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Iran Debt: ईरान को कितना कर्ज दे चुका है भारत, जानें उस पर कितना उधार?

Iran Debt: मिडिल ईस्ट में अभी भी संघर्ष जारी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि भारत ने ईरान को अब तक कितना कर्ज दिया है. आइए जानते हैं कि ईरान पर कितना उधार है.

Iran Debt: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव के दौरान पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है. हालात तब और भी बिगड़ चुके हैं जब डोनाल्ड ट्रंप इस बात का दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने खार्ग द्वीप पर मौजूद सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है. डोनाल्ड ट्रंप के बयान के मुताबिक इस हमले ने ईरान के सैन्य ढांचे को काफी कमजोर कर दिया है. इसी बीच लोगों का ध्यान भारत और ईरान के बीच आर्थिक संबंधों पर भी गया है. आइए जानते हैं कि दोनों देशों के बीच कितना वित्तीय कर्ज या उधारी मौजूद है.

 क्या भारत ईरान को कर्ज देता है?

कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्थाओं के उलट ईरान आमतौर पर भारत से पारंपरिक सरकारी कर्ज के रूप में पैसे उधार नहीं लेता है. इसके बजाय भारत और ईरान के बीच वित्तीय संबंध काफी हद तक व्यापार और भुगतान निपटान पर ही आधारित रहे हैं. यह खासतौर से कच्चे तेल के मामले में हुआ है. 

कई सालों तक भारत ईरानी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक था. हालांकि ईरान पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध की वजह से पारंपरिक वैश्विक बैंकिंग प्रणाली के जरिए भुगतान करना मुश्किल हो गया था. यह प्रणाली अमेरिकी डॉलर या फिर यूरोप पर निर्भर करती हैं. इन प्रतिबंधों की वजह से दोनों देशों के बीच वित्तीय संबंध सीधे कर्ज देने के बजाय एक व्यापार आधारित भुगतान प्रणाली में बदल गए.

भुगतान की बड़ी बकाया राशि 

जब बैन के दौर में भारत ने ईरान से कच्चा तेल आयात किया तो भारतीय तेल कंपनियों को अक्सर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क के जरिए भुगतान करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. यही वजह रही कि ईरानी तेल के लिए अरबों डॉलर का भुगतान बकाया राशि के रूप में जमा हो गया. यह भारतीय रिफाइनरों को ईरान को देना था. ये भारत द्वारा दिए गए कर्ज नहीं थे बल्कि तेल आयात के लिए किए जाने वाले भुगतान थे.

इस समस्या को सुलझाने के लिए दोनों देशों ने एक रुपया आधारित निपटान प्रणाली शुरू की. इस व्यवस्था के तहत भारत ने तेल के भुगतान का कुछ हिस्सा डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में जमा किया. ये पैसे भारतीय बैंक जैसे यूको बैंक में बनाए गए खास खातों में रखे गए. क्योंकि भुगतान रुपये में किए गए थे इस वजह से उन पर अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में किए जाने वाले लेन-देन पर लगे प्रतिबंध लागू नहीं हुए.

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश 

व्यापार आधारित निपटान के अलावा भारत ने ईरान में खास विकास परियोजनाओं में भी निवेश किया है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण चाबहार बंदरगाह का विकास है. भारत ने इस बंदरगाह के विकास के लिए लगभग 500 मिलियन डॉलर देने का वादा किया. इस वादे के हिस्से के रूप में भारत के निर्यात आयात बैंक द्वारा लाइन ऑफ क्रेडिट के जरिए से लगभग 150 मिलियन डॉलर दिए गए. 

सीधे नकद ऋण क्यों मुश्किल?

भारत ने ईरान को बड़े सीधे नकद ऋण देने से खासतौर से इसलिए परहेज किया है क्योंकि पश्चिमी देशों ने उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखे हैं. इन सब के अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के मुताबिक 2024 के बीच तक ईरान का कुल बाहरी ऋण लगभग 4.36 बिलियन डॉलर था. इस राशि में से लगभग दो बिलियन डॉलर को अल्पकालिक ऋण माना गया. कुल मिलाकर ईरान के सरकारी ऋण का अनुमान उसकी जीडीपी के लगभग 20% से 25% के बीच लगाया गया.

यह भी पढ़ें: पहले विश्व युद्ध में कितनी हुई थी मौतें, थर्ड वर्ल्ड वॉर की आहट के बीच देख लीजिए आंकड़े

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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