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Electric Shock: कुछ लोगों को क्यों नहीं लगता बिजली का झटका, क्या है वजह?

Electric Shock: बिजली के तार पकड़ने से अक्सर तेज का झटका लगता है, लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता है. कई बार आपकी स्थिति पर मायने रखता है कि झटका लगेगा की नहीं.

Electric Shock: सोशल मीडिया या खबरों में आपने अक्सर ऐसे लोगों के बारे में सुना या देखा होगा, जो बिजली के नंगे तारों को हाथ से छू लेते हैं और उन्हें करंट का बिल्कुल भी अहसास नहीं होता. आम इंसान जहां थोड़े से करंट से भी कांप जाता है, वहीं इन लोगों को देखकर ऐसा लगता है जैसे इनके पास कोई सुपरपावर हो. लेकिन विज्ञान की दुनिया में इसे कोई चमत्कार नहीं माना जाता। वैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ लोगों को बिजली का झटका न लगने या बहुत कम लगने के पीछे पूरी तरह से बायोलॉजिकल और फिजिकल साइंस काम करता है. 

स्किन रेजिस्टेंस 

दरअसल, बिजली का झटका लगना इस बात पर निर्भर करता है कि आपके शरीर की त्वचा बिजली के रास्ते में कितनी रुकावट पैदा कर सकती है. विज्ञान की भाषा में इसे रेजिस्टेंस कहते हैं. जिन लोगों की त्वचा बहुत ज्यादा सूखी, मोटी और सख्त होती है, उनके शरीर का रेजिस्टेंस लेवल बहुत हाई होता है। ऐसे लोगों के शरीर में बिजली आसानी से प्रवेश नहीं कर पाती. इसके विपरीत, जिन लोगों की त्वचा पतली या पसीने से गीली होती है, उन्हें बहुत तेजी से करंट लगता है. 

शरीर में कम नमी और पसीने की कमी

हमारे शरीर का लगभग 60-70 प्रतिशत हिस्सा पानी और नमक से बना है, जो बिजली को बहुत तेजी से फैलाते हैं. हालांकि, हर इंसान के शरीर की बनावट अलग होती है. कुछ लोगों की बॉडी कंपोजिशन में प्राकृतिक रूप से नमी की मात्रा कम होती है और उनके हाथों में पसीना नहीं आता. पसीना और नमी न होने की वजह से बिजली को शरीर के भीतर जाने का आसान रास्ता नहीं मिलता, जिससे उन्हें सामान्य लोगों की तुलना में करंट का झटका बहुत कम या नहीं के बराबर लगता है. 

हाई वोल्टेज बनाम लो करंट

अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्यादा वोल्टेज ही जानलेवा होता है, लेकिन विज्ञान कहता है कि इंसान की जान वोल्टेज नहीं बल्कि करंट की मात्रा लेती है, अगर बिजली के तार में वोल्टेज ज्यादा है लेकिन करंट का बहाव बहुत कम है, तो वह इंसानी नसों और दिल को नुकसान नहीं पहुंचा पाता. कई बार जिन तारों को लोग छूकर स्टंट दिखाते हैं, उनमें करंट की मात्रा बेहद सुरक्षित स्तर पर होती है. 

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नसों की संवेदनशीलता

करंट लगने पर हमारा दिमाग तुरंत मांसपेशियों को सिकुड़ने का सिग्नल देता है, जिसे हम झटका कहते हैं. लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में, कुछ लोगों की तंत्रिका तंत्र या नसें बिजली के प्रति उतनी संवेदनशील नहीं होतीं. इस वजह से उनका शरीर हल्के करंट के झटके को महसूस ही नहीं कर पाता या उसे बहुत देर से प्रोसेस करता है. 

भले ही कुछ लोगों का शरीर उच्च प्रतिरोध के कारण करंट को झेल जाता है, लेकिन बिजली से खिलवाड़ करना जानलेवा हो सकता है. 

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दीनदयाल पाटीदार एबीपी लाइव में कार्यरत हैं. एजुकेशन बीट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह स्कूल और यूनिवर्सिटी एडमिशन, प्रतियोगी परीक्षाओं के नतीजों, सरकारी भर्तियों, स्कॉलरशिप और शिक्षा से जुड़ी नीतियों पर नियमित तौर पर खबरें लिखते हैं, ताकि छात्रों और अभिभावकों तक सही, सटीक और समय पर जानकारी पहुंच सके. उनकी कोशिश रहती है कि जटिल से जटिल सरकारी नियम और शैक्षणिक अपडेट भी पाठकों तक आसान और समझने लायक भाषा में पहुंचे.

एबीपी लाइव में आने से पहले दीनदयाल पाटीदार अपनी यूनिवर्सिटी की मीडिया टीम का हिस्सा रह चुके हैं, जहां उन्होंने कैंपस से जुड़ी खबरों, इवेंट्स और एकेडमिक गतिविधियों की रिपोर्टिंग और कवरेज की जिम्मेदारी निभाई. इसी दौरान उन्होंने रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग, न्यूज राइटिंग की बारीकियां और खबरों को सही फॉर्मेट व भाषा में पेश करने का हुनर सीखा, जो आज उनकी पत्रकारिता का अहम हिस्सा हैं.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने मंदसौर यूनिवर्सिटी, मंदसौर से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (बीए-जेएमसी) में स्नातक की पढ़ाई की है. वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के रहने वाले हैं.

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