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Voyager Golden Record: क्या है वॉयजर गोल्डन रिकॉर्ड, जानें पृथ्वी के डेटा के साथ इसे क्यों भेजा गया था अंतरिक्ष में?

Voyager Golden Record: 1977 में नासा ने अंतरिक्ष में एक गोल्डन रिकॉर्ड भेजा था. आइए जानते हैं क्या था गोल्डन रिकॉर्ड और उसमें पृथ्वी का कौन सा डेटा था.

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  • 1977 में नासा ने वॉयेजर गोल्डन रिकॉर्ड अंतरिक्ष में भेजा।
  • एलियन हेतु इसमें पृथ्वी-मानव सभ्यता का विस्तृत परिचय है।
  • इसमें 115 तस्वीरें और 55 भाषाओं में अभिवादन शामिल हैं।
  • इसमें पृथ्वी की रोजमर्रा की आवाजें 12 मिनट तक हैं।

Voyager Golden Record: 1977 में नासा ने अंतरिक्ष में इंसानों का सबसे अनोखा संदेश भेजा. वॉयेजर 1 और वॉयेजर 2 स्पेसक्राफ्ट के साथ एक खास 12 इंच की सोने की परत वाली तांबे की डिस्क लगाई गई थी. इसे वॉयेजर गोल्डन रिकॉर्ड के नाम से जाना जाता है. इस रिकार्ड को इस वजह से बनाया गया था कि भविष्य में अगर कोई एलियन सभ्यता इसे खोजे तो उसे पृथ्वी और इंसानी सभ्यता के बारे में पता चल सके. चार दशक से भी ज्यादा समय बाद भी गोल्डन रिकॉर्ड अंतरिक्ष में अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं. 

वॉयेजर गोल्डन रिकॉर्ड क्या है?

वॉयेजर गोल्डन रिकॉर्ड सोने की परत वाली तांबे की एक फोनोग्राफ डिस्क है जिसे नासा ने एक कॉस्मिक टाइम कैप्सूल के तौर पर बनाया था. इस मशहूर खगोल शास्त्री कार्ल सागन की अगुवाई वाली टीम ने तैयार किया था और 1977 में लॉन्चिंग से पहले स्पेसक्राफ्ट पर लगाया था.

इस रिकॉर्ड में पृथ्वी, इंसानियत और हमारे ग्रह पर जीवन के बारे में सावधानी से चुनी गई जानकारी है. वैज्ञानिकों ने इसे इस तरह से डिजाइन किया था कि यह अंतरिक्ष के मुश्किल हालात में लाखों और शायद अरबों सालों तक सुरक्षित रह सके.

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पृथ्वी का एक कॉस्मिक परिचय 

गोल्डन रिकॉर्ड को एक आसान सवाल का जवाब देने के लिए डिजाइन किया गया था. वह सवाल था कि आखिर हम कौन हैं? सिर्फ विज्ञान पर ध्यान देने के बजाय यह रिकॉर्ड पृथ्वी पर जीवन की एक व्यापक तस्वीर को पेश करता है. इसमें दुनिया भर की अलग-अलग संस्कृतियों के इंसान, जानवर, नजारे, टेक्नोलॉजी, भावना, भाषा और संगीत शामिल हैं. 

रिकॉर्ड में क्या जानकारी स्टोर है? 

इस रिकॉर्ड में पृथ्वी पर जीवन को दर्शाने वाले डेटा का एक शानदार कलेक्शन है. वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर जीवन के अलग-अलग पहलू को दिखाने वाली 115 तस्वीर और चित्र शामिल किए. इन तस्वीरों में इंसानी शरीर की बनावट, वैज्ञानिक कॉन्सेप्ट, प्राकृतिक नजारे, वन्य जीव, ट्रांसपोर्ट सिस्टम, शहर की जिंदगी और पारिवारिक रिश्ते दिखाए गए हैं. एक तस्वीर में मां अपने बच्चों को दूध पिलाती हुई भी दिखती है जो इंसानी जिंदगी और देखभाल का प्रतीक है.

इसी के साथ गोल्डन रिकॉर्ड में दुनिया भर में बोली जाने वाली 55 भाषाओं में रिकॉर्ड किए गए अभिवादन शामिल हैं. इस कलेक्शन में कई भारतीय भाषाएं भी शामिल हैं. जैसे हिंदी, पंजाबी, बंगाली, गुजराती, मराठी और उर्दू.

पृथ्वी की आवाजें

12 मिनट के एक खास ऑडियो हिस्से में हमारे ग्रह की रोजमर्रा की आवाजें भी रिकॉर्ड की गई हैं. इन रिकॉर्डिंग्स में बादलों की गड़गड़ाहट, बारिश, समुद्र के लहरें, पक्षियों का चहकना, बच्चों की हंसी, कदमों की आहट, इंसान के दिल की धड़कन और ट्रेनों व हवाई जहाज की आवाज शामिल है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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