताबिक ये कलाकृतियां हजारों साल पुरानी हो सकती हैं और प्राचीन भारतीय सभ्यता से जुड़ी हो सकती हैं.
शोधकर्ता ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा करते हुए बताया कि, खुदाई में मिली त्रिशूल करीब 10 हजार साल पुराने हो सकते हैं, जबकि वज्र करीब 3000 साल पुराना है. उनका मानना है कि, ये वस्तुएं शिव और इंद्र से जुड़े प्रतीकात्मक हथियारों से मेल खाती है.
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हुसैन को ये कलाकृतियां साल 2015 में मिलीं
हुसैन ने बताया कि, ये कलाकृतियां मई 2015 में तब मिलीं जब वह फिलीपींस में तांबा और सोने के खनन कार्य में शामिल थे. वह साल 2012 से उसी देश में काम कर रहे थे और खनन स्थलों पर स्थानीय निवासियों के साथ सहयोग कर रहे थे.
खनन के दौरान उनके साथ के लोगों ने कुछ असामान्य वस्तुएं मिलने की सूचना दी. जब उनका निरीक्षण किया गया तो, उन्हें धातुओं की दो ऐसी कलाकृतियां मिलीं जो खनन के दौरान मिली अन्य वस्तुओं से काफी अलग थीं.
खनन में मिली एक वस्तु दिखने में त्रिशूल जैसी दिखती थी, जबकि दूसरी का आकार हिंदू पौराणिक कथाओं पर वर्णित वज्र के समान था. हुसैन ने बाद में निष्कर्ष निकाला कि ये वस्तुएं प्राचीन भारतीय परंपराओं के धार्मिक प्रतीकों से मेल खाती हैं.
त्रिशूल 10,000 साल पुराना बताया जा रहा है
खोज के बाद उन्हें जांच के लिए साल 2016 में भारत लाया गया. उन्होंने कई सालों तक इन कलाकृतियों का अध्ययन किया और पुरातत्वविदों और धार्मिक विद्वानों समेत विशेषज्ञों से परामर्श करने में बिताए. उन्होंने दावा किया कि, त्रिशूल करीब 10,000 हजार साल पुराना हो सकता है, जबकि वज्र करीब 3000 हजार साल पुराना है.
हुसैन ने जानकारी देते हुए बताया कि, इन कलाकृतियों के बारे में उन्होंने विशेषज्ञों से चर्चा की ओर इन्हें पंजीकृत कराने के लिए भारत में अधिकारियों से भी संपर्क किया. खबरों के मुताबिक, बाद में इन वस्तुओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय में दर्ज कराया गया.

प्रतीकों का सांस्कृतिक महत्व समझिए?
सनातन धर्म में त्रिशूल का प्रतीक भगवान शिव के हथियार से जोड़ा जाता है. त्रिशूल की तीन शाखाएं सृजन, संरक्षण और संहार समेत विभिन्न दार्शनिक अवधारणाओं का प्रतीक हैं.
दूसरी तरफ व्रज का संबंध भगवान इंद्र के हथियार से है, जो वैदिक देवता हैं और गरज, वर्षा और तूफान से जुड़े हुए हैं. प्राचीन ग्रंथों में व्रज को एक शक्तिशाली हथियार के रूप में वर्णित किया गया है, जो शक्ति और दैवीय अधिकार का प्रतीक है.
पौराणिक कथाओं में उनका मजबूत जुड़ाव की वजह से भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर ऐसी कलाकृतियों की खोज ने एशिया भर में प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान करने वालों के बीच रुचि जगाई है.
एशिया के कई देशों में पुराने दौर में भारत का प्रभाव था. ये असर लड़ाई से नहीं, बल्कि व्यापार, लोगों के आने-जाने और धर्म के फैलाव का असल कारण था.
इसी कारण इंडोनेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड और उसके आस-पास के क्षेत्रों में आज भी भारतीय संस्कृति के निशान देखने को मिलते हैं, जैसे संस्कृत भाषा, मंदिर के अवशेष और हिंदू-बौद्ध देवी-देवताओं की मूर्तियां शामिल हैं.
अब अगर फिलीपींस में जो वस्तुएं मिली हैं, वो सच में पुरानी और असली साबित होती हैं, तो इसका मतलब होगा कि, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संबंध पहले से ज्यादा गहरे थे.
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