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Wuhan Lab Scientists Salary: वुहान लैब में काम करने वाले साइंटिस्टों को कितनी सैलरी देता है चाइना, जानें कैसी होती है यहां की सिक्योरिटी

Wuhan Lab Scientists Salary: चीन की वुहान लैब एक बार फिर से जांच के घेरे में आ चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस लैब में काम करने वाले साइंटिस्ट्स को कितनी सैलरी मिलती है.

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  • अमेरिकी आरोपों से वुहान लैब फिर से जांच के दायरे में।
  • चीन विदेशी वैज्ञानिकों को करोड़ों का वार्षिक पैकेज देता है।
  • स्थानीय वैज्ञानिकों का वेतन कम, BSL-4 सुरक्षा सुविधाएँ हैं।
  • लैब के सैन्य संबंधों पर भी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में आरोप हैं।

Wuhan Lab Scientists Salary: कॉविड-19 महामारी की शुरुआत से जुड़े नए आरोपों के बीच चीन का वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी एक बार फिर से दुनिया भर में चर्चा और जांच के घेरे में आ चुका है. कोरोना वायरस से जुड़ी रिसर्च के लिए फंडिंग और महामारी के दौरान प्रमुख वैज्ञानिकों की भूमिका को लेकर किए गए दावों के बाद यह विवाद और भी बढ़ गया है. दरअसल अमेरिका की नेशनल इंटेलीजेंस के डायरेक्टर तुलसी गाबार्ड ने अमेरिकी साइंटिस्ट एंथनी फाउची पर कोरोना वायरस को लेकर एक गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एंथनी फाउची पर आरोप लगाते हुए कुछ खुफिया दस्तावेजों के हवाले से यह दावा किया है कि फाउची ने ही चीन की वुहान लैब को उस जानलेवा रिसर्च के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग दी थी. इसके बाद ही वह जानलेवा वायरस पैदा हुआ. इसी बीच आइए जानते हैं कि वुहान लैब में काम करने वाले साइंटिस्ट्स को कितनी सैलरी दी जाती है.

वुहान लैब में वैज्ञानिकों की सैलरी 

चीन दुनिया भर से बेहतरीन वैज्ञानिक प्रतिभाओं को आकर्षित करने के लिए काफी शानदार सैलरी पैकेज देता है. खासकर वायरोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और संक्रामक रोगों पर रिसर्च जैसे एडवांस्ड क्षेत्र में. चीन के टैलेंट रिक्रूटमेंट प्रोग्राम के बारे में रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले रिसर्चर्स को सालाना 5 लाख से 20 लाख चीनी युआन तक का पैकेज मिल सकता है. भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹58 लाख से ₹2.3 करोड़ के बराबर है. सैलरी के अलावा वैज्ञानिकों को अक्सर रहने के लिए मदद, हेल्थ केयर सुविधा, रिसर्च ग्रांट और उनके बच्चों की शिक्षा के लिए सहायता भी दी जाती है. 

विदेशी रिसर्चर्स के लिए खास इंसेंटिव

चीन लंबे समय से विदेशी विशेषज्ञों और विदेशों में रहने वाले चीनी वैज्ञानिकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए टैलेंट रिक्रूटमेंट प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जा रहा है. थाउजेंड‌ टैलेंट्स प्रोग्राम जैसे कार्यक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले रिसर्चर्स को काफी आर्थिक इंसेंटिव दिए हैं. विदेशी अदालती दस्तावेजों और जांच से यह पता चलता है कि कुछ मामलों में वैज्ञानिकों को लैब बनाने और रिसर्च प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए लाखों डॉलर की फंडिंग दी गई और साथ ही अच्छी मासिक सैलरी भी दी गई.

स्थानीय वैज्ञानिकों की सैलरी 

जिस तरफ सीनियर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भर्ती किए गए रिसर्चर्स को बड़े सैलरी पैकेज दिए जाते हैं वहीं एंट्री लेवल और जूनियर वैज्ञानिकों की कमाई काफी कम होती है. अपना करियर शुरू करने वाले स्थानीय रिसर्चर्स को आमतौर पर उनकी योग्यता, अनुभव और रिसर्च की जिम्मेदारियों के आधार पर हर महीने 7000 से 20000 युआन के बीच दिए जाते हैं.

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क्या है सुरक्षा का स्तर?

लैब में बायो सेफ्टी लेवल 4 का इस्तेमाल किया गया है. यह दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले बायोलॉजिकल कंटेनमेंट की सबसे ऊंची कैटेगरी है. बायो सेफ्टी लेवल 4 सुविधाओं को खतरनाक पैथोजन को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है. इनसे काफी गंभीर बीमारी हो सकती है और इनका कोई भी इलाज नहीं है.

इसी के साथ सबसे सुरक्षित क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों को खास पॉजिटिव प्रेशर वाले सुरक्षात्मक सूट पहनाए जाते हैं. प्रयोगशाला में एडवांस्ड एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम, सीलबंद चैंबर और कई एयरलॉक एंट्री पॉइंट का भी इस्तेमाल किया जाता है.

साथ ही कई इंटरनेशनल रिपोर्ट और इंटेलिजेंस असेसमेंट में यह आरोप लगाया गया है कि लैब के संबंध चीनी सरकार और मिलिट्री से जुड़े रिसर्च प्रोग्राम से हैं. चीनी अधिकारियों का लगातार यह कहना है कि यह इंस्टिट्यूट एक वैज्ञानिक रिसर्च सुविधा है जो पब्लिक हेल्थ और बीमारी की रोकथाम पर केंद्रित है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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