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पहली बार कब और कहां छपी मौसम की रिपोर्ट, जानें कहां बना था पहला मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट?

दुनिया की पहली मौसम रिपोर्ट 1 अगस्त, 1861 को रॉबर्ट फ्रिट्जरॉय की मेहनत से लंदन के द टाइम्स अखबार में छपी थी. समुद्री हादसों को रोकने के लिए ब्रिटेन में 1854 में पहला मौसम विभाग बना.

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच मचे युद्ध के घमासान और तकनीकी होड़ के बीच, आज हम एक क्लिक पर अपने स्मार्टफोन में कल के मौसम का हाल जान लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब दुनिया के पास न सैटेलाइट थे और न ही कंप्यूटर, तब पहली बार मौसम की रिपोर्ट कैसे तैयार की गई होगी? यह कहानी साहस, विज्ञान और हजारों लोगों की जान बचाने के जज्बे से जुड़ी है. आज से करीब 160 साल पहले एक ब्रिटिश नौसेना अधिकारी ने वह कर दिखाया था जिसे उस दौर में जादू या असंभव माना जाता था. मौसम विज्ञान का यह सफर समंदर की लहरों से शुरू होकर आज हमारे मोबाइल की स्क्रीन तक पहुंच गया है.

अखबार के पन्नों पर पहली भविष्यवाणी

दुनिया की सबसे पहली मौसम रिपोर्ट 1 अगस्त, 1861 को लंदन के मशहूर अखबार द टाइम्स में प्रकाशित हुई थी. इस ऐतिहासिक रिपोर्ट में लंदन के लिए 62 डिग्री तापमान और साफ आसमान रहने का अनुमान लगाया गया था. हैरानी की बात यह है कि उस दौर में बिना किसी आधुनिक मशीनरी के यह भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक साबित हुई थी. यह पहली बार था जब आम जनता को यह पता चला कि आने वाले घंटों में कुदरत का मिजाज कैसा रहने वाला है. इससे पहले लोग केवल आसमान देखकर या पुराने अनुभवों के आधार पर ही अंदाजा लगाया करते थे.

मौसम विज्ञान के जनक कौन थे?

इस पूरी क्रांति के पीछे ब्रिटिश नेवी के एक जांबाज अफसर रॉबर्ट फ्रिट्जरॉय का दिमाग था. फ्रिट्जरॉय वही शख्स थे, जिन्होंने महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के साथ एचएमएस बीगल जहाज पर पूरी दुनिया की यात्रा की थी. इसी लंबी समुद्री यात्रा के दौरान उन्होंने हवाओं के दबाव और बादलों की चाल को समझने के लिए कड़ी रिसर्च की थी. उन्होंने ही सबसे पहले यह तकनीक खोजी कि आने वाले समय के मौसम का पूर्वानुमान कैसे लगाया जा सकता है. फ्रिट्जरॉय का मानना था कि विज्ञान का इस्तेमाल केवल किताबों के लिए नहीं, बल्कि इंसानी जान बचाने के लिए होना चाहिए.

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समुद्री हादसों ने दिया 'वेदर फोरकास्ट' को जन्म

रॉबर्ट फ्रिट्जरॉय के इस जुनून के पीछे एक दर्दनाक वजह थी. उस दौर में ब्रिटेन के समुद्री तटों के पास महज 5 साल के भीतर करीब 7,400 जहाज डूब गए थे और हजारों नाविकों की जान चली गई थी. फ्रिट्जरॉय को यकीन था कि अगर मछुआरों और जहाज के कप्तानों को तूफान आने से पहले ही चेतावनी मिल जाए, तो इन जानलेवा हादसों को रोका जा सकता है. इसी नेक मकसद के साथ 1854 में ब्रिटेन में दुनिया का पहला मौसम विभाग (Meteorological Department) बनाया गया, जिसे आज हम मेट ऑफिस के नाम से जानते हैं.

रेडियो और टीवी तक पहुंचने का सफर

अखबारों में रिपोर्ट छपने के कई दशकों बाद संचार के नए साधनों ने इस जानकारी को और तेज कर दिया. 14 नवंबर, 1922 को पहली बार लंदन में बीबीसी रेडियो के जरिए लोगों ने अपने घरों में बैठकर मौसम का हाल सुना. इसके बाद 11 नवंबर, 1936 को बीबीसी ने ही टेलीविजन पर दुनिया की पहली मौसम रिपोर्ट का प्रसारण किया. उस समय टीवी पर एक नक्शे के जरिए समझाया गया था कि कहां बारिश होगी और कहां धूप खिलेगी. बिजली के टेलीग्राफ से शुरू हुआ यह सफर आज सुपर कंप्यूटर और सैटेलाइट तक पहुंच चुका है, जिससे अब हफ्तों पहले सटीक जानकारी मिल जाती है.

बिना सैटेलाइट के सटीक गणना का चमत्कार

फ्रिट्जरॉय की पहली रिपोर्ट की सफलता आज भी वैज्ञानिकों को हैरान करती है. उस समय उन्होंने केवल बैरोमीटर (हवा का दबाव नापने वाला यंत्र) और टेलीग्राफ की मदद से अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाई थी. उन्होंने दिखाया कि अगर डेटा को सही तरीके से समझा जाए, तो प्रकृति के संकेतों को पढ़ना मुमकिन है. आज जब हम युद्ध या आपदा के समय मौसम की पल-पल की जानकारी पाते हैं, तो इसके पीछे रॉबर्ट फ्रिट्जरॉय की वही दूरगामी सोच खड़ी है, जिसने 1861 में पहली बार अखबार के जरिए दुनिया को 'कल' का हाल बताया था.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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