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सावधान ! अगर आपकी बॉडी दे रही है ऐसे संकेत, तो देर किए बिना ही करें डॉक्टर से संपर्क, ये हैं मल्टीपल ऑर्गन फेल होने के लक्षण
Health: मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से जान भी जा सकती है. अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो डॉक्टर की मदद से इससे बच सकते हैं. आइए जानते हैं किन वजहों से शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं.

मल्टीपल ऑर्गन फेलियर क्या होता है
Source : Freepik
Multiple Organ failure Symptoms: आजकल मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की वजह से न जाने कितने लोगों की जान चली जा रही है. जब शरीर के दो या उससे ज्यादा अंग एक साथ काम करना बंद कर देते हैं, तब मल्टीपल ऑर्गन फेलियर (Multiple Organ failure) का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर यह मल्टीपल ऑर्गन फेलियर किन-किन वजहों से हो सकता है, इसके क्या सिम्टम्स (Multiple Organ failure Symptoms) होते हैं और किन लोगों को इससे ज्यादा खतरा रहता है..
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर क्या होता है
जब किसी इंफेक्शन या चोट की वजह से आई सूजन से दो या अधिक अंग काम करना बंद कर देते हैं, तब इसे मल्टीपल ऑर्गन फेलियर कहा जाता है. इसे मल्टीपल ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम (MODS) के नाम से भी जाना जाता है. यह खतरनाक और जानलेवा हो सकता है. ऐसी सिचुएशन में इम्यून सिस्टम के साथ ही पूरी बॉडी प्रभावित होती है.
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का कारण
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई वजह से हो सकती है. हालांकि, ऑर्गन सिंड्रोम को सेप्सिस से ट्रिगर किया जा सकता है. चोट, संक्रमण, हाइपरमेटाबॉलिज्म और हाइपोपरफ्यूजन की वजह से ये सिंड्रोम होता है. ऐसी स्थिति में साइटोकिन्स सेल्स का निर्माण कार्य अहम भूमिका निभाता है. इसी दौरान सेल्स को मैसेज भेजकर इम्यून सिस्टम को एक्टिव रखा जाता है. शरीर में ब्रैडीकिनिन प्रोटीन्स ज्यादा होने पर भी मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होता है.
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के लक्षण
शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से नहीं हो पाता है.
शरीर में सूजन आना और ब्लड क्लॉट बनना.
शरीर ठंड महसूस होना.
मांसपेशियों में दर्द शुरू हो जाना.
दिनभर पेशाब न आना.
सांस लेने में ज्यादा परेशानी होना.
त्वचा का बेजान पड़ जाना.
मल्टीपन ऑर्गन फेलियर का असर किन अंगों पर होता है
- फेफड़े
- हार्ट
- किडनी
- लीवर
- ब्रेन
- ब्लड
मल्टीपल ऑर्गन फेलियर का इलाज
एक रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, दुनिया में अगर किसी का कोई अंग फेल हो जाता है तो उसका इलाज काफी हद तक कारगर है. पिछले 20 साल में देखा जाए तो इससे प्रभावित मरीज की मृत्यु दर में काफी कमी है. अगर समय रहते सिम्टम्स पहचान लिए जाए और जांच करा लिया जाए तो इससे बचाव हो सकता है. जब भी इसके लक्षण नजर आए तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टर इंफेक्शन और ब्लड क्लॉट बनने की जांच करेंगे. इसके साथ ही कई और टेस्ट भी होते हैं. जिसके बाद इलाज चलता है.
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