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Ketan Agarwal Murder Case: कितना चार्ज करते हैं वकील उज्जवल निकम, जो करेंगे केतन अग्रवाल मर्डर केस की पैरवी; कसाब को दिलवाई थी फांसी

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब उज्जवल निकम की एंट्री हो चुकी है. आइए जानते हैं क्या है वकील उज्ज्वल निकम की फीस.

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  • उज्जवल निकम पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस लड़ेंगे।
  • शुरू में हादसा लगा, बाद में सुनियोजित हत्या; मंगेतर गिरफ्तार।
  • निकम कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों के सरकारी वकील हैं।

Ketan Agarwal Murder Case: सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद उज्जवल निकम अब पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस को लड़ेंगे. उज्जवल निकम भारत के कई हाई प्रोफाइल क्रिमिनल केस में सरकारी पक्ष की तरफ से केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने अजमल कसाब के खिलाफ 26/11 मुंबई आतंकी हमले का केस भी लड़ा था. अब केतन अग्रवाल मर्डर केस में उनकी नियुक्ति जांच में एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने इस अनुभवी वकील को कोर्ट में केस पेश करने की जिम्मेदारी दी है. 

क्या है उज्जवल निकम की फीस? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक उज्जवल निकम हर पेशी के लिए लगभग ₹40000 फीस लेते हैं. कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त होने पर उज्जवल निकम को कोर्ट में प्रभावी ढंग से पेश होने के लिए ₹40000 दिए जाते हैं. इस रकम में प्रोफेशनल कंसल्टेशन फीस और केस से जुड़े दूसरे खर्च भी शामिल होते हैं. एक सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर निकम ने पिछले कई दशकों में कई बड़े और संवेदनशील क्रिमिनल केस में सरकार का पक्ष रखा है. 

सरकार की तरफ से सुरक्षा कवर 

आतंकवादियों और संगठित अपराध के मामलों में मुकदमा चलाने में अपनी भूमिका की वजह से उज्जवल निगम को सरकार की तरफ से कई सालों से Z प्लस सुरक्षा भी दी जा रही है. उनके काम से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए इस सुरक्षा का पूरा खर्च सरकार उठाती है. 

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क्या है केतन अग्रवाल मर्डर केस? 

यह मामला 22 साल के केतन अग्रवाल की मौत से जुड़ा हुआ है. केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले के पास एक खाई में गिरने से हुई थी. शुरुआत में इसे हादसा माना जा रहा था लेकिन बाद की जांच में कुछ ऐसे सबूत मिले जिनसे यह पता चला कि यह एक प्लैंड मर्डर था. इसके बाद पुलिस ने केतन की मंगेतर और उसके कथित साथी को गिरफ्तार किया. जांचकर्ताओं का यह दावा है कि दोनों ने केतन को किले में बुलाने और फिर उसे खाई में धकेलने की साजिश रची थी.

हाई प्रोफाइल केस में उज्ज्वल निकम का रिकॉर्ड 

उज्जवल निकम ने भारत में कई बड़े क्रिमिनल केस में सरकारी पक्ष को रखा है. उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के केस में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के तौर पर भी काम किया है. इस केस में अजमल कसाब को दोषी ठहराया गया और बाद में उसे मौत की सजा सुनाई गई. कसाब के मुकदमे के अलावा निकम ने 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाका के मामले, गुलशन कुमार मर्डर केस और कई दूसरे बड़े आतंकवाद और संगठित अपराध के मुकदमों में सरकारी पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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