Aurangzeb: औरंगजेब टोपियां बेचकर कितनी कमाई करता था, कितने में बिकती थी उसकी बुनी एक टोपी?
Aurangzeb: औरंगजेब अपने खाली समय में टोपियां सिलते थे. आइए जानते हैं कि टोपियों को सिल कर उन्होंने कितने रुपये जमा कर लिए थे.

- औरंगजेब निजी खर्चों हेतु नमाज की टोपियां स्वयं सिलते थे।
- उनकी सिली टोपियां अमीर खरीदते, कुल चार रुपये दो आने बचाए।
- वसीयत में अपनी कमाई कफन हेतु उपयोग करने को उन्होंने कहा।
Aurangzeb: मुगल बादशाह औरंगजेब को अक्सर उनके लंबे शासन काल और सैन्य अभियानों के लिए याद किया जाता है. लेकिन कई ऐतिहासिक वृतांतों के मुताबिक औरंगजेब ने अपने निजी खर्चों के लिए शाही खजाने से पैसा इस्तेमाल न करने का फैसला किया था. इसके बजाय वे नमाज की टोपियों को सिलकर अपनी कमाई करते थे. इस कमाई से वह अपनी रोजमर्रा की जरूरत को पूरा करते थे और यहां तक कि अपने दफन के खर्च का भी इंतजाम करते थे.
औरंगजेब टोपिया क्यों सिलते थे?
ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक औरंगजेब का यह मानना था कि निजी खर्च राज्य के खजाने से नहीं उठाया जाना चाहिए. हालांकि वे अपने समय के सबसे अमीर साम्राज्यों में से एक प्रशासन करते थे लेकिन इसके बावजूद भी वह अपनी मेहनत से पैसा कमाना पसंद करते थे. अपना गुजारा करने के लिए वे अपने खाली समय का कुछ हिस्सा नमाज की टोपियां बुनने में बिताते थे. इन कामों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल उनकी निजी जरूरत के लिए किया जाता था.
एक टोपी की कितनी कीमत होती थी?
इतिहासकारों के मुताबिक औरंगजेब द्वारा सिली गई नमाज की टोपी लगभग 9 से 10 आने में बिकती थी. कुछ ऐतिहासिक दस्तावेज इसकी कीमत लगभग ₹4 से ₹5 भी बताते हैं. यह टोपियां आमतौर पर अमिर, दरबारी और मुगल दरबार के दूसरे सदस्य खरीदते थे.
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उन्होंने कितना पैसा कमाया?
लगभग 5 दशकों तक मुगल साम्राज्य पर राज करने के बावजूद टोपियों से लेकर औरंगजेब की निजी बचत काफी कम थी. ऐसा कहा जाता है कि जीवन के अंत तक टोपियों की बिक्री से उन्होंने सिर्फ 4 रुपये और दो आने जमा किए थे.
इन पैसों का क्या किया गया?
औरंगजेब की सादगी के बारे में सबसे ज्यादा बताए जाने वाले उदाहरण में से एक उनकी आखिरी वसीयत से आता है. इतिहासकारों के मुताबिक उन्होंने यह निर्देश दिया था की टोपियां सिल कर कमाए गए चार रुपये और दो आने आया बेग के पास रखे गए थे, उन्हें इकट्ठा किया जाए और उनके दफन के कफन को खरीदने के लिए इस्तेमाल किया जाए.
उनकी वसीयत के शब्दों से एक सादे अंतिम संस्कार की उनकी इच्छा का पता चलता है. इसमें उन्होंने कहा कि उनकी अपनी मेहनत से कमाए गए पैसे को उनके दफन के कफन पर खर्च किया जाए.
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