Pm Modi Australia Visit: समंदर पार से आ रहा है भारत का नया 'पावरहाउस'! यूरेनियम भंडार वाले इस देश से क्या है PM मोदी की महा-डील?
Pm Modi Australia Visit: पीएम मोदी अपने छह दिवसीय दौरे के तीसरे दिन ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं. वहां भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ यूरेनियम और रेयर अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति के लिए एक बेहद अहम डील कर रहा है.

Pm Modi Australia Visit: दुनिया भर में न्यूक्लियर ताकत और ऊर्जा की होड़ मची हुई है, जिसको लेकर ईरान और अमेरिका एक दूसरे की जान के दुश्मन बने हुए हैं, उसी के बीच में भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है. बीती शाम पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे. इस यात्रा के दौरान एक ऐसी महा-डील पर मुहर लगने जा रही है, जो कि देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी. यह यूरेनियम का सौदा है, जिसके लिए दुनिया के सुपरपावर देश आपस में टकराते रहते हैं. ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यह ईंधन भारत की भविष्य परमाणु परियोजनाओं और हाई-टेक जरूरतों को पूरी करेगा, जिससे देश में बिजली की कमी हमेशा के लिए दूर हो सकेगी.
पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया में महा-डील का एजेंडा
पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया पहुंचकर वहां के पीएम एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय बातचीत की. इस मुलाकात का सबसे बड़ा एजेंडा दोनों देशों के बीच यूरेनियम की सप्लाई और रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर होने वाला ऐतिहासिक समझौता है. यह डील भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से गेम चेंजर मानी जा रही है. इस समझौते के बाद भारत को बिना किसी रुकावट के परमाणु ईंधन मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा.
चीन की वैश्विक मनमानी पर लगेगी लगाम
इस समझौते के बाद से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की घेराबंदी मजबूत होगी, जो लगातार इस इलाके में अपना सैन्य और व्यापारिक दबदबा बढ़ा रहा है. दरअसल, चीन ने नामीबिया और नाइजर जैसे देशों की यूरेनियम खदानों में बड़ी हिस्सेदारी खरीद रखी है और वह कजाखस्तान का भी सबसे बड़ा खरीदार है. इसके अलावा स्मार्टफोन से लेकर रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी चीन का एकाधिकार है, जिसका निर्यात रोककर वह दुनिया को डराता है. ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत की यह नई डील चीन की इस मनमानी और एकाधिकार को हमेशा के लिए खत्म कर देगी.
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ऑस्ट्रेलिया के पास यूरेनियम का अथाह भंडार
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के कुल यूरेनियम भंडार का एक-चौथाई से भी ज्यादा हिस्सा मौजूद है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बनाता है. भारत इस अथाह भंडार का इस्तेमाल देश में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब्य को चौबीसों घंटों बिजली देने के लिए करेगा. भविष्य की इन आधुनिक तकनीकों को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिना रुकावट वाली बिजली की जरूरत होती है. ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यब स्वच्छ ईंधन देश की डिजिटल क्रांति को बिना किसी कार्बन उत्सर्जन के नई रफ्तार देने का काम करेगा.
साल 2047 तक 100 गीगावॉट का महालक्ष्य
विशेषज्ञों की मानें तो ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने के बाद भारत अपने घरेलू यूरेनियम भंडार को पूरी तरह से सुरक्षित रख सकेगा और उसका इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में कर पाएगा. भारत सरकार ने साल 2047 तक देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाकर 100 गीगावॉट तक ले जाने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. वर्तमान में भारत बिजली के लिए कोयले पर बहुत निर्भर है, लेकिन इस रणनीतिक समझौते के बाद देश बहुत तेजी से स्वच्छ और सुरक्षित परमाणु ऊर्जा की तरफ बढ़ पाएगा.
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