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घर में भी उगा सकते हैं कद्दू, बस इन बातों का रखें ध्यान

Pumpkin Growing Tips: क्या आप भी छत पर ताजे कद्दू उगाना चाहते हैं? तो गमले के सही साइज से लेकर बंपर पैदावार के यह जरूरी सीक्रेट्स और गार्डनिंग टिप्स जरूर पढ़ें.

Pumpkin Growing Tips: अक्सर लोगों को लगता है कि कद्दू यानी सीताफल सिर्फ बड़े-बड़े खेतों में ही उगाया जा सकता है. क्योंकि इसकी बेल बहुत लंबी फैलती है और फल काफी भारी-भरकम होते हैं. लेकिन अगर आप थोड़ी सी सही प्लानिंग और सही तरीका अपनाएं तो अपनी छत या बालकनी में भी आसानी से मीठे और ताजे कद्दू उगा सकते हैं. बाजार में मिलने वाली केमिकल वाली सब्जियों से अलग जब आप अपने हाथ से तोड़े हुए ऑर्गेनिक कद्दू की सब्जी या सांभर बनाते हैं. 

तो उसका स्वाद एकदम लाजवाब होता हैं. घर पर कद्दू उगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पौधा बहुत तेजी से ग्रोथ पकड़ता है. बस आपको शुरुआत में कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना होता है. जैसे सही साइज का ग्रो बैग चुनना, बेल को ऊपर चढ़ाने का सही सहारा देना और फूलों का पॉलिनेशन कराना. चलिए आपको बताते हैं कि छत पर कद्दू की बंपर पैदावार लेने के लिए कौन-कौन सी बातें ध्यान रखनी हैं.

सही साइज का ग्रो बैग और सही मिट्टी जरूरी

घर पर कद्दू उगाने के लिए सबसे पहली शर्त है सही गमले का चुनाव करना. कद्दू की जड़ें काफी तेजी से और गहराई में फैलती हैं. इसलिए छोटे गमलों में यह कभी अच्छे फल नहीं देगा. इसके लिए कम से कम 18x18 या 24x24 इंच का बड़ा ग्रो बैग सबसे बेस्ट रहता है. अब बात आती है मिट्टी की क्योंकि कद्दू को अच्छी ग्रोथ के लिए काफी ज्यादा न्यूट्रिशन चाहिए होता है. 

मिट्टी तैयार करते समय 40% नॉर्मल गार्डन की मिट्टी, 40% अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 20% कोकोपीट व बालू रेत का मिक्स बनाएं. इसमें दो मुट्ठी नीम खली मिला दें ताकि जड़ों में फंगस या कीड़े न लगें. गमले की तली में 2-3 ड्रेनेज होल जरूर रखें जिससे एक्स्ट्रा पानी तुरंत बाहर निकल जाए. यह भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरी मिट्टी पौधे को शुरुआत से ही जबरदस्त ताकत देती है.
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बेल को ट्रेलिस का सहारा दे

कद्दू एक बेल वाला पौधा है जो अगर फर्श पर फैलेगा तो बहुत ज्यादा जगह घेर लेगा. छत पर स्पेस बचाने का सबसे बढ़िया तरीका है वर्टिकल गार्डनिंग. जैसे ही पौधा 1-2 फीट का होने लगे उसे बांस की लकड़ियों से मजबूत रस्सी के सहारे ऊपर दीवार पर चढ़ा दें. ऊपर चढ़ाने से पत्तों को अच्छी धूप और हवा मिलती है. जिससे बीमारियों का खतरा काफी घट जाता है. 

कद्दू को दिन भर में कम से कम 6 से 7 घंटे की सीधी धूप की जरूरत होती है. इसलिए गमले को हमेशा खुली जगह पर रखें. जब बेल पर कद्दू का फल बनने लगे और उसका साइज बड़ा होने लगे तो फल को नेट की जाली से बांधकर सपोर्ट दे दें. इससे भारी वजन के चलते कद्दू की टहनी टूटती नहीं है और फल सही तरीके से बड़ा होता रहता है.

ज्यादा फल पाने का तरीका

छत पर गार्डनिंग करते समय अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि छोटे कद्दू बनने से पहले ही पीले होकर गिर जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह पॉलिनेशन यानी परागण की कमी होती है. अगर आपकी बालकनी में मधुमक्खियां कम आती हैं. तो आपको खुद हैंड पॉलिनेशन करना होगा. कद्दू की बेल पर नर और मादा दो तरह के फूल आते हैं. मादा फूल के ठीक पीछे छोटा सा कद्दू बना दिखता है. 

सुबह के समय एक नर फूल तोड़कर उसकी पंखुड़ियां हटा लें और उसके बीच वाले हिस्से को मादा फूल के सेंटर पर हल्के से टच करा दें. इसके अलावा, हर 15 से 20 दिन में पौधे की हल्की गुड़ाई करके एक मुट्ठी कंपोस्ट या सरसों की खली का लिक्विड फर्टिलाइजर जड़ों में डालें. पानी तभी दें जब ऊपर की मिट्टी सूखी लगे. इन बातों का ध्यान रखकर आप घर पर ही ढेरों कद्दू पा सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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