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ज्यादा ऊंचाई पर ट्रैवलिंग से क्यों गड़बड़ा जाता है हमारा पेट? जान लीजिए कारण

ऊंचाई वाली जगहों पर पहुंचते हैं, उनका पेट गड़बड़ होने लगता है. किसी को गैस बनने लगती है, किसी का पेट फूल जाता है, तो किसी को कब्ज, भारीपन या उलझन जैसी दिक्कत होने लगती है.

नया साल आते ही बहुत से लोग पहाड़ों पर घूमने का प्लान बना लेते हैं. कोई मनाली जाना चाहता है, कोई शिमला, तो कोई लेह-लद्दाख या मसूरी. बर्फ से ढकी पहाड़ियां, ठंडी हवा, खूबसूरत नजारे और सुकून भरा माहौल हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है. लेकिन जितनी खूबसूरत ये जगहें होती हैं, उतनी ही परेशानियां भी साथ लेकर आती हैं. अक्सर ऐसा देखा गया है कि जैसे ही लोग ऊंचाई वाली जगहों पर पहुंचते हैं, उनका पेट गड़बड़ होने लगता है. किसी को गैस बनने लगती है, किसी का पेट फूल जाता है, तो किसी को कब्ज, भारीपन या उलझन जैसी दिक्कत होने लगती है.

कई बार तो भूख भी खत्म हो जाती है और खाने का मन नहीं करता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पहाड़ों पर जाते ही पेट क्यों खराब हो जाता है. क्या यह सिर्फ ठंड या बाहर का खाना खाने की वजह से होता है, या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह छुपी है. न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, ऊंचाई पर पेट खराब होने की वजह सिर्फ मौसम या ट्रैवल थकान नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन हमारे शरीर के ऑक्सीजन लेवल, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र से जुड़ा हुआ है. तो आइए जानते हैं कि ज्यादा ऊंचाई पर पेट क्यों बिगड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है. 

ज्यादा ऊंचाई पर ट्रैवलिंग से क्यों गड़बड़ा जाता है हमारा पेट?

न्यूट्रिशनिस्ट बताते हैं कि ऊंचाई पर पेट की समस्या की सबसे बड़ी वजह है हाइपोक्सिया, यानी शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाना है. जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर जाते हैं, हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है. इसका असर सिर्फ हमारी सांसों पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरे शरीर पर पड़ता है, खासकर नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र पर. हमारे शरीर में एक खास नर्व होती है, जिसे वेगस नर्व कहा जाता है.

यह नर्व हमारे पाचन तंत्र को कंट्रोल करती है यानी आंतों की मूवमेंट, खाना पचाने वाले एंजाइम्स का रिलीज, पेट का सही समय पर खाली होना ये सब काम वेगस नर्व की मदद से होते हैं. लेकिन जब हम ज्यादा ऊंचाई पर जाते हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो वेगस नर्व ठीक से काम नहीं कर पाती है. इसका नतीजा यह होता है कि पाचन धीमा हो जाता है, पेट देर से खाली होता है, गैस बनने लगती है, पेट फूल जाता है, भारीपन और बेचैनी महसूस होती है. यही वजह है कि पहाड़ों पर बिना ज्यादा खाए भी पेट भरा-भरा सा लगता है. 

स्टडी क्या कहती है?

न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, एक स्टडी में यह पाया गया है कि हाइपोक्सिया GI मोटिलिटी यानी आंतों की गति को धीमा कर देता है. जब खाना आंतों में धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, तो वह ज्यादा देर तक पेट में रहता है. इससे खाना फर्मेंट होने लगता है और ज्यादा गैस बनती है. यही कारण है कि ऊंचाई पर लोगों को अक्सर ब्लोटिंग और गैस की शिकायत होती है. 

ठंड भी बिगाड़ देती है पाचन

ऊंचाई वाली जगहों पर सिर्फ ऑक्सीजन ही कम नहीं होती, बल्कि ठंड भी काफी ज्यादा होती है. ठंड के कारण शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिसे आम भाषा में फाइट या फ्लाइट मोड कहा जाता है. इस मोड में शरीर का ध्यान एनर्जी बचाने पर होता है, न कि पाचन पर, इसका असर यह होता है कि पाचन और धीमा हो जाता है, भूख कम लगने लगती है, पेट भारी और सुस्त महसूस होता है

सफर से पहले पेट को कैसे करें तैयार?

जैसे हम ट्रैवल से पहले सूटकेस सोच-समझकर पैक करते हैं, वैसे ही पेट की तैयारी भी जरूरी है. इसलिए जाने से पहले बहुत भारी, तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लें, पर्याप्त पानी पिएं, डिहाइड्रेशन से बचें, फाइबर और प्रोबायोटिक फूड्स डाइट में शामिल करें, यात्रा के दौरान छोटे-छोटे मील लें, ओवरईटिंग से बचें. 

ये भी पढ़ें: Liver Cancer: लिवर कैंसर में कब बदल जाता है फैटी लिवर? दिक्कत बढ़ने से पहले समझें लक्षण

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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