Israel Attack On Iran: ईरान या इजरायल किसकी करेंसी है ताकतवर, जानें डॉलर के मुकाबले कितनी वैल्यू
Israel Attack On Iran: इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया है. इसी बीच जानते हैं कि दोनों देशों की करेंसी में कौन ज्यादा ताकतवर है और यूएस डॉलर के मुकाबले इनकी कितनी वैल्यू है.

Israel Attack On Iran: इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया है और इसके बाद इलाके में तनाव बढ़ चुका है. इसके बाद इजरायल के रक्षा मंत्री ने पूरे देश में विशेष और स्थायी आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी है. इस तनाव के बीच दुनिया का ध्यान ना सिर्फ दोनों देशों की मिलिट्री ताकत पर है बल्कि उनकी इकोनॉमिक स्टेबिलिटी पर भी है. आइए जानते हैं कि इजरायल की करेंसी इजरायली न्यू शेकेल ज्यादा मजबूत है या फिर ईरान की करेंसी रियाल.
इजरायली न्यू शेकेल और ईरानी रियाल में कौन मजबूत?
लेटेस्ट एक्सचेंज रेट के मुताबिक 1 यूएस डॉलर लगभग 3.14 इजरायली न्यू शेकेल के बराबर है. इसी के साथ 1 यूएस डॉलर ओपन मार्केट में लगभग 16,64,000 ईरानी रियाल के बराबर है. इतना बड़ा अंतर ईरान की तुलना में इजरायल की करेंसी की मजबूती को साफ दिखाता है.
कैसे है इजरायल की करेंसी मजबूत?
दरअसल इजरायली शेकेल की मजबूती के पीछे सबसे बड़ी वजह इजरायल का शक्तिशाली टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी सेक्टर है. इजरायल को दुनिया के लीडिंग टेक्नोलॉजी हब में से एक माना जाता है. यहां टेक एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट के जरिए अरबों डॉलर देश में आते हैं. इजरायल की टेक कंपनियों में बड़े ग्लोबल एक्विजिशन और इन्वेस्टमेंट ने फॉरेन करंसी इनफ्लो को बढ़ाया है. इस वजह से शेकेल और ज्यादा मजबूत हुआ है.
इजरायल का बड़ा फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व
इजरायल के पास लगभग 212.93 बिलियन डॉलर का मजबूत फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व है. यह रिजर्व ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता के दौरान करेंसी को स्थिर रखने और अचानक आने वाले फाइनेंशियल झटकों से बचाने में मदद करता है. इसकी तुलना में ईरान कर रिजर्व लगभग 127 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है. लेकिन इंटरनेशनल प्रतिबंधों की वजह से इसका एक बड़ा हिस्सा सीमित है.
क्यों है ईरान की करेंसी इतनी कमजोर?
ईरान की इकॉनमी पर कड़े इंटरनेशनल सैंक्शन का काफी बुरा असर पड़ा है. इसका सबसे ज्यादा असर तेल एक्सपोर्ट और बैंकिंग एक्सेस पर पड़ा है. इन सैंक्शन ने विदेशी इन्वेस्टमेंट को कम कर दिया है और ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम तक ईरान की पहुंच को लिमिटेड कर दिया है. इतना ही नहीं बल्कि ईरान काफी ज्यादा महंगाई का भी सामना कर रहा है. यह लगभग 48% से ज्यादा है. यही वजह है कि ईरान की करेंसी की वैल्यू तेजी से कम हो रही है.
कैसे हुआ रियाल इतना कमजोर
ईरान को बड़े पैमाने पर कैपिटल आउटफ्लो का सामना करना पड़ा है. इकॉनामिक अनिश्चितता की वजह से अरबों डॉलर देश से बाहर जा रहे हैं. इन्वेस्टर और बिजनेस अपना पैसा विदेश ले जाना पसंद करते हैं. इस वजह से ईरानी रियाल और कमजोर हो रहा है.
इसी के साथ ईरान डुअल एक्सचेंज रेट पर काम करता है. एक होता है ऑफिशियल रेट और एक होता है मार्केट रेट. इस वजह से इकॉनमिक इंबैलेंस होता है और करेंसी में भरोसा भी कम होता है.
इजरायल की स्टेबल इकॉनमी
इजरायल का कंट्रोल्ड महंगाई रेट, स्टेबल फाइनेंशियल सिस्टम और मजबूत एक्सपोर्ट ड्रिवन इकॉनमी इसकी करेंसी में ज्यादा भरोसा बनाए रखने में मदद करती है. टेक्नोलॉजी, डिफेंस और इनोवेशन सेक्टर में लगातार ग्रोथ की वजह से इजरायली शेकेल मिडिल ईस्ट की सबसे मजबूत करेंसी में से एक बनी हुई है.
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Source: IOCL


























