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Sweden Import Garbage: दूसरे देशों से कचरा क्यों इंपोर्ट करता है स्वीडन, इसका करता क्या है? आज यहीं PM Modi का दौरा

Sweden Import Garbage: प्रधानमंत्री मोदी 17-18 मई को अपनी दूसरी स्वीडन यात्रा पर गोथेनबर्ग में रहेंगे. आइए जानते हैं कि स्वीडन विदेशों से अपने देश में कचरा क्यों मंगाता है और इसका वो क्या करता है.

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  • ऊर्जा से बिजली उत्पादन, राख से सड़कें बनती हैं.

Sweden Import Garbage: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की यात्रा के तीसरे पड़ाव पर रविवार को स्वीडन की धरती पर कदम रख रहे हैं. तकनीक और इनोवेशन के इस सिरमौर देश में पीएम मोदी का यह दौरा भारत के लिए नए आर्थिक और रणनीतिक दरवाजे खोलेगा, लेकिन इस राजनयिक हलचल के बीच स्वीडन का एक अनोखा सच पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है. यह एक ऐसा देश है जिसके पास अपना कचरा खत्म हो चुका है और वह दूसरे देशों से भारी मात्रा में कूड़ा आयात करता है. आइए जानें कि वो ऐसा क्यों करता है.

कचरा आयात क्यों करता है स्वीडन?

जब पूरी दुनिया कचरे के ढेर और प्रदूषण से जूझ रही है, तब स्वीडन दूसरे देशों से कचरा इंपोर्ट यानी आयात कर रहा है. पहली बार सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन इसके पीछे स्वीडन की बेहद सोची-समझी तकनीक और जरूरत काम कर रही है. दरअसल, स्वीडन अपने देश में बने 'वेस्ट-टू-एनर्जी' यानी कचरे से ऊर्जा बनाने वाले विशालकाय संयंत्रों को लगातार चालू रखना चाहता है. इन प्लांट्स को चलाने के लिए ईंधन के रूप में भारी मात्रा में कचरे की जरूरत पड़ती है.

जब खत्म हो गया स्वीडन का घरेलू कूड़ा

स्वीडन ने अपने देश में अपशिष्ट प्रबंधन यानी कचरे के निपटारे की ऐसी कमाल की व्यवस्था खड़ी की है कि वहां का अपना घरेलू कचरा अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है. स्वीडन की रीसाइक्लिंग क्षमता इतनी लाजवाब है कि वह अपने घरेलू कचरे का तकरीबन 99 फीसदी हिस्सा पुनर्चक्रण के जरिए दोबारा इस्तेमाल में ले आता है. अब देश के रीसाइक्लिंग प्लांट खाली न बैठें और वहां की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे, इसीलिए स्वीडन को बाहर से कचरा मंगाना पड़ता है.

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सर्दियों में घरों को रखने की तकनीक

स्वीडन एक बेहद ठंडा देश है, जहां सर्दियों में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ती है. ऐसे में घरों को गर्म रखना वहां की सबसे बड़ी जरूरत है. स्वीडन आयात किए गए इस कचरे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर जिला तापन यानी डिस्ट्रिक्ट हीटिंग सिस्टम के लिए करता है. कचरे को जलाने से जो भारी गर्मी पैदा होती है, उसे भूमिगत पाइपलाइनों के एक बहुत बड़े नेटवर्क के जरिए लाखों अपार्टमेंट्स और रिहायशी घरों तक सीधे पहुंचाया जाता है, जिससे कड़ाके की ठंड में भी घर पूरी तरह गर्म रहते हैं.

बिजली और ऊर्जा का बंपर उत्पादन

कचरे का उपयोग केवल घरों को गर्म रखने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पादन भी किया जाता है. स्वीडन में जो कचरा दोबारा रीसायकल करने लायक नहीं बचता, उसे बहुत ही ऊंचे तापमान पर विशेष भट्टियों में जलाया जाता है, जिसे इंसिनरेशन प्रक्रिया कहते हैं. इस प्रक्रिया से निकलने वाली प्रचंड ऊर्जा को बिजली में बदल दिया जाता है. यही बिजली आगे चलकर स्वीडन के लाखों घरों और दफ्तरों को रोशन करने के काम आती है.

राख से बन रही हैं देश की सड़कें

स्वीडन की तकनीक कचरे के आखिरी कण का भी इस्तेमाल करना जानती है. फैक्ट्स बताते हैं कि जब बेहद ऊंचे तापमान पर कचरे को पूरी तरह जला दिया जाता है, तो उसके बाद जो बची हुई राख और अन्य बारीक पदार्थ होते हैं, उन्हें भी बेकार नहीं फेंका जाता है. एक्सपर्ट्स इस बची हुई राख को बहुत बारीकी से छांटते हैं. इसके बाद इस मटीरियल का उपयोग सड़कों के निर्माण कार्य में और विभिन्न प्रकार के उद्योगों में कच्चे माल के तौर पर दोबारा कर लिया जाता है.

कचरे से कमाई का डबल मुनाफा

दूसरे देशों से कचरा मंगाना स्वीडन के लिए एक ऐसा बिजनेस मॉडल बन चुका है, जिसमें उसे दोनों तरफ से तगड़ा फायदा होता है. पहला फायदा यह कि वह दूसरे देशों का भारी-भरकम कचरा अपने यहां मंगाकर उन्हें बड़े-बड़े कचरा घरों यानी लैंडफिल की मुसीबत से आजादी दिलाता है. दूसरा और सबसे मजेदार फायदा यह है कि कचरा भेजने वाले देश इस काम के लिए स्वीडन को बकायदा पैसे देते हैं, जिसे तकनीकी भाषा में टिपिंग फीस कहा जाता है. यानी स्वीडन को मुफ्त में ईंधन भी मिलता है, पैसे भी मिलते हैं और ऊर्जा भी तैयार होती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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