प्रशांत भूषण, नेहा बोरा...रिजीम चेंज वाले बयान राजनाथ सिंह का पलटवार, क्या है पूरा विवाद?
विपक्ष के रिजीम चेंज वाले बयान पर बवाल मच गया है. बीजेपी नेताओं ने कहा कि देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश हो रही है. ये लोग बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन चाहते हैं

वकील और समाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के रिजीम चेंज और आइसा नेता नेहा बोरा के बयान पर सियासी बवाल मच गया है. बीजेपी कांग्रेस को निशाने पर ले रही है और देश में आग लगाने की साजिश रचने का आरोप लगा रही है.
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह ने कहा, 'रिजीम चेंज जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है. इससे स्पष्ट हो जाता है कि ये उनकी लड़ाई चुनाव सुधार के लिए नहीं है, उनकी लड़ाई एसआईआर के लिए नहीं है उनकी लड़ाई ज्ञानेश कुमार के लिए नहीं है बल्कि देश में अराजकता पैदा करके सत्ता हासिल करने की उनकी यह साजिश है.'
किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "लड़ाई की लकीर खींच चुकी है. यह 'दिमागी नक्सलियों' बनाम 'देशभक्त भारतीयों' की लड़ाई है. यह भारत के संविधान में विश्वास रखने वालों बनाम अराजकतावादियों के बीच की लड़ाई है." कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पीएम मोदी के पुराने वीडियो शेयर करते हुए विपक्ष को निशाने पर लिया.
बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के बयान पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रशांत भूषण ने यह कहकर कि यह लड़ाई सत्ता परिवर्तन के लिए है, विपक्ष की मंशा स्पष्ट कर दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश की जा रही है.
अराजकता फैलाने वालों, कान खोलकर सुन लो… 140 करोड़ भारतीय तुम्हारे नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होने देंगे! https://t.co/4xL9FAcYTZ
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) October 15, 2026
उन्होंने कहा कि देश के नौजवानों को अराजकता की राजनीति का मोहरा बनाने की कोशिश की जा रही है. ये लोग बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन कराना चाहते हैं और प्रेस कांफ्रेंस में खुलकर कहते हैं कि उसने शासन बदलने के लिए बांग्लादेश से प्रेरणा ली है और दूसरा डंके की चोट पर सरकार को गिराने की बात करता है.
प्रशांत भूषण का बयान
सीजेपी नेता अभिजीत दीपके और AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को दिल्ली में जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें शामिल हुए एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा, "सरकार की बर्बरता जारी रही, तो सरकार बदलनी होगी. लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई सिविल सोसायटी और युवाओं के नेतृत्व में लड़ी जाएगी." उन्होंने आगे कहा, "हां, हम रिजीम बदलना चाहते हैं."
The battle line has been drawn. It is Dimagi Naxals Vs Patriotic Indians. Between those who believe in the Constitution of India Vs Anarchists. अब लड़ाई भारत-विरोधी ताकतों और उन देशभक्त भारतीयों के बीच है जो भारत की रक्षा करना चाहते हैं। https://t.co/UZQzpDEmDW
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) October 15, 2026
नेहा बोरा ने क्या कहा
AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट (SSF) के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर 14 अक्टूबर को एक संदेश में कहा कि बांग्लादेश ने उन्हें क्रांति का रास्ता दिखाया है. नेहा बोरा ने कहा, "हम आपको रास्ता दिखाने के लिए बधाई देते हैं. हम जानते हैं कि आपके देश में धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ जो लड़ाई आप लड़ रहे हैं, वही लड़ाई आज यहां के युवा भी लड़ रहे हैं." नेहा बोरा ने कहा कि बांग्लादेश में युवा धार्मिक कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ रहे थे, जबकि भारत में छात्र मोदी सरकार के खिलाफ इसी तरह की लड़ाई लड़ रहे हैं.
‘Regime Change’ और ‘संसद नहीं, सड़क से रास्ता निकलेगा’ जैसे नारों से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता। राजनीतिक विरोध के नाम पर हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देना देशहित के खिलाफ है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि सत्ता का रास्ता जनमत से होकर जाता है, सड़कों पर अव्यवस्था फैलाने से नहीं। https://t.co/3YkYpjLzeF
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 16, 2026
क्या बोले पवन खेड़ा
राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "ये राजनाथ सिंह जी जग्गा जासूस बनकर क्यों आ गए? शरलॉक होम्स। 'रिजीम चेंज हो रहा है. अरे, तो हम तो कह रहे हैं रिजीम चेंज करेंगे साहब." उन्होंने आगे कहा कि 77 में क्या हुआ था? रिजीम नहीं बदला था? हर बार जब कोई विपक्ष सड़क पर आता है, कोई आंदोलन होता है हमें चुनाव के जरिए रिजीम बदलना है. खेड़ा ने कहा कि ये तो मकसद होता है विपक्ष का, और क्या मकसद होता है? उन्होंने आगे कहा, "मोदी जी की रक्षा में आप आ गए, हमें एक बात आज समझ में आई, ये इतना गुस्सा अल्बर्ट पिंटो को क्यों आता है? इन्हें लोकतंत्र की आदत ही खत्म हो गई."
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