एक्सप्लोरर

कौन सी भेंड के ऊन से बनती है पश्मीना शॉल, आखिर क्यों होती है इतनी महंगी?

Kashmiri Pashmina Shawl: पश्मीना का राज इसकी दुर्लभ ऊन और महीनों चलने वाली कारीगरी में छिपा है. यही वजह है कि यह शॉल सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि एक विरासत और लग्जरी का प्रतीक मानी जाती है.

कश्मीर की वादियों की खूबसूरती जितनी मशहूर है, उतनी ही रहस्यमयी है वहां की पश्मीना शॉल की कहानी. दुनिया भर में इसे लग्जरी, नजाकत और रॉयल्टी का प्रतीक माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यहां की सबसे ज्यादा मशहूर पश्मीना शॉल इतनी महंगी क्यों होती है? किस वजह से इसे अंगूठी के छल्ले से भी गुजर जाने जितना हल्का कहा जाता है? इस शॉल में ऐसा क्या है जो इसे सदियों से अनमोल बनाए हुए है? आइए जान लेते हैं.

बेहद खास होती है पश्मीना शॉल

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है और वहां की संस्कृति, खान–पान और हस्तकला दुनिया भर में अपनी अलग जगह रखते हैं. इन्हीं में से एक है पश्मीना शॉल, एक ऐसा कपड़ा जो सिर्फ गर्मी देने के लिए नहीं, बल्कि अपनी नजाकत, बारीकी और प्रतिष्ठा के लिए भी जाना जाता है. पश्मीना शॉल की लोकप्रियता आज वैश्विक स्तर तक पहुंच चुकी है, लेकिन इसकी असली खूबसूरती इसकी उत्पत्ति और बनावट में छिपी है.

कौन सी भेंड़ के ऊन से बनती है पश्मीना शॉल?

पश्मीना असल में आम भेड़ की ऊन से तैयार नहीं होती है, इसे तैयार किया जाता है चान्थांगी बकरी के बेहद महीन फाइबर से. यह बकरी हिमालय के ऊंचे और बर्फीले इलाकों, खासतौर पर लद्दाख की ऊंचाइयों में पाई जाती है. 14,000 फीट से ऊपर जहां तापमान -30°C तक पहुंच जाता है, वहां ये बकरियां अपने शरीर पर दो परतों वाली ऊन विकसित करती हैं.

ऊपरी परत मोटी होती है, लेकिन असली पश्मीना वहीं से निकाली जाती है जो अंदर की बेहद मुलायम, महीन और गर्म परत होती है. यही अंदरूनी फाइबर इतना नाजुक होता है कि इसे शॉल में बदलने की प्रक्रिया बेहद सावधानी और बारीकी से की जाती है.

किस तरीके से बनती है बेहद खास शॉल

पश्मीना शॉल की कीमत सिर्फ इसके फाइबर की गुणवत्ता से ही तय नहीं होती, बल्कि इसकी मेहनत और लंबी प्रक्रिया भी इसे खास बनाती है. सबसे पहले बकरी के झड़ चुके महीन बालों को हाथ से कंघी करके अलग किया जाता है. फिर इसे साफ करके महीन धागों में काता जाता है. धागा इतना पतला होता है कि मशीनें इसे संभाल नहीं पातीं, इसलिए इसे हाथों से ही तैयार किया जाता है. इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक, एक असली पश्मीना शॉल को पूरी तरह तैयार करने में 3 से 6 महीने तक का समय लग जाता है. यही कारण है कि इसकी कीमत हजारों से लेकर लाखों तक पहुंच जाती है.

क्या है असली पश्मीना की पहचान

आज मार्केट में मशीन से बने नकली पश्मीना की भरमार है, लेकिन असली पश्मीना की पहचान यही है कि यह पूरी तरह हैंडमेड होता है. बुनकर इसे हाथ करघे पर तैयार करते हैं, जिसमें धागों की एक-एक चाल बेहद नफासत से बनाई जाती है. बारीक काम, महीन फाइबर और परंपरागत तकनीक मिलकर इसे हैंडक्राफ्टेड लग्जरी बनाते हैं. इतनी मेहनत, दुर्लभ फाइबर और पारंपरिक कौशल के चलते ही असली पश्मीना को दुनिया का सबसे डिमांडेड, महंगा और प्रतिष्ठित कपड़ा माना जाता है. 

यह भी पढ़ें: Airplane Lights: रात में हवाई जहाज में क्यों जलती है लाल-पीली-हरी लाइट, जान लें इसकी वजह

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

नवंबर में दिल्ली में ही क्यों बढ़ता है प्रदूषण, किसी और शहर में क्यों नहीं?
नवंबर में दिल्ली में ही क्यों बढ़ता है प्रदूषण, किसी और शहर में क्यों नहीं?
दुनिया की सबसे नशीली शराब कौन सी, उसमें कितने % होता है अल्कोहल?
दुनिया की सबसे नशीली शराब कौन सी, उसमें कितने % होता है अल्कोहल?
क्या है ताजीर, जिसके तहत दोषियों को सजा सुनाता है सऊदी?
क्या है ताजीर, जिसके तहत दोषियों को सजा सुनाता है सऊदी?
भारत में सबसे पहला नोट कब छपा था, जानें कितने की थी यह करेंसी?
भारत में सबसे पहला नोट कब छपा था, जानें कितने की थी यह करेंसी?

वीडियोज

ABP News: किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने वालों की घंटी बजाओ | Ghanti Bajao
CJP Delhi Protest: अराजकता-अव्यवस्था जिम्मेदार कौन? | Gyanesh Kumar | Congress | Gyanesh Kumar
Kolkata Stampede News: कोलकाता में घायलों से अस्पताल मिलने पहुंचे शुभेंदु! | Breaking News | Puja
Janhit | Congress Protest | Gyanesh Kumar: विरोध के नाम पर 'अराजकता'..क्या सही है ? | Neha Bora
रेलवे स्टेशन पर 510 रुपए का 'घमासान' !

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'बहुत दुख हुआ...', PM मोदी ने ग्वालियर हादसे के परिजनों के लिए की मुआवजे की घोषणा
'बहुत दुख हुआ...', PM मोदी ने ग्वालियर हादसे के परिजनों के लिए की मुआवजे की घोषणा
लखनऊ में 'भारत विरोधी दशानन' के पोस्टर, अतीक समेत राहुल-अखिलेश के चेहरे
लखनऊ में 'भारत विरोधी दशानन' के पोस्टर, अतीक समेत राहुल-अखिलेश के चेहरे
'5 साल तक नाना ने पापा से नहीं की बात', माता-पिता की शादी पर सलमान खान का खुलासा
'5 साल तक नाना ने पापा से नहीं की बात', माता-पिता की शादी पर सलमान खान का खुलासा
Asian Para Games 2026 Opening Ceremony: भारत में कब-कहां और कैसे देखें लाइव? सिमरन और प्रमोद होंगे ध्वजवाहक
आज एशियन पैरा गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी, भारत में कब-कहां और कैसे देखें लाइव?
'प्रशासन से अपील है कि...', राहुल गांधी ने कोलकाता हादसे पर जाहिर किया दुख
'प्रशासन से अपील है कि...', राहुल गांधी ने कोलकाता हादसे पर जाहिर किया दुख
कनाडा के सैन्य ठिकाने पर भीषण आग, कई जवानों के मौत की आशंका, जानें पूरा मामला
कनाडा के सैन्य ठिकाने पर भीषण आग, कई जवानों के मौत की आशंका, जानें पूरा मामला
मेट्रो में कागज वाला टिकट देख गदगद हुए बिहारी चाचा, बोले- ई देखा
मेट्रो में कागज वाला टिकट देख गदगद हुए बिहारी चाचा, बोले- ई देखा
एआई से वीजा एप्लिकेशन लिखवाना पड़ा भारी, 64% भारतीयों के वीजा रद्द
एआई से वीजा एप्लिकेशन लिखवाना पड़ा भारी, 64% भारतीयों के वीजा रद्द
Embed widget