लेबनान में खत्म हुई मौत की सजा, जानें कौन-से देश दिखा चुके रहमदिली?
Lebanon Death Penalty: लेबनान में अब फांसी की सजा को खत्म कर दिया गया है. आइए जानते हैं कि इसी तरह कौन से देशों में रहमदिली दिखाई गई है.

- लेबनान ने मौत की सज़ा ख़त्म कर उम्रक़ैद का प्रावधान किया।
- लेबनान मौत की सज़ा ख़त्म करने वाला दूसरा अरब देश।
- दुनियाभर में 110 से अधिक देश मृत्युदंड समाप्त कर चुके।
Lebanon Death Penalty: लेबनान का मौत की सजा खत्म करने का फैसला अरब दुनिया के मौत की सजा के नजरिए में एक बड़ा बदलाव है. लेबनान की संसद ने एक कानून को मंजूरी दी है. इसके तहत मौत की सजा की जगह कड़ी मेहनत के साथ उम्र कैद की सजा दी जाएगी. इसके साथ ही लेबनान जिबूती के बाद अरब लीग का दूसरा ऐसा सदस्य देश बन गया है जिसने मौत की सजा को पूरी तरह खत्म कर दिया है. इस फैसले से देश के अंदर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है.
लेबनान मौत की सजा खत्म करने वाला अरब लीग का दूसरा देश
लेबनान के इस कदम ने उसे उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल कर दिया है जिन्होंने अपने कानूनी व्यवस्था से मौत की सजा को हटा दिया है. इससे पहले जिबूती ही अरब लीग का एकमात्र सदस्य देश था जिसने मौत की सजा को खत्म कर दिया था.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के वैश्विक वर्गीकरण के मुताबिक 110 से ज्यादा देशों ने सभी अपराधों के लिए मौत की सजा को खत्म कर दिया है. इसी के साथ लगभग 145 देशों ने इसे कानून या फिर व्यवहार में खत्म कर दिया है. इस वजह से वैश्विक रुझान मौत की सजा की जगह जेल की सजा देने की तरफ बढ़ रहा है.

यूरोप ने मौत की सजा को लगभग पूरी तरह नकार दिया
यूरोपीय संघ मौत की सजा का विरोध करने वाले सबसे मजबूत क्षेत्रों में से एक है. फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे देश मौत की सजा को पूरी तरह से खत्म कर चुके हैं. यूनाइटेड किंगडम ने भी दशकों पहले सामान्य अपराधों के लिए इसे खत्म कर दिया था और अब बाद में अपनी बाकी कानूनी व्यवस्था से भी इसे पूरी तरह से हटा दिया था.
यूरोपीय मानवाधिकार संस्थाओं ने मौत की सजा को खत्म करने को अपने मानवाधिकार ढांचे का एक बड़ा हिस्सा बना दिया है. इससे पूरे महाद्वीप में मौत की सजा देना काफी कम हो गया है.
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका भी आगे
हाल ही में कई अफ्रीकी देशों ने मौत की सजा को खत्म किया है. इनमें चाड, सिएरा लियोन, जाम्बिया, घाना और मध्य अफ्रीकी गणराज्य शामिल हैं. लैटिन अमेरिका में भी मौत की सजा देने के मामलों में लंबे समय से कमी आई है. अर्जेंटीना, ब्राजील, कोलंबिया और मेक्सिको जैसे देशों ने सामान्य अपराधों के लिए मौत की सजा को खत्म कर दिया है. हालांकि कुछ देशों की कानूनी व्यवस्था में अभी भी कुछ खास मामलों के लिए इसके प्रावधान मौजूद हैं. ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने भी दशकों पहले मौत की सजा को पूरी तरह खत्म कर दिया था.
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लेबनान को राजनीतिक विरोध का सामना क्यों करना पड़ा?
यह कानून बिना विवाद के पास नहीं हो पाया. हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट और फ्री पैट्रियोटिक मूवमेंट के सांसदों ने इसे खत्म करने का विरोध किया और संसद से वॉकआउट किया. विरोध करने वालों का यह तर्क था की मौत की सजा खत्म करने से गंभीर अपराध के दोषी लोगों को फायदा हो सकता है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया की क्या ऐसी नरमी बरतना सही है, जबकि लेबनान अभी भी बड़ी सुरक्षा और आर्थिक चुनौती का सामना कर रहा है.

बाकी दुनिया मौत की सजा से कैसे निपटती है?
देशों को मोटे तौर पर कई श्रेणियों में बांटा जा सकता है. मौत की सजा खत्म करने वाले देशों ने सभी अपराधों के लिए इसे हटा दिया है. कुछ देशों ने इसे सिर्फ आम अपराधों के लिए खत्म किया है लेकिन युद्ध के समय के अपराधों के मामलों में इसे बनाए रखा है. कुछ ऐसे देश भी हैं जहां कानूनन मौत की सजा का प्रावधान तो है लेकिन कई सालों से किसी को फांसी नहीं दी गई. दरअसल इन्हें भी मौत की सजा को खत्म करने वाले देशों की श्रेणी में ही रखा जाता है.
आखिर में मौत की सजा को बनाए रखने वाले देश कानून और असल जिंदगी दोनों में इसका इस्तेमाल करते हैं. भारत, अमेरिका, चीन, ईरान और सऊदी अरब उन्हें देश में शामिल हैं जहां अदालत मौत की सजा सुना सकती है और फांसी दी जा सकती है.
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