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LPG, CNG और PNG गैस में क्या होता है अंतर, जान लीजिए सभी का काम

LPG vs CNG And PNG: रसोई में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी से लेकर गाड़ियों में भरी जाने वाली सीएनजी तक, हर गैस की अपनी खासियत और उपयोग है. आइए जानें कि इनमें क्या अंतर है और इनका काम क्या है.

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  • ईरान-इजराइल तनाव से ऊर्जा बाजार में हलचल, रसोई गैस हो रही प्रभावित.
  • LPG प्रोपेन-ब्यूटेन मिश्रण, कच्चे तेल से प्राप्त होती है और सिलेंडरों में आपूर्ति की जाती है.
  • PNG मीथेन युक्त गैस, पाइपलाइन से आपूर्ति होती है, सिलेंडर की जरूरत नहीं.
  • CNG वाहनों के लिए स्वच्छ, सस्ता ईंधन, वायुमंडल से हल्की होती है.

LPG vs CNG And PNG: ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है. हॉर्मुज जलमार्ग पर संकट का मतलब है आपके किचन की गैस और कार के ईंधन पर सीधा प्रहार होना. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक आयात पर निर्भर है, इसलिए खाड़ी देशों की हर हलचल हमें प्रभावित करती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस LPG, CNG और PNG की चर्चा आज हर घर में है, वे तकनीकी रूप से एक-दूसरे से कितनी अलग हैं? आइए, इन गैसों के विज्ञान और काम करने के तरीके को विस्तार से समझते हैं. 

LPG घरों की रसोई का मुख्य आधार 

एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस वह ईंधन है जिससे भारत के करोड़ों घरों में चूल्हा जलता है. यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी हाइड्रोकार्बन गैसों का मिश्रण होती है. जब रिफाइनरी में कच्चे तेल को साफ किया जाता है, तब उप-उत्पाद के रूप में यह गैस निकलती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे भारी दबाव के जरिए तरल (लिक्विड) रूप में बदला जा सकता है, जिससे इसे छोटे और बड़े सिलेंडरों में भरकर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना आसान हो जाता है.

PNG- सिलेंडर के झंझट से आजादी देने वाली पाइपलाइन गैस

पीएनजी का पूरा नाम पाइप्ड नेचुरल गैस है. जैसा कि नाम से पता चलता है, यह गैस पाइपों के जरिए सीधे उपभोक्ताओं के घर या कारखानों तक पहुंचाई जाती है. बड़े शहरों में अब सिलेंडर की जगह पीएनजी का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसमें मीथेन की मात्रा अधिक होती है और यह हवा से हल्की होती है. पीएनजी की सबसे बड़ी सुविधा यह है कि इसमें आपको सिलेंडर बुक करने या उसके खत्म होने का इंतजार नहीं करना पड़ता है. यह आपके घर में लगे मीटर के आधार पर काम करती है, जिसका बिल बिजली के बिल की तरह बाद में आता है.

यह भी पढ़ें: LPG Gas Crisis: देश में कुल कितने गैस सिलेंडर, LPG संकट के बीच जान लीजिए आंकड़े

CNG- प्रदूषण कम करने वाला वाहनों का सस्ता विकल्प

सड़कों पर गाड़ियां दौड़ाने के लिए सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस एक वरदान साबित हुई है. यह प्राकृतिक गैस का ही एक रूप है जिसे बहुत ऊंचे दबाव पर कंप्रेस किया जाता है. पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी न केवल सस्ती पड़ती है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन भी काफी कम होता है. इसीलिए इसे 'क्लीन फ्यूल' या स्वच्छ ईंधन कहा जाता है. चूंकि यह हवा से हल्की होती है, इसलिए रिसाव होने पर यह जल्दी फैल जाती है, लेकिन आग लगने का खतरा पेट्रोल के मुकाबले कम रहता है.

LNG- लंबी दूरी के परिवहन और उद्योगों के लिए भारी ऊर्जा

इनके अलावा एलएनजी भी एक गैस होती है. एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस वह रूप है जिसे लंबी दूरी तक जहाजों के जरिए भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है जिससे वह तरल बन जाती है. तरल रूप में इसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे बड़े टैंकरों में भरकर एक देश से दूसरे देश ले जाना संभव हो पाता है. जब यह गैस अपने गंतव्य पर पहुंचती है, तो इसे फिर से गैस के रूप में बदलकर पाइपलाइनों या फैक्ट्रियों को सप्लाई किया जाता है.

भंडारण और सुरक्षा के लिहाज से इनमें बड़ा अंतर

इन गैसों के बीच सबसे बड़ा अंतर इनके घनत्व और दबाव का है. एलपीजी हवा से भारी होती है, इसलिए रिसाव होने पर यह जमीन की सतह पर जमा हो जाती है, जो खतरनाक हो सकता है. इसी कारण इसमें 'मरकैप्टन' नामक गंध मिलाई जाती है. इसके विपरीत सीएनजी और पीएनजी हवा से हल्की होती हैं और लीक होने पर ऊपर की ओर उड़ जाती हैं. वितरण के मामले में एलपीजी को सिलेंडर में रखा जाता है, जबकि पीएनजी और सीएनजी पूरी तरह से इंफ्रास्ट्रक्चर और पाइपलाइन नेटवर्क पर आधारित होती हैं.

यह भी पढ़ें: India Oil Import Routes: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा भारत में तेल आने के कितने रास्ते, जानें कहां-कहां से होता है आयात?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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