क्या इंसानों की तरह जानवरों को भी होता है डिप्रेशन, जानें क्या होती है इसकी वजह?
Animal Depression: अक्सर ही लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या जानवरों को भी डिप्रेशन हो सकता है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

- व्यवहार, भूख में बदलाव डिप्रेशन के मुख्य संकेत देते हैं।
Animal Depression: डिप्रेशन और मानसिक तनाव सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं है. जानवर भी इन बीमारियों के लक्षण दिखा सकते हैं और वैज्ञानिक रिसर्च और ऑब्जर्वेशनल संबंधी स्टडी से पता चलता है कि कई स्तनधारी भावनाओं का अनुभव उन तरीकों से करते हैं जिनमें मानव भावनात्मक अनुभवों के साथ जरूरी समानताएं होती है. कुत्ते, बिल्ली हाथी और बंदर उन जानवरों में से हैं जिनके दिमाग की संरचना इस तरह से काम करती है जो ऐसी तुलना को मुमकिन बनाती है. जब जानवर उदास हो जाते हैं तो उनके शरीर में सेरोटोनिन और कोर्टिसोल सहित न्यूरोकेमिकल का संतुलन गड़बड़ा सकता है.
जानवरों में डिप्रेशन के कारण काफी अलग-अलग हैं. इनमें दुख, अलगाव, कारावास, उनके मालिकों की भावनात्मक स्थिति में बदलाव, शारीरिक बीमारी, उम्र बढ़ने और दर्दनाक अनुभव शामिल हो सकते हैं.
एक साथी को खोने के बाद दुख
किसी साथी, मलिक या फिर उनकी संतान की मौत या फिर कोई चोट लगने के बाद जानवर गहरे दुख का अनुभव कर सकते हैं. यह प्रतिक्रिया उनके रोजमर्रा के व्यवहार और बुनियादी दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है. एक करीबी साथी के खोने का दुख झेलने वाला जानवर सामान्य गतिविधि में दिलचस्पी लेना बंद कर सकता है या फिर खो सकता है. कुछ मामलों में परेशानी इतनी गंभीर हो सकती है कि जानवर खाना-पीना बंद कर देता है.

अकेलापन, उपेक्षा और अलगाव
कुत्ते, बिल्ली और हाथी सहित सामाजिक जानवर तक परेशान हो सकते हैं जब उन्हें लंबे वक्त तक अकेला छोड़ दिया जाता है या फिर उन पर पूरा ध्यान नहीं दिया जाता. सीमित सहयोग और उपेक्षा उनके व्यवहार और भावनात्मक स्थिति को प्रभावित कर सकती है. पालतू कुत्तों में अपने मालिक से अलग होने से जुड़ी परेशानी को अक्सर अलगाव की चिंता के रूप में बताया जाता है.
कारावास और प्राकृतिक व्यवहार की हानि
किसी जानवर का परिवेश उसके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डाल सकता है. चिड़ियाघर या फिर पिंजरे में रखे गए जानवर दौड़ने, शिकार करने या फिर घूमने जैसे प्राकृतिक व्यवहार करने में असमर्थ हो सकते हैं. जब वे इस तरह की गतिविधि नहीं कर पाते तो उनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्या पैदा हो सकती है. इस स्थिति को कभी-कभी वैज्ञानिक रूप से सीखी हुई असहायता के रूप में बताया जाता है.
मालिकों का भावनात्मक प्रभाव
पालतू जानवर अपने परिवेश और उनकी देखभाल करने वाले लोगों की भावनाओं के प्रति काफी ज्यादा संवेदनशील होते हैं. अगर कोई मालिक खुद डिप्रेशन या फिर तनाव का अनुभव करता है तो पालतू जानवर भी उदास और निराश हो सकता है.

बीमारी, बुढ़ापा और शारीरिक समस्या
शारीरिक स्वास्थ्य एक और जरूरी वजह है. पुराना दर्द, लंबे वक्त चली आ रही चिकित्सा स्थिति और बुढ़ापे से जुड़ी समस्या जानवरों में डिप्रेशन पैदा करती है. जब बीमारी या फिर उम्र बढ़ना सामान्य गतिविधि को मुश्किल बना देती है तो जानवर कम सक्रिय हो सकता है या फिर उन चीजों में रुचि खो सकता है जिनका वह पहले आनंद लेता था.
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डिप्रेशन के लक्षणों की पहचान
उनके व्यवहार में बदलाव कुछ जरूरी सुराग देते हैं. डिप्रेशन से जूझ रहा जानवर उन गतिविधि में रुचि खो सकता है जिनका वह पहले आनंद लेता था और काफी ज्यादा सुस्त हो जाता है. वे छिप सकते हैं जबकि उनकी भूख साफ तौर से बदल सकती है. कुछ जानवर काफी कम खाते हैं जबकि कुछ ज्यादा खाने लगते हैं. कुछ मामलों में जानवर खुद को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं.
इन लक्षणों के अलग-अलग कारण हो सकते हैं. इनमें शारीरिक बीमारी, दर्द, उम्र बढ़ना या फिर भावनात्मक तनाव शामिल हैं. जानवर डिप्रेशन जैसी स्थिति का अनुभव कर सकते हैं और उनकी भावनात्मक भलाई सामाजिक रिश्तों, रहने की स्थिति, स्वास्थ्य और दर्दनाक अनुभवों से प्रभावित होती है.
इस वजह से किसी जानवर की मानसिक स्थिति पर विचार करते वक्त व्यवहार, भूख और गतिविधि में बदलाव को समझना काफी जरूरी है. उदाहरण से पता चलता है कि भावनात्मक परिवर्तन दिनचर्या के जरिए से सामने आ सकते हैं. इससे लगातार भावनात्मक अंतर जानवरों की परेशानी को समझने का एक जरूरी हिस्सा बन जाता है.
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