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Why Red Sea Is Called Red: नीले-हरे से लाल कैसे हो जाता है लाल सागर का रंग? जानें रेड सी का नाम पड़ने की असली वजह

Why Red Sea Is Called Red: दुनिया भर में मशहूर लाल सागर का पानी असल में नीला होता है, लेकिन कभी-कभी यह लाल हो जाता है. इसके पीछे विज्ञान और इतिहास के कई दिलचस्प रहस्य छिपे हैं.

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  • यह सागर व्यापार का अहम मार्ग है, स्वेज नहर इसी से जुड़ती है.

Why Red Sea Is Called Red: इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण लाल सागर पूरी दुनिया की चर्चा के केंद्र में है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस समुद्र का पानी आम तौर पर नीला या हरा दिखाई देता है, उसका नाम ‘लाल सागर' क्यों रखा गया है? यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा विज्ञान, सदियों पुराना इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार छिपा है. आइए इस दिलचस्प रहस्य को एकदम आसान भाषा में समझते हैं.

तनाव के बीच क्यों उठा लाल सागर के नाम का सवाल?

आजकल होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर का इलाका भारी भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच हुई तनातनी के कारण यह सागर अंतरराष्ट्रीय खबरों में छाया हुआ है. इसी गहमागहमी के बीच कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री रास्ते का नाम लाल सागर क्यों है, जबकि इसका पानी दूर से देखने पर बिल्कुल सामान्य लगता है.

नीला पानी फिर भी नाम लाल क्यों?

जब भी कोई पहली बार लाल सागर का नाम सुनता है, तो उसके दिमाग में एक ऐसे समुद्र की तस्वीर बनती है जिसका पानी खून या लाल रंग की तरह गहरा होगा, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. अगर आप आम दिनों में लाल सागर को देखेंगे, तो इसका पानी दुनिया के बाकी तमाम समुद्रों की तरह ही साफ, नीला और हल्का हरा दिखाई देगा. फिर भी इसे दुनिया भर में 'रेड सी' या लाल सागर के नाम से पुकारा जाता है और इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई अलग-अलग कारण मौजूद हैं.

लाल कैसे हो जाता है पानी का रंग?

लाल सागर के रंग बदलने के पीछे सबसे बड़ा और मुख्य वैज्ञानिक कारण एक खास तरह का सूक्ष्म जीव है. इस जीव को विज्ञान की भाषा में 'ट्राइकोडेस्मियम इरिथ्रियम' कहा जाता है. यह असल में एक प्रकार का साइनोबैक्टीरिया या नीले-हरे रंग का शैवाल (Algae) है. यह शैवाल इस समुद्र के पानी में बहुत बड़ी मात्रा में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है. यह कोई बाहरी प्रदूषण नहीं है, बल्कि इस समुद्र के ईकोसिस्टम का एक बेहद अहम और प्राकृतिक हिस्सा है.

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कब रंग बदलता है लाल सागर?

समुद्र के पानी का रंग बदलने की यह पूरी प्रक्रिया अक्सर गर्मियों के मौसम में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है. जब मौसम बहुत ज्यादा गर्म होता है और सूखी हवाएं चलने लगती हैं, तो इस शैवाल के पनपने के लिए एकदम सही और अनुकूल माहौल बन जाता है. इस बेहतरीन मौसम को पाकर समुद्र के भीतर इन शैवालों की आबादी अचानक से बहुत तेजी से बढ़ने लगती है. वैज्ञानिकों की भाषा में इस घटना को 'एल्गल ब्लूम' (शैवाल प्रस्फुटन) कहा जाता है.

लाल सागर के पानी में कैसे घुलता है लाल रंग?

जब इन शैवालों की संख्या अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाती है और उसके बाद ये बड़ी तादाद में मरने लगते हैं, तब असली जादू शुरू होता है. मरने के बाद ये सूक्ष्म जीव समुद्र की ऊपरी सतह पर तैरने लगते हैं. इसी दौरान इनके शरीर से लाल और भूरे रंग का एक खास तरह का पिगमेंट पानी में रिसने लगता है. यही वो पिगमेंट है जो समुद्र के नीले-हरे पानी को पूरी तरह से लाल और भूरे रंग में तब्दील कर देता है और पानी लाल दिखने लगता है.

पहाड़ियों की लाल रंगत भी है एक वजह

विज्ञान के अलावा इसके नामकरण के पीछे कुछ भौगोलिक कारण भी माने जाते हैं. लाल सागर के किनारे पर कई ऐसी पुरानी पहाड़ियां और चट्टानें मौजूद हैं, जिनका प्राकृतिक रंग काफी गहरा लाल है. कई पुराने जानकारों और स्थानीय लोगों का यह मानना है कि जब सूरज की रोशनी इन लाल चट्टानों पर पड़ती है, तो इनका अक्स या परछाई सीधे समुद्र के पानी पर नजर आती है. इस लाल परछाई के कारण भी इसे पुराने समय से लाल सागर कहा जाने लगा.

दक्षिण दिशा से जुड़ा है लाल रंग का नाता

इस समुद्र के नाम के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सिद्धांत भी जुड़ा हुआ है. पुराने समय में एशियाई परंपराओं और कुछ प्राचीन भाषाओं में दिशाओं को बताने के लिए रंगों का इस्तेमाल किया जाता था. इस व्यवस्था में 'लाल' रंग का मतलब हमेशा दक्षिण दिशा होता था. चूंकि भौगोलिक रूप से यह सागर दक्षिण दिशा की तरफ मौजूद है, इसलिए प्राचीन लोगों ने इसे दक्षिण का सागर कहने के बजाय लाल सागर कहना शुरू कर दिया.

हजारों मछलियों और शार्क का सुरक्षित घर

अपने रहस्यमयी नाम के अलावा लाल सागर अपनी अद्भुत समुद्री दुनिया के लिए भी काफी मशहूर है. इस सागर में जीवों की इतनी विविधता है जो दुनिया में बहुत कम जगह देखने को मिलती है. यहां मछलियों की एक हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से कई तो ऐसी हैं जो दुनिया के किसी और समुद्र में नहीं मिलतीं. इसके अलावा यहां शार्क की भी कई किस्में रहती हैं और यहां की प्रवाल भित्तियां (कोरल रीफ) हजारों साल पुरानी और बेहद लंबी हैं.

दुनिया के व्यापार की सबसे अहम कड़ी है लाल सागर

सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती ही नहीं, बल्कि लाल सागर का व्यापारिक महत्व भी दुनिया में सबसे ज्यादा है. यह सागर मशहूर स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया महाद्वीप को आपस में जोड़ता है. इसी छोटे से रास्ते से होकर दुनिया भर के बड़े-बड़े मालवाहक जहाज अपना सफर तय करते हैं. यही वजह है कि जब भी लाल सागर में कोई हलचल या तनाव होता है, तो उसका सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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