अलास्का की तेल पाइपलाइन बर्फ में जमती क्यों नहीं, जानें क्या है साइंस?
Trans Alaska Pipeline: अलास्का में तेल की काफी बड़ी पाइपलाइन है. लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी ज्यादा बर्फ होने के बावजूद भी वहां तेल क्यों नहीं जमता. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

- अत्यधिक ठंड में प्रवाह रुकने पर तेल जमने का खतरा रहता है।
Trans Alaska Pipeline: ट्रांस-अलास्का पाइपलाइन प्रणाली कच्चे तेल को पृथ्वी के सबसे ठंडे क्षेत्रों में से एक में ले जाती है. यहां तापमान काफी कम स्तर पर गिर जाता है. काफी मुश्किल आर्कटिक जलवायु के बावजूद लगभग 800 मील लंबी पाइप लाइन से बहने वाला तेल आमतौर पर जमता नहीं है. यह जादू की वजह से नहीं बल्कि प्राकृतिक गर्मी, थर्मल इन्सुलेशन, निरंतर रफ्तार और एडवांस्ड इंजीनियरिंग के संयोजन की वजह से है.
कच्चे तेल की प्राकृतिक गर्मी
तेल के ना जमने की एक मुख्य वजह उसे निकालते समय उसका तापमान है. प्रूडो खाड़ी, अलास्का में गहरे भूमिगत कुओं से कच्चा तेल लगभग 145°F (63°C) पर निकलता है. यह प्राकृतिक गर्मी तेल को पाइपलाइन के जरिए से अपनी यात्रा शुरू करने से पहले एक जरूरी तापमान का फायदा देती है. हालांकि आसपास की हवा काफी ठंडी हो सकती है, पाइपलाइन के सुरक्षात्मक डिजाइन की वजह से तेल तुरंत अपनी सारे गर्मी नहीं खोता है.

खास थर्मल इन्सुलेशन
लगभग 420 मील पाइपलाइन जमीन से ऊपर स्थित है. यह खंड लगभग 4 इंच फाइबरग्लास इन्सुलेशन और एल्युमीनियम की बाहरी सुरक्षात्मक परत से ढका हुआ है. इन्सुलेशन थर्मस फ्लास्क की तरह ही काम करता है. यह तेल से ठंडे बाहरी वातावरण में गर्मी के स्थानांतरण को धीमा कर देता है. गर्मी के नुकसान को कम करके, इन्सुलेशन पाइपलाइन के जरिए से यात्रा करते समय तेल के तापमान को बनाए रखने में मदद करता है.
सतत तेल प्रभाव और पम्पिंग स्टेशन
कच्चे तेल की लगातार आवाजाही एक दूसरी वजह है. तेल को लगभग 5 से 7 मील प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवाहित रखने के लिए पाइपलाइन के रास्ते पर शक्तिशाली पंपिंग स्टेशन स्थित हैं.
जब कोई तरल पदार्थ बहता रहता है तो उसके जल्दी जमाने की संभावना उस पदार्थ की तुलना में कम होती है जो पूरी तरह से स्थिर रहता है. तेल की रफ्तार और तेल और पाइप की दीवारों के बीच घर्षण से भी गर्मी पैदा होती है. इससे ठंड के खतरे को कम करने में मदद मिलती है. हालांकि प्राथमिक सुरक्षा तेल के प्रारंभिक तापमान, इन्सुलेशन और नियंत्रित प्रवाह से आती है. सिर्फ लगातार रफ्तार इस बात की गारंटी नहीं दे सकती कि तेल अनिश्चित काल तक गर्म रहेगा.

पाइपलाइन को जमीन से ऊपर क्यों रखा जाता है?
अलास्का में पर्माफ्रॉस्ट होता है, मिट्टी की एक परत जो लंबे समय तक या फिर स्थायी रूप से जमी रहती है. अगर गर्म तेल पाइपलाइन को सीधे जमीन पर रखा जाता है तो इसकी गर्मी इसके नीचे के पर्माफ्रॉस्ट को पिघला सकती है.
जमी हुई जमीन के पिघलने से मिट्टी अस्थिर हो सकती है. इससे पाइपलाइन खिसक सकती है, धंस सकती है या फिर टूट सकती है. इसे रोकने के लिए पाइपलाइन के कई खंडों को वर्टिकल सपोर्ट मेंबर्स के नाम से जाने जाने वाले सपोर्ट पर ऊंचा किया गया है.
यह समर्थन थर्मोसाइफोन नाम की एक खास ताप-स्थानांतरण प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं. प्रौद्योगिकी जमीन से बची हुई गर्मी को हटाती है और इसे आसपास की हवा में छोड़ती है. इससे पाइपलाइन के नीचे जमी मिट्टी को बचाने में मदद मिलती है.
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क्या पाइपलाइन कभी भी जम सकती है?
अगर काफी ज्यादा ठंड के दौरान तेल की रफ्तार कई दिनों तक रुक जाए तो यह काफी ज्यादा चिपचिपा हो सकता है और अंत में जम सकता है. तकनीकी खराबी, लंबे समय तक बंद रहने या फिर पंपिंग में रुकावट की वजह से तेल की गर्मी कम हो सकती है और वह मॉम की तरह गाढ़ा हो सकता है.
इस वजह से इंजीनियर लंबे वक्त तक प्रवाह में रुकावट का जोखिम कम करने के लिए निगरानी प्रणाली, पंपिंग नियंत्रण और बैकअप प्रकिया का इस्तेमाल करते हैं. आर्कटिक स्थिति में पाइपलाइन के संचालन की क्षमता इसके इन्सुलेशन, ऊंचे ढांचे, पंपिंग स्टेशन और थर्मल प्रबंधन प्रणाली के संयुक्त प्रदर्शन पर निर्भर करती है.
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