Guerrilla Warfare: क्या होता है गोरिल्ला वॉर और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत, जिसके माहिर हैं तालिबानी लड़ाके
Guerrilla Warfare: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि गोरिल्ला वॉर क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी.

Guerrilla Warfare: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालात तनावपूर्ण और जंग के करीब बने हुए हैं. दोनों तरफ से हमले जारी हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसा दावा किया है लगभग 300 अफगानिस्तान लड़ाके और उनके साथी मिलिटेंट मारे गए हैं. इस तनाव के बीच तालिबान लड़ाकों की स्ट्रैटेजी गोरिल्ला वॉर एक बार फिर से चर्चा का विषय बन चुकी है. आइए जानते हैं कि गोरिल्ला वॉर की शुरुआत कैसे हुई थी और तालिबान लड़ाके इसमें इतने माहिर कैसे हैं.
क्या है गोरिल्ला वॉर की स्ट्रेटजी?
गोरिल्ला वॉर कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है. यह ताकतवर दुश्मनों के खिलाफ छोटी सेनाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सबसे पुरानी और सबसे असरदार मिलिट्री स्ट्रेटजी में से एक है. गोरिल्ला वाॅरफेयर एक स्ट्रेटजी है जिसका इस्तेमाल छोटी सेना मजबूत सेना के खिलाफ करती हैं. गोरिल्ला वाॅरफेयर एक तरह का एसिमेट्रिक वाॅरफेयर है. इसमें छोटे मोबाइल ग्रुप, बड़ी और बेहतर इक्विपमेंट वाली रेगुलर सेनाओं के खिलाफ लड़ते हैं. सीधी लड़ाई में शामिल होने के बजाय गोरिल्ला लड़ाके सरप्राइज अटैक, घात लगाकर हमला, तोड़फोड़ और हिट एंड रन टैक्टिक्स पर भरोसा करते हैं. इसका मकसद हमेशा दुश्मन को तुरंत हराना नहीं होता. बल्कि सप्लाई लाइनों को नुकसान पहुंचाकर, हौसला कम करके और उनके रिसोर्स को खत्म करके समय के साथ उन्हें कमजोर करना होता है.
कहां काम करती है यह स्ट्रेटजी?
गोरिल्ला युद्ध स्ट्रेटजी पहाड़ों, जंगलों और दूर दराज के ग्रामीण इलाकों जैसे ऊबड़-खाबड़ इलाकों में सबसे ज्यादा असरदार होती है. लोकल लड़ाकों को इलाके की गहरी जानकारी होती है. इसकी मदद से वह तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, आसानी से छुप सकते हैं और अचानक हमले कर सकते हैं.
अफगानिस्तान का पहाड़ी इलाका खासकर हिंदू कुश इलाका गोरिल्ला युद्ध के लिए काफी सही हालात बनाता है. यहां पर मॉडर्न टैंक और भारी मिलट्री इक्विपमेंट के लिए असरदार तरीके से काम करना मुश्किल हो जाता है.
कैसे हुई गोरिल्ला युद्ध की शुरुआत?
गोरिल्ला युद्ध की शुरुआत काफी पुरानी है और इसकी जड़े पूरी दुनिया में फैली हुई हैं. गोरिल्ला वॉर का कॉन्सेप्ट हजारों साल पुराना है. पुराने चीनी मिलिट्री स्ट्रेटजिस्ट सन त्जू ने 6वीं सदी BC में अपनी मशहूर किताब 'द आर्ट ऑफ वॉर' में ऐसी ही टैक्टिक्स के बारे में बताया था. गोरिल्ला शब्द खुद स्पेनिश शब्द 'गुएरा' से आया है. इसका मतलब है युद्ध. यह 19वीं सदी की शुरुआत में तब मशहूर हुआ जब 1808 और 1814 के बीच स्पेन के लड़ाकों ने नेपोलियन की सेना का विरोध करने के लिए अजीब तरीके अपनाए.
गोरिल्ला युद्ध का भारतीय इतिहास
भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज को गोरिल्ला युद्ध का मास्टर माना जाता है. उन्होंने काफी बड़ी मुगल सेना को हराने के लिए 'गनीमी कावा' नाम की एक स्ट्रेटजी का इस्तेमाल किया था. उनकी स्ट्रेटजी में अचानक हमले, तेजी से मूवमेंट और लोकल इलाके की गहरी जानकारी शामिल थी.
तालिबान लड़ाकों ने कब सीखा गोरिल्ला युद्ध?
तालिबान लड़ाकों को गोरिल्ला स्ट्रेटजी अफगान मुजाहिदीन से विरासत में मिली. इन्होंने 1979-1989 के युद्ध के दौरान सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उस लड़ाई के दौरान अफगान लड़ाकों ने सोवियत सेना को हराने के लिए घात लगाकर हमला करने, हिट एंड रन हमलों और पोर्टेबल हथियारों का इस्तेमाल किया. बाद में इन तरीकों को बेहतर बनाया गया और 2001 से 2021 तक अफगानिस्तान युद्ध के दौरान NATO और US सेनाओं के खिलाफ इस्तेमाल किया गया.
गोरिल्ला युद्ध सबसे असरदार मिलिट्री स्ट्रेटजी
गोरिल्ला युद्ध पूरे इतिहास में असरदार साबित हुआ है. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे छोटी सेनाएं बिना सीधे टकराव के ताकतवर सेनाओं को चुनौती दे सकती है. इलाके मोबिलिटी, सरप्राइज और लोकल जानकारी का इस्तेमाल करके गोरिल्ला लड़ाके समय के साथ लड़ाई को लंबा खींच सकते हैं.
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Source: IOCL


























