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Roadside Trees Paint : सड़क किनारे लगे पेड़ों के नीचे क्यों किया जाता है पेंट? जानिए इसके पीछे की वजह

Roadside Trees Paint : यह सफेद पेंट सिर्फ पेड़ों की खूबसूरती के लिए नहीं लगाया जाता है, बल्कि उनकी सुरक्षा, लंबी उम्र और सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है.

Roadside Trees Paint : सड़क पर सफर करते समय आपने अक्सर देखा होगा कि कई पेड़ों के तने का निचला हिस्सा सफेद रंग से रंगा होता है. ज्यादातर लोग इसे सिर्फ सजावट या सुंदरता बढ़ाने का तरीका समझते हैं, लेकिन इसके पीछे कई कारण छिपे हैं. यह सफेद पेंट सिर्फ पेड़ों की खूबसूरती के लिए नहीं लगाया जाता है, बल्कि उनकी सुरक्षा, लंबी उम्र और सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा से भी जुड़ा होता है. यही वजह है कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में सड़क किनारे लगे पेड़ों के तनों पर सफेद रंग किया जाता है. तो आइए जानते हैं कि सड़क किनारे लगे पेड़ों के नीचे पेंट क्यों किया जाता है और इसके पीछे की वजह क्या है.

रसड़क किनारे लगे पेड़ों के नीचे पेंट क्यों किया जाता है?

पेड़ों के तने पर लगाया जाने वाला सफेद रंग आमतौर पर चूने यानी लाइम या विशेष वॉटर-बेस्ड पेंट से तैयार किया जाता है. इसका उद्देश्य पेड़ को मौसम, कीट-पतंगों और अन्य नुकसान से बचाना होता है, इसके अलावा यह सड़क सुरक्षा में भी जरूरी होता है. सफेद रंग सूर्य की किरणों को वापस रिफ्लेक्ट कर देता है. गर्मियों में तेज धूप के कारण पेड़ों का तना जरूरत से ज्यादा गर्म नहीं होता है, जिससे छाल के फटने या जलने का खतरा कम हो जाता है. वहीं रात में तापमान अचानक गिरने पर भी यह तने को सुरक्षित रखने में मदद करता है. ठंडे इलाकों में यह फ्रॉस्ट से भी कुछ हद तक सुरक्षा देता है. 

इसके पीछे की वजह क्या है?

पेड़ों के तनों पर लगाया जाने वाला चूना या विशेष पेंट कीटों, दीमक, फंगस और कुछ बैक्टीरिया से बचाव में मदद करता है. यह पेड़ की छाल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को दूर रखने में सही माना जाता है. साथ ही छाल पर कीटों के अंडे देने की संभावना भी कम हो जाती है. भारत जैसे नमी वाले क्षेत्रों में यह तरीका पेड़ों को स्वस्थ बनाए रखने में अच्छा माना जाता है. 

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भारत में कब और क्यों किया जाता है यह काम?

भारत में सड़क किनारे पेड़ों के तनों को सफेद रंग से रंगने की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है. आज भी वन विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय प्रशासन समय-समय पर यह काम कराते हैं. आमतौर पर जून-जुलाई और दिसंबर-जनवरी के दौरान पेड़ों पर दोबारा सफेदी की जाती है. कई राज्यों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर इसे नियमित रूप से कराया जाता है. 

पेड़ों पर किस तरह का पेंट लगाया जाता है?

पेड़ों के तनों पर सबसे ज्यादा चूने यानी लाइम का इस्तेमाल किया जाता है. यह सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है. कई जगह इसमें तांबे का सल्फेट भी मिलाया जाता है. इसके अलावा लंबे समय तक टिकने वाले वॉटर-बेस्ड एक्रिलिक पेंट का भी यूज किया जाता है. कुछ जगहों पर रात में ज्यादा चमक देने वाले रिफ्लेक्टिव पेंट भी लगाए जाते हैं. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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