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अगर हुआ युद्ध, तो भारत में कौन करेगा 'अंतिम प्रलय' का फैसला? किसके पास है परमाणु बम का रिमोट?

Nuclear Weapons Control: ईरान-इजरायल युद्ध के बढ़ते तनाव के बीच क्या आपने कभी सोचा है कि अगर दुनिया परमाणु युद्ध की ओर बढ़ी, तो भारत मे परमाणु हथियार का ट्रिगर किसके हाथ में होगा?

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते युद्ध के बाद दुनिया एक बार फिर परमाणु हथियारों की विनाशकारी चर्चा में डूब गई है. जब दो या तीन परमाणु संपन्न देश आमने-सामने हों, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इन घातक मिसाइलों को चलाने का अधिकार किसके पास है? भारत जैसे जिम्मेदार राष्ट्र में यह प्रक्रिया किसी फिल्मी लाल बटन दबाने जैसी सरल नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और नैतिकता की कई अभेद्य परतों में लिपटी हुई है. भारत ने दुनिया के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन तो किया है, लेकिन साथ ही एक ऐसी मजबूत व्यवस्था भी बनाई है जो यह सुनिश्चित करती है कि इन हथियारों का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के रूप में ही हो.

भारत की नो फर्स्ट यूज नीति

भारत दुनिया के उन गिने-चुने 9 देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु ताकत है, लेकिन हमारी नीति बाकी दुनिया से काफी अलग और शांत है. भारत ने हमेशा नो फर्स्ट यूज यानी पहले हमला नहीं करने की नीति का पालन किया है. इसका सीधा मतलब यह है कि भारत किसी भी स्थिति में किसी दूसरे देश पर पहला परमाणु वार नहीं करेगा. हमारे परमाणु हथियार युद्ध छेड़ने के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन को डराकर रखने और खुद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं. भारत इन हथियारों का इस्तेमाल तभी करेगा जब उस पर या उसकी सेना पर किसी दूसरे देश द्वारा परमाणु हमला किया जाए. यह संयम ही भारत को वैश्विक मंच पर एक परिपक्व परमाणु शक्ति बनाता है.

किसके हाथ में है इसकी कमान?

आम धारणा के विपरीत, भारत में परमाणु हथियारों का रिमोट कंट्रोल किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं होता है. यहां तक कि प्रधानमंत्री भी अकेले अपनी मर्जी से परमाणु मिसाइल दागने का हुक्म नहीं दे सकते हैं. भारत में परमाणु हथियारों के प्रबंधन और उनके इस्तेमाल का अधिकार 'न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी' (NCA) के पास सुरक्षित है. इस संस्था के दो मुख्य हिस्से होते हैं, जो आपस में मिलकर किसी भी हमले की जरूरत और उसके परिणामों का विश्लेषण करते हैं. यह व्यवस्था इतनी जटिल बनाई गई है ताकि आवेश या जल्दबाजी में कोई भी गलत फैसला न लिया जा सके और देश की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय नियमों का भी सम्मान हो.

प्रधानमंत्री का सर्वोच्च आदेश

न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी का सबसे ऊपरी हिस्सा राजनीतिक परिषद कहलाता है. इसकी अध्यक्षता खुद देश के प्रधानमंत्री करते हैं. यह परिषद ही वह एकमात्र संस्था है जो परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम और औपचारिक आदेश जारी कर सकती है. हालांकि, प्रधानमंत्री यह फैसला अपनी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों और सलाहकारों के साथ चर्चा के बाद ही लेते हैं. जब तक राजनीतिक परिषद की ओर से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक सेना का कोई भी अंग इन हथियारों को सक्रिय नहीं कर सकता है. यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है, जहां सेना हमेशा नागरिक नेतृत्व के अधीन रहती है.

कार्यकारी परिषद और एनएसए की भूमिका

एनसीए का दूसरा महत्वपूर्ण अंग कार्यकारी परिषद है. इसकी कमान देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के हाथों में होती है. इस परिषद का मुख्य काम राजनीतिक परिषद को जमीनी हकीकत, दुश्मन की हलचल और तकनीकी पहलुओं की जानकारी देना है. एनएसए की अध्यक्षता वाली यह टीम ही प्रधानमंत्री को यह सलाह देती है कि क्या परमाणु हमला करना अनिवार्य हो गया है. एक बार राजनीतिक परिषद आदेश दे देती है, तो उसे लागू करने और हमले की सटीक रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी इसी कार्यकारी परिषद की होती है. इसमें सेना के शीर्ष कमांडर और वैज्ञानिक भी शामिल होते हैं.

स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड

जब आदेश की प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो उसे जमीन पर उतारने का काम स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) का होता है. यह भारतीय सेना की एक विशेष विंग है, जिसे परमाणु हथियारों के रख-रखाव और उन्हें दागने के लिए प्रशिक्षित किया गया है. एसएफसी सीधे प्रधानमंत्री और एनएसए के निर्देशों के तहत काम करती है. हमले के लिए जरूरी 'लॉन्च कोड्स' का मिलान और मिसाइलों को टारगेट तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी इसी विंग की होती है. भारत की यह त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था दुश्मन के लिए अभेद्य है और यह सुनिश्चित करती है कि हमारी जवाबी कार्रवाई इतनी घातक हो कि हमलावर देश को संभलने का मौका न मिले.

यह भी पढ़ें: आ जाए तेल संकट तो कितने दिन काम चला सकता है भारत, जानें कितना ऑयल कर रखा है रिजर्व?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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