भारत में फांसी तो दूसरे देशों में कैसे दी जाती है सजा, कहां सबसे दर्दनाक मौत?
भारत में फांसी का नियम है, तो दुनिया के कई देशों में जहर, गोली और इलेक्ट्रिक चेयर से दी जाती है मौत की सजा, जानिए किस देश का कानून ससबसे क्रूर और दर्दनाक सजा देता है

मेरठ के चर्चित नीले ड्रम वाले मर्डर केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. इस खौफनाक मामले में जब अदालत ने मुख्य आरोपी मुस्कान के साथी साहिल को फांसी की सजा सुनाई, तो एक बार फिर देश में सजा-ए-मौत को लेकर चर्चा तेज हो गई. भारत में जघन्य अपराधों के लिए कानून के तहत अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाने का प्रावधान है.
भारतीय न्याय व्यवस्था में इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर यानी दुर्लभ से दुर्लभ मामलों में ही दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के अलग-अलग देशों में गंभीर अपराधियों को मौत की सजा देने के लिए क्या नियम हैं और वहां कौन से तरीके अपनाए जाते हैं.
विशिष्ट वैज्ञानिक प्रणालियां और इंजेक्शन का नियम
दुनिया के अलग-अलग देशों के संविधान और कानून में मृत्युदंड के लिए बिल्कुल अलग नियम निर्धारित किए गए हैं. जैसे अमेरिका और चीन जैसे देशों में कुछ श्रेणियों के अपराधियों के लिए कानूनी रूप से जानलेवा इंजेक्शन देकर मृत्युदंड देने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया में शरीर में विशिष्ट रसायन डाले जाते हैं, जिससे दिल की धड़कन रुक जाती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विधि के मानवीय पहलुओं को लेकर अक्सर कानूनी और चिकित्सा से जुड़ी बहस चलती रहती है, क्योंकि कई बार इसके असफल होने पर अपराधी को बहुत तड़पना पड़ता है.
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फायरिंग स्क्वाड और पारंपरिक कानूनी व्यवस्था
इंजेक्शन के अलावा दुनिया के कुछ देशों जैसे इंडोनेशिया और उत्तर कोरिया में कानूनी प्रावधानों के तहत फायरिंग स्क्वाड का उपयोग किया जाता है. इस प्रक्रिया में आधिकारिक सुरक्षा बल शामिल होते हैं और निर्धारित नियमों के अनुसार सजा को अंजाम दिया जाता है. वहीं अगर सऊदी अरब और कुछ खाड़ी देशों की बात करें, तो वहां पारंपरिक कानूनी व्यवस्था के तहत सार्वजनिक या निर्धारित स्थानों पर सिर धड़ से अलग करके सजा-ए-मौत देने का प्रावधान रहा है. वहां की न्यायिक प्रणाली के अनुसार इसे कानून सम्मत माना जाता है, हालांकि दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन इस तरीके के स्वरूप पर आपत्ति जताते रहे हैं.
ऐतिहासिक तरीके और न्यायिक संशोधन
इसके अतिरिक्त, अमेरिका के कुछ राज्यों में ऐतिहासिक और वैकल्पिक रूप से इलेक्ट्रिक चेयर का उपयोग किया जाता है. इन तरीकों में तकनीकों के तहत विशिष्ट प्रणालियों द्वारा अपराधियों को मृत्युदंड दिया जाता है. इन तरीकों में तकनीकी और संवैधानिक स्तर पर कई संशोधन किए गए हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन्हें बेहद कठोर माना जाता है. कई प्रणालियों में ऐतिहासिक रूप से पत्थरों से मारकर जान लेने जैसे नियम भी मौजूद रहे हैं, जिन्हें आधुनिक मानवाधिकार मानकों के तहत अत्यधिक अमानवीय माना जाता है.
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