Hindu Birth Rate: धीरेंद्र शास्त्री के 'चार बच्चे पैदा करो' वाले बयान पर बवाल, जानें अभी देश में क्या है हिंदुओं का बर्थ रेट?
Hindu Birth Rate: हाल ही में बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि हिंदू चार बच्चे पैदा करें. आइए जानते हैं कि भारत में हिंदुओं के बीच जन्म दर क्या है.

- धीरेंद्र शास्त्री ने चार बच्चे पैदा करने की अपील की।
- राष्ट्रीय हिंदू प्रजनन दर 1.94, 2.1 से कम है।
- अन्य समुदायों में भी प्रजनन दर कम हुई है।
- तीन दशकों में हिंदुओं की प्रजनन दर में भारी गिरावट।
Hindu Birth Rate: जाने माने आध्यात्मिक गुरु और बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नागपुर में अपने हालिया बयान से पूरे देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है. उन्होंने हिंदुओं से यह अपील की है कि वे चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित कर दें. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी से जुड़े नेताओं की मौजूदगी में दिए गए इस बयान पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. इस विवाद के बीच आइए जानते हैं कि आज भारत में हिंदुओं के बीच असल जन्म दर क्या है.
हिंदुओं की प्रजनन दर
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के डेटा के मुताबिक भारत में हिंदुओं के बीच कुल प्रजनन दर अभी 1.94 है. यह रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से काफी कम है. यह वह स्तर है जिसे आबादी में बिना किसी गिरावट के उसे स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है. आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब यह है कि औसतन हिंदू परिवार आज आबादी के स्तर को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए जरूरी बच्चों की संख्या से कम बच्चे पैदा कर रहे हैं.
दूसरे धार्मिक समुदायों से तुलना
डेटा से यह पता चलता है कि अलग-अलग समुदायों में यह दर अलग-अलग है. जहां हिंदुओं के दर 1.94 है, वहीं मुसलमानों की 2.36 है. अगर ईसाईयों की बात करें तो यह दर 1.88 है और सिखों की 1.61. इसी के साथ जैनियों की 1.60 और बौद्धों की 1.39 है. हालांकि जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में सभी समुदायों में प्रजनन दर लगातार कम हुई है. ऐसा सिर्फ धार्मिक कारणों की वजह से नहीं बल्कि बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलावों की वजह से भी हुआ है.
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दशकों में आई भारी गिरावट
हिंदुओं की प्रजनन दर में काफी गिरावट आई है. 1992-93 के डेटा में हिंदुओं की कुल प्रजनन दर करीब 3.3 थी. तीन दशकों में यह घटकर 1.94 हो गई है. यह गिरावट परिवार नियोजन, शहरीकरण, शिक्षा के स्तर और भारतीय परिवारों की बदलती सोच में आए बड़े बदलावों को दिखाती है.
समुदायों के बीच अंतर का कम होना
हालांकि बड़े समुदायों में मुसलमानों की प्रजनन दर अभी भी सबसे ज्यादा है. लेकिन इस समूह में गिरावट की रफ्तार सबसे तेज रही है. बीते कुछ सालों में करीब 35% की गिरावट आई है. यही वजह है कि अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम हो रहा है.
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