इस देश के लोग करते हैं सबसे ज्यादा खुदकुशी, किस नंबर पर है भारत?
Highest Suicide Rate Country: दुनिया भर में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि वह कौन सा देश है जहां पर सबसे ज्यादा आत्महत्या की जाती है.

- लेसोथो में सर्वाधिक आत्महत्या दर, प्रति लाख 87.5 मौतें।
- भारत कुल आत्महत्या में प्रथम, दर में 43वें स्थान पर।
- महाराष्ट्र में सर्वाधिक आत्महत्या मामले, सिक्किम में दर अधिक।
- दिहाड़ी मजदूर, छात्र, युवा वर्ग आत्महत्या से सर्वाधिक प्रभावित।
Highest Suicide Rate Country: आत्महत्या दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य की एक बड़ी चिंता बन चुकी है. लेकिन आबादी के अनुपात में मौतों की संख्या के आधार पर देशों के बीच काफी अंतर है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक लेसोथो में आत्महत्या की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है. यहां प्रति 100000 लोगों पर 87.5 मौतें होती हैं.
इसी के साथ भारत में अपनी बड़ी आबादी की वजह से आत्महत्याओं की कुल संख्या काफी ज्यादा है. लेकिन जब आंकड़ों को प्रति 1 लाख लोगों पर दर के रूप में मापा जाता है तो इसकी स्थिति बदल जाती है.
लेसोथो में आत्महत्या की दर सबसे ज्यादा
अपनी आबादी के अनुपात में आत्महत्या से होने वाली मौतों के मामले में लेसोथो दुनिया भर में पहले स्थान पर आता है. यहां दर प्रति 100000 आबादी पर 87.5 मौतें बताई गई हैं. यह दी गई जानकारी में बताए गए वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है.
इन आंकड़ों से पता चलता है कि मौतों की कुल संख्या और आत्महत्या की दर के बीच अंतर करना क्यों जरूरी है. कम आबादी वाले देशों में भी दर ज्यादा हो सकती है भले ही वहां मौतों की कुल संख्या कम हो.

आत्महत्या की दर के आधार पर शीर्ष पांच देश
रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रति 1 लाख आबादी पर सबसे ज्यादा आत्महत्या दर वाले पांच देश इस तरह हैं:
- लेसोथो: प्रति 1 लाख लोगों पर 87.5 मौतें
- दक्षिण कोरिया: प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 27.5-29.1 मौतें, इससे यह इस सूची में एशिया का शीर्ष देश बन जाता है.
- एस्वातिनी: प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 27.2 मौतें
- गुयाना: प्रति 1 लाख लोगों पर लगभग 24.8-26.4 मौतें
- उरुग्वे: प्रति 100000 लोगों पर लगभग 24.8 मौतें
भारत का क्या स्थान है?
भारत की स्थिति इस बात पर निर्भर होती है कि आंकड़ों को कैसे मापा जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक आत्महत्या से होने वाली मौतों की कुल संख्या के मामले में भारत दुनिया भर में पहले स्थान पर आता है. लेकिन अगर प्रति 1 लाख आबादी पर दर के हिसाब से देखें तो भारत ग्लोबल रैंकिंग में लगभग 43वें स्थान पर है.
भारत में आत्महत्या की दर प्रति 100000 लोगों पर लगभग 12 से 12.5 मौतें बताई गई हैं. इसी के साथ मौजूद डेटा के मुताबिक ग्लोबल औसत प्रति एक लाख लोगों पर लगभग 9.2 है.

किन भारतीय राज्यों में सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल क्राईम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के डेटा से यह पता चलता है कि भारतीय राज्यों में महाराष्ट्र में आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं. मामलों की कुल संख्या के हिसाब से इसके बाद तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल का नंबर आता है.
हालांकि आबादी के आकार को ध्यान में रखने पर राज्य स्तर की तुलना बदल सकती है. आबादी के अनुपात में दर के आधार पर सिक्किम में राज्यों के बीच सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं.
कौन से ग्रुप सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
भारत में आत्महत्या करने वालों में दिहाड़ी मजदूरों का हिस्सा सबसे ज्यादा है. यह हिस्सा 26.4% का है. इसमें छात्रों और घर संभालने वालों के बीच भी आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी की बात कही गई है. 15 से 29 साल के युवाओं को खास तौर पर कमजोर ग्रुप के तौर पर पहचाना गया है. यह गंभीर भावनात्मक परेशानी से गुजर रहे लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता, शुरुआती दखल और आसानी से मौजूद मदद के महत्व दर्शाता है.
आत्महत्या के आंकड़ों को ध्यान से समझना चाहिए क्योंकि अलग-अलग देशों और समय के साथ रिपोर्टिंग के तरीके, आबादी की बनावट और डेटा की क्वालिटी अलग-अलग हो सकती है. यह आंकड़े समस्या के पैमाने का संकेत देते हैं लेकिन यह अपने आप में यह नहीं बताते कि अलग-अलग समाजों में आत्महत्या की दरें क्यों अलग-अलग होती हैं.
आत्महत्या की दरों की तुलना करते समय आबादी क्यों मायने रखती है?
आत्महत्या के आंकड़ों की तुलना करने के लिए कुल मौतों की संख्या और प्रति 100000 लोगों पर दर, दोनों को देखना जरूरी है. भारत की बड़ी आबादी का मतलब है कि कम दर होने पर भी मौतों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है. इसी तरह छोटे देशों में कुल मौतें कम होने के बावजूद दर काफी ज्यादा हो सकती है.
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