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क्रिकेट में हाथ घुमाकर ही क्यों फेंकते हैं गेंद, कैसे शुरू हुई मॉर्डन बॉलिंग?

क्रिकेट में आधुनिक गेंदबाजी का सफर जमीन पर लुढ़कने वाली अंडरआर्म गेंदों से शुरू हुआ था. बल्लेबाजों के दबदबे को चुनौती देने के लिए खिलाड़ियों ने हाथ ऊपर उठाना शुरू किया, जिससे विवाद बढ़ने लगा.

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  • क्रिकेट में गेंदें लुढ़काने से लेकर आधुनिक गेंदबाजी का विकास हुआ.
  • 1800 के दशक में राउंडआर्म गेंदबाजी की शुरुआत हुई, विवाद भी हुए.
  • 1864 में ओवरआर्म गेंदबाजी को कानूनी मंजूरी मिली, मॉडर्न बॉलिंग का जन्म.
  • ओवरआर्म बॉलिंग से तेज गेंदबाजों ने खेल में खौफ और रोमांच बढ़ाया.

आज दुनिया भर में क्रिकेट का जो रोमांच हम देखते हैं, उसकी असल जान गेंदबाजों की रफ्तार और उनकी घूमती हुई गेंदें हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा से क्रिकेट में ऐसे गेंद नहीं फेंकी जाती थी? शुरुआत में गेंदबाज आज की तरह हाथ घुमाकर नहीं, बल्कि जमीन से सटाकर गेंद को लुढ़काते थे. नियमों के टकराव, अंपायरों के फैसलों और खिलाड़ियों के विरोध से गुजरते हुए आखिरकार क्रिकेट को उसकी आधुनिक गेंदबाजी मिली, जिसने इस खेल का पूरा रोमांच ही बदल कर रख दिया. आइए जानें कि मॉर्डन बॉलिंग की शुरुआत कब हुई.

रफ्तार और ताकत का असली विज्ञान

क्रिकेट के मैदान पर जब कोई गेंदबाज पूरा हाथ घुमाकर गेंद फेंकता है, तो इसके पीछे विज्ञान और ताकत का एक बड़ा तालमेल काम करता है. कंधे के पीछे से पूरे हाथ को घुमाकर एक बड़ा चक्र या आर्क बनाया जाता है. ऐसा करने से गेंदबाज को अपनी मांसपेशियों की पूरी ताकत का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है. इससे शरीर में एक गतिज ऊर्जा पैदा होती है, जो रन-अप की गति के साथ मिलकर गेंद को बेहद तेज रफ्तार और जबरदस्त उछाल देती है.

हवा में स्विंग और कलाई का कमाल

हाथ को ऊपर से नीचे की तरफ बिल्कुल सीधा घुमाने का एक बड़ा फायदा यह होता है कि इससे गेंदबाज को अपनी कलाई की स्थिति पर पूरा नियंत्रण मिलता है. जब कलाई सही दिशा में होती है, तो गेंदबाज गेंद की सिलाई यानी सीम को हवा में अपनी मर्जी के मुताबिक रख सकता है. इसी तकनीक की बदौलत तेज गेंदबाजों को हवा में गेंद को चमकाने यानी स्विंग कराने में मदद मिलती है, जबकि स्पिन गेंदबाज इसी ऊंचे एंगल का फायदा उठाकर पिच पर गेंद को घुमा पाते हैं.

गेंदबाजी में हाथ को कितना घुमा सकते हैं?

क्रिकेट के खेल में नियमों का पालन सबसे जरूरी माना जाता है. मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी के नियमों के मुताबिक, कोई भी गेंदबाज गेंद फेंकते समय अपनी कोहनी को एक तय सीमा से ज्यादा नहीं मोड़ सकता है. अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे चकिंग या अवैध एक्शन माना जाता है. पूरा हाथ घुमाकर गेंद फेंकने की यह खास तकनीक गेंदबाजों को अपनी कोहनी को गैर-कानूनी तरीके से मोड़ने से रोकती है, जिससे वे बिना किसी नो-बॉल के डर के सही तरीके से गेंदबाजी कर पाते हैं.

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कभी जमीन पर लुढ़कती थी गेंद

मॉडर्न बॉलिंग का इतिहास जानने के लिए हमें क्रिकेट के शुरुआती दिनों में जाना होगा, जब केवल अंडरआर्म यानी हाथ को नीचे रखकर गेंदबाजी करने का चलन था. उस दौर में गेंदबाज गेंद को हवा में फेंकने के बजाय सीधे जमीन पर लुढ़काते हुए बल्लेबाज तक पहुंचाते थे. उस समय की पिचें भी बहुत उबड़-खाबड़ होती थीं. लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और खेल के मैदान बेहतर होने लगे, बल्लेबाजों ने इन लुढ़कती गेंदों पर आसानी से खूब सारे रन बनाने शुरू कर दिए.

कैसे हुई राउंडआर्म की शुरुआत

जब बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल हो गया, तब गेंदबाजों ने नए रास्ते तलाशने शुरू किए. इसी कोशिश में 1800 के दशक में राउंडआर्म गेंदबाजी का जन्म हुआ. इस तकनीक में गेंदबाज अपने हाथ को कंधे के बिल्कुल समानांतर यानी सीधा रखकर गेंद फेंकते थे. इतिहास बताता है कि इस अनोखी शैली की शुरुआत केंट के रहने वाले जॉन विल्स और उनकी बहन क्रिस्टीना विल्स ने की थी. क्रिस्टीना को अपने घेरदार कपड़ों की वजह से नीचे से गेंद फेंकने में दिक्कत होती थी, इसलिए उन्होंने हाथ को थोड़ा ऊपर उठाकर फेंकना शुरू किया.

जब मैदान पर हुआ भारी विवाद

राउंडआर्म की इस नई तकनीक ने क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा तहलका मचा दिया. कई सालों तक इस बात को लेकर विवाद चलता रहा कि हाथ को कितना ऊपर उठाया जा सकता है. अंपायरों ने कई बार इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए नो-बॉल देना शुरू कर दिया. इस बात से नाराज होकर कई गेंदबाज और टीमें मैदान छोड़कर बाहर तक चली गईं. क्रिकेट जगत इस बात को लेकर दो धड़ों में बंट गया था कि खेल का यह नया तरीका सही है या गलत.

1864 में हुआ मॉडर्न बॉलिंग का जन्म

तमाम विवादों और बहसों के बाद आखिरकार क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब को झुकना पड़ा. साल 1864 में एमसीसी ने आधिकारिक तौर पर नियमों में बदलाव करते हुए ओवरआर्म यानी हाथ को कंधे से ऊपर ले जाकर गेंद फेंकने को कानूनी मंजूरी दे दी. क्रिकेट के इतिहास में इसी साल को असल मायनों में मॉडर्न बॉलिंग का जन्मवर्ष माना जाता है. इस फैसले ने गेंदबाजों को एक नई आजादी दी और खेल को पूरी तरह से बदल दिया.

तेज गेंदबाजी के दिग्गजों का उदय

ओवरआर्म बॉलिंग को मंजूरी मिलते ही गेंदबाजों को गेंद में भयानक रफ्तार और खतरनाक उछाल पैदा करने की ताकत मिल गई. 20वीं सदी में इस तकनीक का इस्तेमाल करके डेनिस लिली, जेफ थॉम्पसन जैसे गेंदबाजों ने बल्लेबाजों के मन में खौफ पैदा किया. इसके बाद पाकिस्तान के वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे दिग्गजों ने इस एक्शन के साथ पुरानी गेंद को हवा में चमकाने की कला यानी रिवर्स स्विंग को दुनिया के सामने लाकर एक नया इतिहास रच दिया.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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