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क्या वाकई ब्रह्मोस को कोई भी डिफेंस सिस्टम नहीं कर सकता है इंटरसेप्ट? कांपते हैं बड़े-बड़े देश

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है. इसकी रफ्तार किसी भी रडार को मात दे सकती है और यही कारण है कि दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस इसे इंटरसेप्ट नहीं कर सकता.

Brahmos Missile: भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले दिनों हुई तनातनी में S-400 के बाद सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मोस मिसाइलों की रही. ब्रह्मोस मिसाइल भारत का वह हथियार है, जिसने पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचाया और शायद ही पाकिस्तान भारत की इन मिसाइलों की मार को कभी भूल पाएगा. ऑपरेशन सिंदूर से शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष में भारत ने पाकिस्तान पर 15 ब्रह्मोस मिसाइलों से हमले किए, जिन्होंने पाकिस्तान के 11 एयरबेस तबाह कर दिए. इनमें राफिकी, मुरीद, नूर खान और चुनिया जैसे एयरबेस शामिल हैं. 

खास बात यह रही कि पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम ब्रह्मोस मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में पूरी तरह नाकाम रहा, जिस कारण उसके सैन्य ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा. इन मिसाइलों के सफल और सटीक इस्तेमाल से भारत ने दुनिया को भी अपनी ताकत का अहसास करा दिया है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ब्रह्मोस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना क्यों नामुमकिन है और बड़े-बड़े देश इससे क्यों कांपते हैं? 

जमीन, हवा और पानी...हर जगह से कर सकती है मार

भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल को रूस के साथ मिलकर बनाया है. यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो दुनिया की सबसे तेज मिसाइलों में से एक है. ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत है कि हवा, पानी और जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है. इसके अलावा इस मिसाइल का निशाना भी अचूक है. ब्रह्मोस का निशाना इतना सटीक है कि 290 किलोमीटर की दूरी पर भी अपने लक्ष्य से एक मीटर के घेरे के अंदर गिरकर तबाही मचाती है. ब्रह्मोस मिसाइल 10 मीटर से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरने मे भी सक्षम है. 

रफ्तार देती है रडार को मात

दावा किया जाता है कि ब्रह्मोस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना दुनिया के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए नामुमकिन है. इसकी वजह ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार है. ब्रह्मोस मिसाइल मैक 3 की रफ्तार से हमला करती है, यानी यह ध्वनि की गति से तीन गुना तेजी से उड़ान भरने में सक्षम है. यह मिसाइल उड़ान भरने से लक्ष्य तक पहुंचने तक सुपरसोनिक गति से उड़ती है, जो इसे अन्य मिसाइलों से अलग बनाती है. इसके अलावा इसका सेंसर इतना खतरनाक है कि यह एक समान दिखने वाले कई लक्ष्यों में से भी असली टारगेट की पहचान कर उसे तबाह कर सकती है. 

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान की हवा में उड़ा बोरोन से भरा मिस्र का विमान? जानें कब और क्यों होता है इसका इस्तेमाल

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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