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RSS Registration: RSS के रजिस्ट्रेशन पर क्यों उठा सवाल, जानें किसी संगठन को पंजीकृत कराने का क्या है प्रोसेस?

RSS Registration: हाल ही में आरएसएस के रजिस्ट्रेशन को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत में किसी संगठन को कैसे रजिस्टर किया जाता है.

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  • कांग्रेस नेता ने आरएसएस के पंजीकरण की स्थिति पर सवाल उठाया।
  • आरएसएस खुद को गैर-पंजीकृत सामाजिक संगठन बताता है।
  • भारत में पंजीकरण के लिए तीन कानूनी ढांचे मौजूद हैं।

RSS Registration: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रजिस्ट्रेशन का स्टेटस एक बार फिर से राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है. दरअसल कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने हाल ही में यह सवाल उठाया है कि देश का सबसे बड़ा सामाजिक सांस्कृतिक संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के कैसे काम कर रहा है. उन्होंने पारदर्शिता, फंडिंग और ऑडिट को लेकर चिंता जताई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत में किसी संगठन को पंजीकृत करने की क्या प्रक्रिया है. 

क्या है आरएसएस का रुख? 

आरएसएस खुद को एक रजिस्टर्ड गैर सरकारी संगठन के बजाय एक सामाजिक सांस्कृतिक संगठन और बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स मानता है. आरएसएस के मुताबिक संगठन लोगों के एक स्वैच्छिक समूह के रूप में काम करता है और ऐसा कोई सरकारी ग्रांट या फिर लाभ नहीं लेता जिसके लिए औपचारिक रजिस्ट्रेशन की जरूरत हो. आरएसएस का यह तर्क है कि भारतीय कानून किसी भी नागरिक या फिर सामाजिक समूह को कानूनी इकाई के रूप में रजिस्टर करने के लिए मजबूर नहीं करता है.  यह संगठन मुख्य रूप से स्वैच्छिक योगदान से चलता है जिसे गुरु दक्षिणा कहा जाता है.

भारत में किसी संगठन का रजिस्ट्रेशन कैसे कराया जा सकता है?

भारत में रजिस्ट्रेशन चाहने वाले संगठनों के लिए तीन कानूनी ढांचे मौजूद हैं. अब किस कानूनी ढांचे के तहत रजिस्ट्रेशन करना है यह इस बात पर निर्भर करता है कि संगठन का उद्देश्य क्या है, काम का दायरा कितना बड़ा है और काम-काज चलाने की जरूरतें क्या हैं. 

सोसाइटी के तौर पर रजिस्ट्रेशन 

शिक्षा, खेल, कला, संस्कृति और समाज कल्याण के कामों में लगे संगठनों के लिए सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्ट्रेशन करना पहला विकल्प है. सोसाइटी बनाने के लिए कम से कम सात सदस्यों की जरूरत होती है. आवेदन करने के लिए मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन, नियम कानून और सभी सदस्यों की पहचान और पते के सबूत जमा करने होते हैं. रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज द्वारा जांच पड़ताल के बाद रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है.

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ट्रस्ट के तौर पर रजिस्ट्रेशन 

चैरिटी, धर्म और समाज सेवा से जुड़े संगठन अक्सर ट्रस्ट मॉडल को चुनते हैं. इसके लिए कम से कम दो लोगों की जरूरत होती है. एक सेटलर और एक ट्रस्टी. सेटलर ट्रस्ट बनाने वाले को कहा जाता है. नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर ट्रस्ट डीड तैयार करनी होती है और स्थानीय सब रजिस्ट्रार के पास रजिस्टर करानी होती है. इसी के साथ रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के दौरान ट्रस्टी और गवाहों का मौजूद रहना जरूरी है. ट्रस्ट का इस्तेमाल आमतौर पर चैरिटी की संपत्ति, शिक्षण संस्थान और धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन के लिए किया जाता है.

सेक्शन 8 कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन 

जो संगठन ज्यादा व्यवस्थित और कॉर्पोरेट स्टाइल वाला नॉन प्रॉफिट ढांचा चाहते हैं वे अक्सर कंपनीज एक्ट 2013 के सेक्शन 8 के तहत रजिस्ट्रेशन कराते हैं. इसके लिए कम से कम दो डायरेक्टर की जरूरत होती है. आवेदन करने वालों को डिजिटल सिगनेचर सर्टिफिकेट और डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन नंबर लेना होता है और मेमोरेंडम के साथ-साथ आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन तैयार करने होते हैं. रजिस्ट्रेशन का काम मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के पोर्टल पर SPICe+ सिस्टम का इस्तेमाल करके ऑनलाइन पूरा किया जाता है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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