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Train Spare Parts: बाजारों में क्यों नहीं मिलते ट्रेन के स्पेयर पार्ट्स, क्या है इसके पीछे की वजह?

Train Spare Parts : हर दिन लाखों-करोड़ों लोग ट्रेनों से सफर करते हैं, इसलिए ट्रेन में लगने वाले हर पार्ट्स की क्वालिटी और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है.

Train Spare Parts : भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में से एक है, जिसमें हर दिन लाखों लोग सफर करते हैं. ट्रेन में सफर करते समय कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि ट्रेन के पहिए, ब्रेक, बोगी और इंजन जैसे जरूरी पार्ट्स आखिर कहां बनते हैं. कार और बाइक के स्पेयर पार्ट्स तो आसानी से बाजार में मिल जाते हैं, लेकिन ट्रेन के पार्ट्स आम दुकानों पर दिखाई नहीं देते हैं.

रेलवे देश की सबसे जरूरी और सुरक्षित परिवहन सेवाओं में से एक है. हर दिन लाखों-करोड़ों लोग ट्रेनों से सफर करते हैं, इसलिए ट्रेन में लगने वाले हर पार्ट्स की क्वालिटी और मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है. यही कारण है कि रेलवे के स्पेयर पार्ट्स का निर्माण और खरीद केवल ऑथोराइज्ड कंपनियां और रेलवे की निगरानी में ही की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बाजारों में ट्रेन के स्पेयर पार्ट्स क्यों नहीं मिलते हैं और इसके पीछे की वजह क्या है?

बाजारों में ट्रेन के स्पेयर पार्ट्स क्यों नहीं मिलते हैं?

रेलवे एक सेंट्रलाइज्ड और उच्च-सुरक्षा वाली प्रणाली है. रेलवे में यूज होने वाले ज्यादातर पार्ट्स बेहद खास तकनीक से बनाए जाते हैं. ये सामान्य वाहनों के पार्ट्स की तरह नहीं होते हैं. ट्रेन के पहिए, ब्रेक सिस्टम, एक्सल, बोगी फ्रेम और कपलर जैसे हिस्सों को बेहद कड़े सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया जाता है. अगर ऐसे पार्ट्स खुले बाजार में उपलब्ध होने लगें तो उनके गलत यूज या नकली प्रोडक्ट्स के बाजार में आने का खतरा बढ़ सकता है.  यही वजह है कि भारतीय रेलवे और उससे जुड़े ऑथोराइज्ड मेनयुफेकचर ही इन पार्ट्स का निर्माण और सप्लाई करते हैं. 

इसके पीछे की वजह क्या है?

रेलवे उद्योग में यूज होने वाले ज्यादातर पार्ट्स विशेष डिजाइन और तकनीक पर आधारित होते हैं. इन्हें बनाने वाली कंपनियां भी सीमित संख्या में होती हैं. रेलवे के लिए पार्ट्स बनाने वाले  मेनयुफेकचर्स कई तरह के क्वालिटी परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. हर पार्ट की मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा की जांच की जाती है. यही कारण है कि रेलवे के स्पेयर पार्ट्स का निर्माण सामान्य ऑटोमोबाइल पार्ट्स की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल माना जाता है. 

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रेलवे उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां

1. सीमित सप्लायरों पर निर्भरता - रेलवे के लिए विशेष पार्ट बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं. ऐसे में अगर किसी कारण से सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो रेलवे को जरूरी मिलने में देरी हो सकती है. 

2. लंबे समय में तैयार होते हैं पार्ट्स - रेलवे के भारी और मजबूत पार्ट्स को तैयार करने में काफी समय लगता है. कई बार एक पार्ट्स बनाने और उसकी क्वालिटी जांच पूरी होने में महीनों लग जाते हैं. इससे रखरखाव और मरम्मत कार्य प्रभावित हो सकते हैं. 

3. पुरानी हो चुकी रेलवे संपत्तियां - भारत सहित दुनिया के कई देशों में रेलवे का बड़ा हिस्सा दशकों पुराना है. कई ट्रेनों और डिवाइसों के लिए आज भी ऐसे पार्ट्स की जरूरत पड़ती है जिनका प्रोडक्शन पहले ही बंद हो चुका है. ऐसे में उनके ऑप्शन तैयार करना चुनौती बन जाता है. 

4. स्टॉक और इन्वेंट्री की समस्या - रेलवे को हमेशा जरूरी पार्ट्स का पूरा स्टॉक रखना पड़ता है. अगर स्टॉक कम हो जाए तो परिचालन प्रभावित हो सकता है और अगर जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखा जाए तो लागत बढ़ जाती है. 

5. लगातार बढ़ता खर्च -  कच्चे माल की कीमत, मजदूरी, बिजली, ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से रेलवे पार्ट्स का निर्माण महंगा होता जा रहा है. ऐसे में क्वालिटी बनाए रखते हुए लागत कंट्रोल करना बड़ी चुनौती है. 

6. कड़े सुरक्षा नियम - रेलवे में यूज होने वाला हर पार्ट्स सख्त सुरक्षा मानकों को पूरा करता है. किसी भी नए पार्ट को यूज में लाने से पहले कई स्तर की जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. 

7. नई तकनीक के साथ तालमेल - आज रेलवे में स्मार्ट सेंसर, डिजिटल कंट्रोल सिस्टम और मॉर्डन तकनीकों का यूज बढ़ रहा है. इसके लिए नए प्रकार के पार्ट्स की जरूरत पड़ती है, जिन्हें डिजाइन और विकसित करना आसान नहीं होता है. 

भारत में कितने रेलवे पार्ट्स देश में ही बनते हैं?

भारतीय रेलवे लगातार स्वदेशीकरण पर जोर दे रहा है. रेलवे के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत सामान और पार्ट्स की खरीद देश के अंदर ही की जाती है. जिसमें केवल उन्हीं तकनीकों या उपकरणों का आयात किया जाता है जो भारत में उपलब्ध नहीं हैं या जिनका घरेलू उत्पादन पूरी मात्रा और क्वालिटी में नहीं हो पाता है. आज रेलवे में यूज होने वाले ज्यादातर पहिए, एक्सल, ब्रेकिंग सिस्टम और अन्य जरूरी पार्ट्स भारत में ही तैयार किए जा रहे हैं. 

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