क्या Mpox सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज है? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स
एमपॉक्स इंसानों से इंसानों में भी फैल सकती है. इसके लक्षण चेचक की तरह ही होते हैं. हालांकि, कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज है, जबकि कुछ इससे सहमत नहीं है.

Mpox Virus : अफ्रीका से चला खतरनाक एमपॉक्स यानी मंकीपॉक्स वायरस दुनिया के लिए टेंशन बना हुआ है. WHO इस वायरस को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुका है. यह वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज यानी यौन संचारित रोग (STD) है. ताकि इसके लक्षणों के आधार पर इसे कंट्रोल किया जा सके. हालांकि, इसे लेकर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है.
क्या Mpox सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज है
अध्ययनों से पता चला कि अब तक पता चले एमपॉक्स के 98% मामले सेक्सुअल ट्रांसमिशन से जुड़े थे. मुख्य तौर से पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों (MSM) और बायसेक्सुअल लोगों में. इनके आधार पर कुछ साइंटिस्ट्स ने सलाह दिया है कि एमपॉक्स बढ़ने का पैटर्न एक एसटीडी की विशेषताओं के साथ अलाइन है.
2022 के अंत में क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में एलटी एलन-ब्लिट्ज, एम गांधी और पी एडमसन सहित शोधकर्ताओं ने ब्रैडफोर्ड हिल स्टैंडर्ड का हवाला देते हुए कहा, एमपॉक्स को एसटीडी के रूप में मान्यता देने से वैक्सीनेशन, टेस्टिंग और अवेयरनेस कैंपेन में मदद मिलेगी. उन्होंने तर्क दिया कि रिस्क ग्रुप में व्यवहारिक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करने से संक्रमण की संख्या में काफी कमी आ सकती है और रोकथाम के प्रयासों में सुधार हो सकता है.
क्या हैं चिंताएं
अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि एमपॉक्स को एसटीडी के रूप में मानना खतरनाक हो सकता है. उसी क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिजीज के एडिशन में शोधकर्ता अनिरुद्ध हाजरा और जोसेफ एन. चेराबी ने बताया कि अफ्रीका में एमपॉक्स का कहर मुख्य तौर से घरेलू संपर्क या बुशमीट सेवन से जानवर से इंसानों में इंफेक्शन के माध्यम से फैलता है. उन्होंने चेतावनी दी कि एमपॉक्स को एसटीडी के रूप में लेबल करने से बाल चिकित्सा मामलों (pediatric cases) और अन्य कमजोर समूहों से ध्यान हट सकता है. डर यह है कि अगर इसे सेक्सुअल ट्रांसमिटेड बीमारी मानी गई तो इसे रोकने के लिए चल रही कोशिशों को झटका लग सकता है.
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केरल का केस STD लेबलिंग को चुनौती देता है
केरल एमपॉक्स मामलों को मैनेज करने में सबसे आगे रहा है. राज्य ने संयुक्त अरब अमीरात से लौटने वाले एक यात्री में क्लेड 1बी स्ट्रेन का पहला मामला दर्ज किया. जनवरी 2025 में दो और मामले सामने आए, लेकिन सभी मरीज़ बिना किसी सेकेंडरी इंफेक्शन सफलतापूर्वक ठीक हो गए, जिससे खतरा टल गया. इसे देखते हुए पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स ने एमपॉक्स को एसटीडी के तौर पर मानने पर चिंता जताई है.
जनवरी 2025 में लैसेंट में पब्लिश एक रिसर्च में एक्सपर्ट टीएस अनीश, अनस्वरा नवीन और रेघुकुमार अरविंद ने जोर दिया कि एमपॉक्स को एसटीडी के रूप में लेबल करने के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक असर पर भी विचार करना चाहिए. खासकर उन समुदायों में जहां एमएसएम और एसटीडी को कलंक माना जाता है.
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Source: IOCL























