देश की राजधानी दिल्ली जल रही है. सीएए विरोधियों और समर्थकों के बीच हुई हिंसा ने कल पूरे देश को दहला दिया.जाफराबाद और मौजपुर में कई गाड़ियों, दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई. झड़प में दिल्ली पुलिस के एक कॉन्सटेबल समेत चार आम नागरिकों की मौत हो गई. हिंसा के दौरान खौफनाक मंजर दिखा. देखिए दिल दहला देने वाली हिंसा की ये तस्वीरें.
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साथ ही कुछ जगहों को चिन्हित करके वहां पुलिस को रणनीतिक तौर पर तैनात किया गया है, जहां गड़बड़ी की संभावना है.
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सोमवार दिन में मौजपुर, कर्दमपुरी चांद बाग़, भजनपुरा, करावल नगर आदि इलाकों में काफी ज्यादा हिंसा हुई. लोगों ने आमने-सामने आकर पथराव किया.
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आलम ये था कि जहां पर जो भी लोग ज्यादा संख्या में मौजूद रहे, उन्होंने कम संख्या वाले लोगों की दुकानों पर हमला किया, दुकान के शटर तोड़कर उनके सामान को बाहर निकाला और फिर आग लगा दी.
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रात भर दिल्ली फायर सर्विस को उत्तर पूर्वी जिले के अलग-अलग इलाकों से आगजनी की कई सारी कॉल भी मिली.
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सूत्रों के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली इलाके में सीआरपीएफ की आठ कंपनिया तैनात की गई हैं. इसमें रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां शामिल हैं.
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क्राइम ब्रांच जैसी प्रोफेशनल यूनिट को लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन को हैंडल करने के लिए उत्तर पूर्वी जिले में तैनात किया जा रहा है.
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सोमवार को हुई हिंसा को देखते हुए उत्तर पूर्वी जिले में ज्यादा से ज्यादा संख्या में पुलिस की तैनाती करने का निर्णय लिया गया है
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दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को पुलिस आयुक्त की तरफ से साफ निर्देश दिए गए हैं कि मंगलवार सुबह लगभग 7:30 बजे तक क्राइम ब्रांच का तमाम स्टाफ व अधिकारी उत्तर पूर्वी जिले में तैनात किए जाएं.
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सके अलावा पुलिस पर भी कई जगहों पर पथराव किया गया. जिस दौरान उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों से उनके सरकारी पिस्टल भी लूट ली.
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देर रात और आधी रात के बाद की बात करें तो उत्तर पूर्वी जिले के अलग-अलग इलाकों में लोग समूह के अंदर नजर आए जबकि धारा 144 के तहत 4 या 4 से ज्यादा लोग एकत्र नहीं हो सकते.
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सोमवार को हुई हिंसा और आगजनी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने सोमवार शाम को पूरे उत्तर पूर्वी जिले में धारा 144 लगाए जाने का फरमान जारी कर दिया था.
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सोमवार दिन भर चली हिंसा के बाद रात को भी उत्तर पूर्वी जिले के अलग-अलग इलाकों का हाल बेहद ही डरावना रहा.
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उत्तर पूर्वी जिले के अधिकतर इलाके ऐसे रहे जो डर और तनाव के माहौल से ग्रस्त रहे. इतना ही नहीं अधिकतर कॉलोनियों में लोगों ने जागकर रात बिताई और अपनी गलियों के बाहर समूह में एकत्र होकर पहरेदारी भी की.