क्या सभी फ्लाइट में तैनात होते हैं एयर मार्शल, इंटरनेशनल फ्लाइट का क्या रूल?
Air Marshal: हाल ही में फ्लाईदुबई एक विमान में बड़ी घटना हुई है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या कमर्शियल फ्लाइट्स में एयर मार्शल तैनात किए जाते हैं? जानें क्या है इंटरनेशनल फ्लाइट का नियम.

- एयर मार्शल सभी उड़ानों पर नहीं, गुप्त रूप से तैनात।
- अंतर्राष्ट्रीय तैनाती को द्विपक्षीय समझौते, जोखिम आकलन चाहिए।
- भारत में 1999 अपहरण उपरांत स्काई मार्शल कार्यक्रम शुरू।
- सादे कपड़ों में वे संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा देते।
Air Marshal: भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार हाल ही में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई फ्लाइट में एक घटना के बाद चर्चा का विषय बन चुके हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक चाकू से गंभीर चोट लगने के बाद भी मच्छार ने साहस दिखाया और अपने सह पायलट को विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने से बचाया.
इस घटना ने विमानन सुरक्षा और एयर मार्शल की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. आइए जानते हैं कि क्या सभी कमर्शियल फ्लाइट्स में एयर मार्शल तैनात किए जाते हैं? जानें क्या है कानून.
क्या सभी उड़ानों में एयर मार्शल तैनात हैं?
नहीं. एयर मार्शल जिन्हें स्काई मार्शल भी कहा जाता है सभी कमर्शियल उड़ानों पर तैनात नहीं होते हैं. इन्हें आमतौर पर संवेदनशील या फिर उच्च जोखिम वाली मानी जाने वाली चुनिंदा उड़ानों को ही सौंपा जाता है.
एयर मार्शल की उपस्थिति को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है. मार्शल गुप्त रूप से यात्रा करते हैं ताकि संभावित अपराधी या फिर आतंकवादी उन्हें पहले से ही पहचान ना सकें. यह गोपनीयता सुरक्षा व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा मानी जाती है.

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए क्या नियम हैं?
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर सशस्त्र और मार्शलों की तैनाती में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर सख्त नियम शामिल हैं.
द्विपक्षीय समझौते
कोई भी देश आमतौर पर जरूरी अनुमति के बिना किसी सशस्त्र एयर मार्शल को अंतरराष्ट्रीय उड़ान पर नहीं भेज सकता है. इसमें शामिल देशों के बीच आपसी व्यवस्था जरूरी है. उदाहरण के लिए अगर किसी भारतीय एयर मार्शल को अंतरराष्ट्रीय रास्ते पर यात्रा करनी है तो गंतव्य देश की जरूरी मंजूरी और उसके नियमों का अनुपालन जरूरी है.
जोखिम मूल्यांकन
एयर मार्शल की तैनाती काफी हद तक सुरक्षा आकलन पर ही आधारित होती है. अंतर्राष्ट्रीय रास्तों पर तब ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है जब वे राजनीतिक रूप से संवेदनशील हों, हाल ही में बम धमकियों या फिर संदिग्ध अपहरण के खतरों जैसे खतरों का सामना किया हो, यह संघर्ष क्षेत्र और काफी ज्यादा तनाव वाले क्षेत्र के पास से गुजरते हों.
विमान का प्रकार और आकार
छोटे घरेलू विमानों की तुलना में बोइंग 777 या एयरबस ए380 जैसे लंबी दूरी के रास्ते पर चलने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों पर एयर मार्शल तैनात किए जाने की संभावना कुछ हद तक ज्यादा हो सकती है. हालांकि मार्शल की उपस्थिति मुख्य रूप से विमान के आकार के बजाय सुरक्षा जरूरत पर निर्भर करती है.

भारत में स्काई मार्शल सिस्टम क्या है?
भारत का स्काई मार्शल कार्यक्रम 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी 814 के अपहरण के बाद शुरू किया गया था. इसे आमतौर पर कंधार अपहरण के रूप में जाना जाता है.
भारत की प्रणाली के तहत खास तौर से प्रशिक्षित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो को स्काई मार्शल के रूप में तैनात किया जा सकता है. वे वर्दी पहनने के बजाय सादे कपड़ों में यात्रा करते हैं और आम यात्रियों के बीच बैठते हैं.
यह कर्मी विमान के अंदर उपयोग के लिए डिजाइन किए गए खास हथियारों से लैस हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक हथियारों में विमान के ढांचे को नुकसान पहुंचाने के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से कम वेग वाली आग्नेयास्त्र शामिल हैं. उनकी भूमिका गंभीर सुरक्षा खतरों का जवाब देना है. इसमें किसी विमान का अपहरण करने या फिर यात्रियों पर हमला करने का प्रयास भी शामिल है.
किन रास्तों पर स्काई मार्शल हो सकते हैं?
स्काई मार्शलों को आमतौर पर पूरे नेटवर्क के बजाय चुनिंदा संवेदनशील अंतर्राष्ट्रीय रास्तों पर तैनात किया जाता है. काबुल, काठमांडू, कोलंबो, मध्य पूर्व, दुबई और कनाडा जैसे गंतव्य वाले रास्तों की पहचान उन क्षेत्रों के रूप में की गई है जहां ऐसे सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है. उड़ानों के खिलाफ बम धमकियों की एक श्रृंखला के बाद सरकार ने संवेदनशील रास्तों पर स्काई मार्शलों की उपस्थिति बढ़ाने का फैसला लिया है.
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क्या यात्री स्काई मार्शल की पहचान कर सकते हैं?
आम यात्रियों के लिए स्काई मार्शल की पहचान करना काफी ज्यादा मुश्किल है. वे नागरिक कपड़ों में यात्रा करते हैं, सामान्य बोर्डिंग पास रखते हैं और केबिन के अंदर अलग-अलग जगह पर बैठ सकते हैं.
उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी केबिन की निगरानी करना और फ्लाइट डेक, खासकर कॉकपिट को गंभीर सुरक्षा खतरों से बचाना है. अपनी पहचान गोपनीय रखने से वे ध्यान आकर्षित किए बिना संदिग्ध गतिविधि का निरीक्षण कर सकते हैं.
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