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वेट लॉस या फैट लॉस... ब्लड शुगर मरीजों के लिए क्या है सही तरीका?

जब लोग डाइटिंग शुरू करते हैं या एक्सरसाइज करते हैं तो जल्दी वजन घटने लगता है. लेकिन शुरुआती दिनों में जो वजन कम होता है, वह ज्यादातर पानी ग्लाइकोजन और कभी-कभी मसल्स लॉस की वजह से होता है.

आजकल लोग हेल्दी रहने और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने के लिए सबसे पहले वजन घटाने की सलाह देते हैं.  हर कोई यही सोचता है कि अगर वजन कम हो गया तो डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाएगा. लेकिन सच यह होता है कि वेट लॉस और फैट लॉस दोनों एक जैसी चीज नहीं होती है. कई बार वजन तो घट जाता है लेकिन शरीर के अंदर मौजूद फैट नहीं घटता और यही कारण है कि ब्लड शुगर और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर असर नहीं पड़ता है.

दरअसल वजन घटाने से शरीर का नंबर यानी स्केल पर दिखने वाला आंकड़ा तो कम हो सकता है, लेकिन असली सुधार तब होता है जब शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट खासकर पेट और लिवर के आसपास जमा विसरल फैट घटता है. यही फैट इन्सुलिन रेजिस्टेंस की बड़ी वजह बनता है. जिसका मतलब है कि अगर आप ब्लड शुगर की समस्या से जूझ रहे हैं तो सिर्फ वजन घटाने की बजाई फैट लॉस पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद होता है.

वेट लॉस का मतलब फैट लॉस नहीं

जब लोग डाइटिंग शुरू करते हैं या एक्सरसाइज करते हैं तो जल्दी वजन घटने लगता है. लेकिन शुरुआती दिनों में जो वजन कम होता है, वह ज्यादातर पानी ग्लाइकोजन और कभी-कभी मसल्स लॉस की वजह से होता है. रिसर्च के अनुसार अगर वजन कम करते समय मसल्स भी घट जाए तो इसका ब्लड शुगर कंट्रोल पर नेगेटिव असर पड़ सकता है. क्योंकि मसल्स ही ग्लूकोज को एनर्जी में बदलने का सबसे अहम जरिया मानी जाती है. जिसका मतलब है कि वजन घटने के बावजूद मेटाबॉलिक हेल्थ नहीं सुधर पाती है.

फैट लॉस से कैसे सुधरती है इंसुलिन सेंसिटिविटी?

फैट लॉस का मतलब शरीर में मौजूद फैट टिश्यू खासकर पेट और लिवर के आसपास जमा विसरल फैट को घटना होता है. यही फैट इन्सुलिन रेजिस्टेंस की जड़ में होता है. जब यह फैट कम होता है तो शरीर में सूजन घटती है और इंसुलिन पर असर करने वाले फैटी एसिड्स भी कम हो जाते हैं. एक रिसर्च में यह सामने आया है कि शरीर की कुल फैट मात्रा में सिर्फ 10 प्रतिशत की कमी से इन्सुलिन सेंसटिविटी करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, भले ही कुल वजन में बहुत बदलाव न आए. वहीं शरीर में जमा हर फैट एक जैसा नहीं होता है. स्किन के नीचे जमा सबक्यूटेनियस फैट कम नुकसानदायक होता है. लेकिन अंगों के आसपास जमा विसरल फैट सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. यही फैट लिवर पैंक्रियाज और आंतों के आसपास जमा होकर ब्लड शुगर को बढ़ाता है. लिवर में जमा फैट इतना खतरनाक होता है कि यह शरीर में ग्लूकोज रिलीज करता है. भले ही ब्लड शुगर पहले से हाई हो. यही वजह है कि कई बार लोग जिन लोगों का वजन सामान्य दिखता है वह भी डायबिटीज का शिकार हो जाते हैं. इसे मेटाबॉलिकली ओबेस नॉर्मल वेट कहा जाता है.

क्या बिना ज्यादा वजन घटाएं फैट घटाना मुमकिन है?

दरअसल बिना ज्यादा वजन घटाएं फैट घटाना मुमकिन है और यही तरीका हेल्दी भी माना जाता है. कई लोग फैट घटाते हुए मसल्स को बनाए रखते हैं. इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार आता है और मेटाबॉलिक हेल्थ बेहतर होती है. भले ही स्केल पर ज्यादा वजन ना बदले. एक रिसर्च के अनुसार जो लोग रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को डाइटिंग के साथ जोड़ते हैं उनका ब्लड शुगर कंट्रोल सिर्फ डाइटिंग करने वालों की तुलना में ज्यादा अच्छा होता है. इसकी वजह यह मानी जाती है कि मसल्स ग्लूकोज को अवशोषित कर उसे एनर्जी में बदलने का काम करते हैं.

फैट लॉस के लिए असरदार तरीके

  • फैट लॉस करने के लिए रेजिस्टेंस और एरोबिक ट्रेनिंग करें, जिससे मसल्स भी बने रहेंगे और फैट बर्न होगा.
  • इसके अलावा फैट लॉस के लिए प्रोटीन युक्त भोजन लें, ताकि मसल्स लॉस न हो.
  • वहीं फाइबर हेल्दी फैट और साबुत अनाज को डाइट में शामिल करें.
  • फैट लॉस के लिए पूरी नींद लें, क्योंकि नींद की कमी इन्सुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है.
  • फैट लॉस के लिए फास्ट डाइट या एक्सट्रीम डिटॉक्स प्लान से बचना भी ज्यादा सही माना जाता है. ‌

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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