होर्मुज फिर बंद हुआ तो कितना महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? जानिए दुनिया की 'ऑयल लाइफलाइन' का पूरा गणित
Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट पर एक बार फिर से संकट गहरा गया है. आइए जानते हैं कि इसके बाद होने के बाद तेल की कीमतों में क्या बदलाव आएंगे.

- ईरान द्वारा होरमुज बंद करने से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ेंगी।
- सुरक्षा जोखिम, बढ़ी ढुलाई लागत तेल मूल्य बढ़ाएगी।
- भारत में पेट्रोल-डीजल ₹20-30 प्रति लीटर महंगा होगा।
- परिवहन खर्च बढ़ने से आवश्यक वस्तुएं भी महंगी होंगी।
Strait of Hormuz: होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक है. इस संकरे समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तुरंत हलचल मच जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया का कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा रोजाना यहीं से गुजरता है. अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान के इस्लामी रिवॉल्यूशनरी कार्ड कॉर्प्स ने एक बार फिर से होर्मुज बंद कर दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इसके बाद ग्लोबल तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा और कितना महंगा हो जाएगा पेट्रोल और डीजल.
तेल की कीमतें क्यों बढ़ेंगी?
इसका सबसे बड़ा कारण तेल टैंकरों के लिए सुरक्षा का बढ़ता जोखिम है. सैन्य संघर्ष या फिर बढ़ते तनाव के समय शिपिंग कंपनी हमले, देरी या फिर नौसैनिक प्रतिबंध की आशंका की वजह से बचने की कोशिश कर सकती हैं. तेल के ट्रांसपोर्टेशन की लागत भी काफी बढ़ जाती है. शिपिंग कंपनी को काफी ज्यादा फ्रेट चार्ज और जंग के जोखिम से जुड़े बीमा प्रीमियम का सामना करना पड़ता है. इस वजह से अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाए जाने वाले हर बैरल की कुल लागत बढ़ जाती है.
फाइनेंशियल मार्केट भी सप्लाई में कमी की आशंका पर तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं. असल में कमी होने से पहले ही ट्रेडर अक्सर भविष्य में रुकावट की उम्मीद में कच्चे तेल की कीमत को बढ़ा देते हैं. इससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में कीमत तेजी से बढ़ जाती है.
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भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. इसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. इनका निर्यात होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. अगर कच्चे तेल की कीमतें $150 से $200 प्रति बैरल तक पहुंच जाती है तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹20 से ₹30 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों, एक्सचेंज रेट, टैक्स और सरकारी नीति पर निर्भर करेगा.
इसका असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट के ईंधन तक ही सीमित नहीं होगा. भारत इस रास्ते से बड़ी मात्रा में एलपीजी और एलएनजी भी इंपोर्ट करता है. इसका मतलब है कि खाना पकाने वाली गैस और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
बढ़ सकती है महंगाई
डीजल की कीमतें बढ़ने से पूरी अर्थव्यवस्था में ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है. क्योंकि ज्यादातर अनाज, सब्जी, फल और उपभोक्ता सामान ट्रकों से ढोए जाते हैं इस वजह से ईंधन की बढ़ती लागत का बोझ अक्सर ज्यादा कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं पर ही डाला जाता है.
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