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NTA Exam Security: अब तक एग्जाम सेंटर्स पर कैसे पहुंचाए जाते थे NEET के क्वेश्चन पेपर, Air Force को ही क्यों दी जा रही जिम्मेदारी?

NTA Exam Security: नीट यूजी परीक्षा में हो रही गड़बड़ी को ध्यान में रखते हुए सरकार क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय वायु सेना को सौंपने पर विचार कर रही है. आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह.

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  • नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में सरकार डैमेज कंट्रोल मोड में।
  • पुनः परीक्षा के लिए प्रश्नपत्रों के परिवहन में वायु सेना की मदद ली जाएगी।
  • पारंपरिक नागरिक परिवहन में सुरक्षा कमजोरियों को दूर करने का लक्ष्य।
  • एयर फोर्स की मिलिट्री ग्रेड सुरक्षा से प्रश्नपत्रों की बेहतर हैंडलिंग।

NTA Exam Security: नीट यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर हुए विवादों के बाद केंद्र सरकार अब पूरी तरह से डैमेज कंट्रोल मोड में आ चुकी है. ऐसा कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहा है. इसी बीच नीट यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा के दौरान क्वेश्चन पेपर्स के परिवहन और व्यवस्था के लिए भारतीय वायु सेना को तैनात करने पर चर्चा चल रही है. आइए जानते हैं कि अब तक एग्जाम सेंटर पर क्वेश्चन पेपर कैसे पहुंचाए जाते थे और अब वायु सेना को ही यह जिम्मेदारी क्यों सौंपी जा रही है.

पहले कैसे पहुंचाए जाते थे क्वेश्चन पेपर?

अब तक नीट के क्वेश्चन पेपर्स की ढुलाई और भंडारण एक पारंपरिक लेकिन काफी ज्यादा गोपनीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत होता था. इसका प्रबंधन मुख्य रूप से नागरिक प्रणालियों द्वारा किया जाता था. 

कड़ी सुरक्षा के बीच छपाई 

क्वेश्चन पेपर की छपाई कुछ चुनिंदा गोपनीय प्रिंटिंग प्रेस में की जाती थी. यह कड़ी निगरानी और सीमित पहुंच वाले माहौल में काम करती थी. इन  केंद्रों के अंदर सिर्फ अधिकृत कर्मी को ही जाने की अनुमति होती थी. साथ ही छपे हुए प्रश्न पत्रों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाती थी. 

व्यावसायिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का इस्तेमाल 

छपाई के बाद परीक्षा के  क्वेश्चन पेपर्स वाले सील बंद पैकेटों की आवाजाही व्यावसायिक लॉजिस्टिक्स कंपनी, निजी कूरियर सेवा या फिर सुरक्षित परिवहन वाहनों के जरिए से की जाती थी.  इन्हें देश भर के अलग-अलग राज्यों और परीक्षा शहरों में एक पहले से तय गोपनीय रास्ते के मुताबिक भेजा जाता था.

स्ट्रांग रूम में भंडारण 

अपनी मंजिल तक पहुंचने पर इन क्वेश्चन पेपर्स को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक जैसे भारतीय स्टेट बैंक और दूसरे निर्धारित बैंकिंग संस्थानों के सुरक्षित स्ट्रांग रूम में रखा जाता था. परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले तक यह पैकेट ताले और चाबी की कड़ी सुरक्षा में रहते थे. 

परीक्षा केंद्रों तक वितरण 

परीक्षा की सुबह इन सील बंद पैकेटों को बैंकों के स्ट्रांग रूम से अलग-अलग परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता था. परिवहन का यह अंतिम चरण आमतौर पर स्थानीय पुलिस की सुरक्षा में और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के अधिकारियों के मौजूदगी से संपन्न होता था. 

वायु सेना को शामिल करने पर विचार क्यों?

भारतीय वायु सेना को इस प्रक्रिया में शामिल करने का प्रस्ताव इस वजह से आया है क्योंकि सरकार का यह मानना है कि सेना को शामिल करने से उन कमजोरी को दूर किया जा सकता है जो पारंपरिक नागरिक परिवहन प्रणालियों में मौजूद होती हैं. अधिकारियों को यह आशंका है कि क्वेश्चन पेपर्स के लीक होने की सबसे ज्यादा संभावना परिवहन के दौरान या फिर कोई नागरिक मध्यस्थों द्वारा उनकी हैंडलिंग के समय होती है.  क्वेश्चन पेपर्स की कस्टडी सीधे वायु सेना को सौंप कर सरकारी का लक्ष्य प्रिंटिंग प्रेस से लेकर वितरण के मुख्य केंद्रों तक एक सुरक्षित श्रृंखला स्थापित करना है.

मिलिट्री ग्रेड सुरक्षा 

एयर फोर्स देश के सबसे सख्त सुरक्षा ढांचों में से एक के तहत काम करती है. इसके विमान, कर्मचारी और ऑपरेशनल सिस्टम कई लेयर वाले मिलिट्री निगरानी प्रोटोकॉल के जरिए सुरक्षित रहते हैं. इससे बिना इजाजत पहुंच या फिर छेड़छाड़ करना काफी मुश्किल हो जाता है.

यह भी पढ़ेंः दुनिया के किन देशों में सेना कराती है बड़े एग्जाम, कैसे होती है क्वेश्चन पेपर की सुरक्षा?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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