UN के नए मैप में अफ्रीका का साइज बड़ा, क्या सच में बढ गया इसका क्षेत्रफल?
UN World New Map: हाल ही में नए वर्ल्ड मैप को लेकर बड़ी चर्चा चल रही है. आइए जानते हैं कि क्यों बदला जा रहा है दुनिया का नक्शा और क्या सच में अफ्रीका का आकार भी बदल चुका है.

- यूएन मैप पर अफ्रीका का अब बड़ा व सही आकार।
- पारंपरिक 'मर्केटर' ने अफ्रीका को पहले छोटा दिखाया था।
- वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना विशाल महाद्वीप।
- 'करेक्ट द मैप' प्रस्ताव का अमेरिका ने विरोध किया।
UN World New Map: संयुक्त राष्ट्र के नए प्रस्तावित वर्ल्ड मैप पर अफ्रीका के आकार ने भौगोलिक चित्रण की एक पुरानी समस्या की तरफ फिर से ध्यान खींचा है. मैप पर कोई महाद्वीप कितना बड़ा दिखता है और असल में वह कितना बड़ा है इसके बीच एक बड़ा अंतर है. संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा करेक्ट द मैप प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन चर्चा में आ चुका है. हालांकि अफ्रीका के आकार में दिख रही बढ़ोतरी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि महाद्वीप खुद भी बड़ा हो गया है.
अफ्रीका का आकार
अफ्रीका का वास्तविक जमीनी क्षेत्रफल बिल्कुल भी नहीं बढ़ा है. इसका जमीनी हिस्सा उतना ही है. जो बदला है वह है एक सपाट विश्व मैप पर इसके आकार को दिखाने का तरीका. इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को महाद्वीपों के सापेक्ष क्षेत्रफल को ज्यादा सटीकता से दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है. इससे अफ्रीका अपने वास्तविक भौगोलिक आकार के काफी करीब दिखता है.

नए मैप पर अफ्रीका बड़ा क्यों दिखता है?
यह अंतर इस्तेमाल किए जा रहे हैं मैप प्रोजेक्शन के प्रकार की वजह से है. पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन जिसे 1569 में बनाया गया था, मुख्य रूप से नाविकों को दुनिया के महासागरों में नेविगेट करने में मदद के लिए डिजाइन किया गया था. यह दिशाओं और कोणों को तो प्रभावी ढंग से बनाए रखता है लेकिन जमीन हिस्सों के आकार को काफी हद तक बदल देता है. खासकर उन हिस्सों को जो भूमध्य रेखा से दूर स्थित हैं.
यही वजह है कि ग्रीनलैंड, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्से अपने वास्तविक भौगोलिक क्षेत्रफल की तुलना में काफी बड़े दिखते हैं. अफ्रीका जो काफी हद तक भूमध्य रेखा के करीब स्थित है अपेक्षाकृत छोटा दिखता है. 2018 में बनाया गया इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन एक अलग तरीका अपनाता है. इसका उद्देश्य नेविगेशन को प्राथमिकता देने के बजाय देशों और महाद्वीपों के सापेक्ष क्षेत्रफल को ज्यादा सटीकता से दिखाना है.
अफ्रीका बनाम ग्रीनलैंड
जब अफ्रीका की तुलना के ग्रीनलैंड से की जाती है तो यह अंदर खास तौर से और भी ज्यादा साफ हो जाता है. कई मैप पर अफ्रीका और ग्रीनलैंड आकार में लगभग बराबर दिख सकते हैं. लेकिन भौगोलिक रूप से यह वास्तविकता के बिल्कुल भी करीब नहीं है. अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है.
नया प्रोजेक्शन इस अंतर को देखना बहुत आसान बनाता है. इस वजह से अफ्रीका कभी बड़ा दिखता है, लेकिन ऐसा इसलिए नहीं है कि इसका जमीनी हिस्सा फैल गया है. इसके बजाय उस डिस्टॉर्शन को कम कर दिया गया है जिसकी वजह से यह पहले छोटा दिखता था.

असल में अफ्रीका कितना बड़ा है?
अफ्रीका एक काफी बड़ा महाद्वीप है जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है. आम दुनिया के नक्शों को देखकर इसके असल आकार का सही अंदाजा लगाना कभी-कभी मुश्किल होता है. इसके आकार को समझने के लिए एक उदाहरण लिया जा सकता है. अमेरिका, चीन, भारत, जापान, मेक्सिको और यूरोप के कई बड़े देश एक साथ अफ्रीका के क्षेत्रफल में समा सकते हैं और इसके बाद भी कुछ जमीन खाली बच जाएगी. इस वजह से नया नक्शा अफ्रीका को बड़ा नहीं दिख रहा बल्कि इसके असल आकार को समझना आसान बना रहा है.
यह भी पढ़ेंः UN का नया World Map क्यों चर्चा में, पुराना नक्शा किसने बनाया था?
क्या है विवाद?
रिपोर्ट के मुताबिक करेक्ट द मैप टोगो ने पेश किया था और भारत, फ्रांस और यूके सहित 164 देशों ने इसका समर्थन किया. समर्थकों का यह तर्क है कि भौगोलिक शिक्षा में ऐसे नक्शों का इस्तेमाल होना चाहिए जो महाद्वीपों के सापेक्ष आकार की सही समझ दें.
लेकिन अमेरिका एकमात्र ऐसा देश था जिसने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया. साथ ही 6 देशों ने वोटिंग में हिस्सा ही नहीं लिया. अमेरिका का यह तर्क था कि यह पहल एक वैचारिक एजेंडा को दिखाती है और संयुक्त राष्ट्र का ध्यान असल दुनिया के ज्यादा जरूरी मुद्दों से भटकाती है.
यह भी पढ़ेंः क्या खत्म होने जा रहा रूस-यूक्रेन युद्ध, जानें दोनों देशों को अब तक कितना नुकसान?





















