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रशियन आर्मी के पास ये है सबसे खतरनाक बंदूक, एक बार में इतनों को कर सकती है ढेर

Russian Army Most Dangerous Gun: रूस के पास एक ऐसी बंदूक है जो कि दुनिया की सबसे घातक स्नाइपर है. आइए जानें कि इसका नाम क्या है और यह कितनी दूरी तक निशाना लगा सकता है और कितनों को मार सकती है.

रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है और लड़ाई बंद होने का नाम नहीं ले रही है. दोनों देश एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं. रूस को दुनिया में दूसरा सबसे ताकतवर देश माना जाता है. इसके पास बहुत खतरनाक हथियार हैं, जिनको वो दुनिया के कई देशों को सप्लाई करता है. कुछ साल पहले रूस ने अपनी नई स्नाइपर राइफल SVLK‑14S पेश की थी. जिसे कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दुनिया की सबसे घातक स्नाइपर बताया था. आइए जानें कि यह कितनी खतरनाक है. 

कितनी दूरी पर निशाना लगा सकती है बंदूक

रूस की इस स्नाइपर के बारे में द डेली मेल और द मिरर जैसी साइटों ने कई दावे किए हैं. इनकी मानें तो मुताबिक राइफल 2 मील (लगभग 3,200 मीटर) तक सटीक निशाना लगा सकती है और 3,000 मीटर से भी आगे स्थित लक्ष्य को प्रभावित कर सकती है. SVLK‑14S को पेशेवर स्नाइपर और खास तरह की शातिर फायरआर्म्स चलाने वाले जवानों के लिए डिजाइन किया गया है. राइफल का हर घटक हाई‑एंड ऑटोमोबाइल की तरह तैयार किया गया है और इसके जरिये फायर की गई गोलियां भारी से भारी कवच को भेद सकती हैं.

इसका वजन और मारक क्षमता

इस हथियार का कुल वजन लगभग 10 किलोग्राम है और इसकी कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग ₹28,62,000 (करीब 28.6 लाख रुपये) निर्धारित की गई है. रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि SVLK‑14S की दफा‑फायर क्षमता और गोला‑बारूद इतना प्रभावशाली है कि पारंपरिक कई बुलेटप्रूफ जैकेट इसे रोकने में असमर्थ होंगे. 

इसके समर्थक इसे ब्रिटिश आर्मी की L115A3 राइफल से बेहतरीन बताते हैं. L115A3 की प्रभावी मारक दूरी आमतौर पर लगभग 1.5 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है, जबकि निर्माता और कुछ विश्लेषक SVLK‑14S की तुलना में कहीं अधिक रेंज का दावा कर रहे हैं.

कितनी प्रभावी है?

हालांकि हथियारों के प्रदर्शन पर अक्सर अतिशयोक्ति देखने को मिलती है, खासतौर से मारक दूरी, कवच‑भेदी क्षमता और वास्तविक क्षेत्रों में सटीकता के मामले में. बुलेटप्रूफ जैकेटों की सुरक्षा भी कई स्तरों में मापी जाती है, जैसे किसी एक जैकेट को न रोक पाने का मतलब यह नहीं है कि सभी प्रकार के बुलेटप्रूफ जैकेट पर यह प्रभावी रहेगा.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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