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क्या होता है 'मल ट्रांसप्लांट', क्या इससे वाकई बचाई जा सकती है जान

मल ट्रांसप्लांट सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन यह आंतों की बीमारियों के लिए एक असरदार इलाज बनकर उभर रहा है. खासकर, क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल इंफेक्शन में यह काफी कारगर हो सकता है.

Fecal Transplant : हमारे शरीर की सेहत का सीधा संबंध हमारी आंतों (Gut) से होता है. इसमें किसी तरह की समस्या, ओवरऑल हेल्थ पर असर डाल सकती है. इसी के इलाज से जुड़ा है मल ट्रांसप्लांट (Fecal Transplant). इसे फेकल ट्रांसप्लांट या फेकल माइक्रोबायोटा ट्रांसप्लांट भी कहा जाता है. असल में यह स्टूल ट्रांसप्लांट होता है.

इन दिनों इसकी खूब चर्चा हो रही है. कई लोगों को नाम सुनने में अजीब भी लगता है लेकिन यह एक मेडिकल प्रोसीजर है. आइए जानते हैं आखिर ये मल ट्रांसप्लांट होता क्या है, क्या सचमुच इससे किसी बीमारी का इलाज हो सकता है...

मल ट्रांसप्लांट क्या होता है 

मल ट्रांसप्लांट (Fecal Microbiota Transplantation) एक मेडिकल प्रोसीजर है, जिसमें हेल्दी व्यक्ति के मल से लिए गए बैक्टीरिया को एक बीमार व्यक्ति की आंतों में डाला जाता है. इसका मकसद गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) को बैलेंस करना और पाचन तंत्र (Digestive System) को फिर से स्वस्थ बनाना है.

इस प्रक्रिया में हेल्दी डोनर से मल लिया जाता है, उसे फिल्टर और प्रोसेस करके एक लिक्विड फॉर्म में तैयार किया जाता है, फिर इसे कोलोनोस्कोपी, एनिमा, कैप्सूल या नेजल ट्यूब के जरिए मरीज की आंतों में डाला जाता है.

किन बीमारियों में कारगर है मल ट्रांसप्लांट

मल ट्रांसप्लांट को खासतौर पर क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल (Clostridium Difficile) इंफेक्शन के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो आंतों में एक खतरनाक बैक्टीरिया का इंफेक्शन है. इसके अलावा भी कई बीमारियों को दूर करने में इसका इस्तेमाल हो सकता है.

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मल ट्रांसप्लांट से इन बीमारियों का भी इलाज

1. आईबीएस (Irritable Bowel Syndrome), जिसमें पेट में दर्द, सूजन और खराब पाचन की समस्या होती है.

2. अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिजीज में,जो दोनों आंतों की सूजन से जुड़ी बीमारियां हैं.

3. ऑटिज्म और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में भी इसकी मदद ली जा सकती है. कुछ रिसर्च के मुताबिक, मल ट्रांसप्लांट ऑटिज्म से जुड़े पाचन संबंधी दिक्कतों को कम कर सकता है.

4. मोटापा और मेटाबॉलिक डिसऑर्डर में भी यह प्रोसीजर फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि आंतों के बैक्टीरिया का संतुलन वजन पर भी असर डाल सकता है.

क्या मल ट्रांसप्लांट से जान बचाई जा सकती है

अध्ययनों के अनुसार, क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल इंफेक्शन से पीड़ित 90% से ज्यादा मरीजों को मल ट्रांसप्लांट से राहत मिली है. यह उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक यानी जान बचाने वाला हो सकता है, जिन पर एंटीबायोटिक्स असर नहीं कर रही होती है. हालांकि, अन्य बीमारियों के लिए इस तकनीक पर अभी भी रिसर्च जारी है. वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले समय में यह पाचन तंत्र और इम्यून सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का क्रांतिकारी इलाज साबित हो सकता है.

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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