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कभी ट्रेन की पटरियों के पास दीवार से घिरी ये छोटी जगह देखी है? ये क्यों बनी होती है?

आपने अक्सर ट्रैक पर ट्रॉली को चलते हुए देखा होगा. इस तरह की कुछ ट्रॉलियां हमेशा ब्लॉक या लाइन क्लियर ले कर नहीं चलती हैं. ये जगह आपातकाल में इन्ही ट्रॉलियों के लिए बनी होती है.

Indian Railway: जब कोई ट्रेन से सफर करता है तो उसका मन जिज्ञासाओं से भर जाता है. रेलवे से जुड़ी अलग-अलग चीजों को देख कर मन सवालों से भर जाता है. ऐसे आपने रेलवे ट्रैक के किनारे फोटो में दिख रही चकोर आकार की ईंट और मिट्टी बनी जगहें देखी होंगी. ज्यादातर लोगों ये मालूम नहीं है कि ये किसलिए बनाई जाती हैं. भारतीय रेलवे अपने 68 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबे ट्रैक, लगभग 13200 के करीब पैसेंजर ट्रेनों और 7325 स्टेशन के साथ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. इतने बड़े रेल नेटवर्क से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होती है. जिसके लिए समय-समय पर रेलवे ट्रैक की जांच और मरम्मत चलती रहती है. इसके लिए रेलवे के कर्मचारी ट्रॉली लेकर ट्रैक पर मुआयने के लिए भी निकलते हैं. ये चकोर जगहें इन्ही के लिए बनीं होती हैं. आइए विस्तार से जानते हैं...

किसलिए बनी होती हैं ये जगहें?
यात्रियों की सुरक्षा लिए रेलवे अपनी तरफ से पुख्ता इंतजाम करता है. इन्ही इंतजामों की देख-रेख में शामिल है ट्रॉली लेकर ट्रैक का मुआयना करना. आपने अक्सर ट्रैक पर नीचे फोटो में दिखाई गई ट्रॉली को चलते हुए देखा होगा. 

कभी ट्रेन की पटरियों के पास दीवार से घिरी ये छोटी जगह देखी है? ये क्यों बनी होती है?

इस तरह की कुछ ट्रॉलियां हमेशा ब्लॉक या लाइन क्लियर ले कर नहीं चलती हैं. अब जरा सोचिए, क्या हो अगर इन्हें नजदीक आती ट्रेन की आवाज आए? ऐसी आपात स्थिति में ही ये ट्रैक के किनारे बनाए गए चौकोर आकार वाली जगहें काम आती हैं, जिससे कि अचानक ट्रेन के आने पर इन पर काम कर रहे कर्मचारी तुरंत ही इन्हें उठा कर वहां रख सकते हैं. साथ ही दूसरी मशीनों या अन्य मरम्मत के सामान को भी ट्रैक से हटा कर यहां रखा जा सकता है.

क्योंकि रेलवे ट्रैक के दोनों ओर हमेशा ही समतल जमीन होना सम्भव नहीं है. इसीलिए ट्रैक किनारे इस तरह के आपातकालीन रेस्क्यू पॉइंट बनाए जाते हैं. ये रेलवे ट्रैक के लेवल में होते हैं और ट्रैक पर कार्य कर रहे कर्मचारी विभिन्न तरह से इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.

इंजन में कैटल गार्ड क्यों होता है?
आपने ट्रेन के इंजन के आगे नीचे की तरफ एक जाली लगी देखी होगी. इसे कैटल गार्ड कहा जाता है. दरअसल, इसे ट्रेन को पटरी से उतरने से बचाने के लिए लगाया जाता है. ट्रेन की पटरियां खुले में रहती हैं. ऐसे में, इनपर मवेशियों या जानवरों का आ जाना लाज़मी है. ऐसे में, अगर जानवर ट्रेन से टकरा भी जाए तो वह ट्रेन के नीच न आ पाए इसके लिए लोकोमोटिव के अगले हिस्से पर इस जाली को लगाया जाता है. अगर ट्रेन से टकराने के बाद कोई जानवर ट्रेन के नीचे आ जाता है तो ट्रेन का बैलेंस बिगड़ सकता है और ट्रेन के पटरी पर से उतरने का भी खतरा रहता है. जिससे बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है.

कभी ट्रेन की पटरियों के पास दीवार से घिरी ये छोटी जगह देखी है? ये क्यों बनी होती है?इसके अलावा अगर ट्रैक पर कोई बड़ा पत्थर आ गिरे तो यह उससे भी ट्रेन को बचाने का काम करती है. कुल मिलाकर यह जाली हर इस चीज को ट्रेन के नीचे आने से रोकती है जिसके ट्रेन के नीचे आने से उसके पटरी से उतरने का खतरा रहता है.

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