महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर दिवाली से पहले सरकार लेगी फैसला, बुलाएगी संसदीय सत्र
संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हो सकता है. चर्चा है कि क्या सरकार दिवाली से पहले दो से तीन दिनों का सत्र बुलाकर महिला आरक्षण-परिसीमन विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी.

संसद का विशेष सत्र इसी महीने के आखिर में बुलाया जा सकता है. सरकार इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार को भरोसा है कि इन विधेयकों को लोकसभा से पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या है. इसके साथ ही वह विपक्षी दलों से बातचीत कर समर्थन जुटाने की कोशिश भी कर रही है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय हो रहा है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ विरोध तेज कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, सरकार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सहित कुछ छोटे विपक्षी दलों के संपर्क में भी है.
लोकसभा में संख्या को लेकर आश्वस्त सरकार
सूत्रों का कहना है कि सरकार लोकसभा में अपनी संख्या को लेकर आश्वस्त है. इसी भरोसे के साथ वह विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाना चाहती है. हालांकि, विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विपक्षी दलों से बातचीत भी की जा रही है. सरकार फिलहाल विशेष सत्र की तारीखों और उसके कार्यक्रम को अंतिम रूप देने में जुटी है.
मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं, विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला
संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो गया था, लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान अभी नहीं हुआ है. यानी सदन की बैठकें भले ही खत्म हो गई हों, लेकिन सत्र को आधिकारिक रूप से बंद नहीं किया गया है. इसी वजह से सरकार के लिए इसी सत्र के तहत विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, विशेष बैठक बुलाने से पहले करीब एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है. हालांकि, सत्र की तारीख और कार्यक्रम को लेकर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है.
अप्रैल में लोकसभा में गिर गया था विधेयक
सरकार की यह तैयारी ऐसे समय हो रही है, जब कुछ महीने पहले उसे संसद में झटका लगा था. बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया था. विधेयक जरूरी समर्थन हासिल करने में नाकाम रहा था. अब सरकार इसी मुद्दे पर दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है. विशेष सत्र बुलाने का मकसद इन प्रस्तावों को फिर से संसद के सामने लाना और उनके लिए जरूरी समर्थन जुटाना बताया जा रहा है.
डीएमके और छोटे विपक्षी दलों से संपर्क में सरकार
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बार डीएमके से भी बातचीत कर रही है. बताया जा रहा है कि तमिलनाडु चुनाव के बाद डीएमके के कांग्रेस से अलग होने और इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने के बाद यह संपर्क शुरू हुआ है. इसके अलावा सरकार कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है. माना जा रहा है कि मतदान से पहले संख्या मजबूत करना सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है.
26-27 अक्टूबर के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय होगी तारीख
विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाएगा. यह कार्यक्रम 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होना है. ऐसे में सरकार इसी कार्यक्रम के आसपास की तारीखों को ध्यान में रखकर विशेष बैठक का कार्यक्रम तय कर सकती है. दूसरी ओर, विपक्ष एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है. ऐसे राजनीतिक माहौल में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की सरकार की तैयारी पर सभी की नजरें रहेंगी. हालांकि, विशेष सत्र बुलाने और विधेयकों को पेश करने को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
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