Shakuntala Devi Birthday: बिना कैलकुलेटर बड़े से बड़ा गुणा कैसे करती थीं शकुंतला देवी, कितना तेज था उनका दिमाग?
Shakuntala Devi Birthday: ह्यूमन कंप्यूटर शकुंतला देवी का दिमाग कंप्यूटर से भी तेज कैसे चलता था? जानिए बिना कैलकुलेटर के बड़े से बड़ा गुणा चुटकियों में हल करने की उनकी अद्भुत मानसिक तकनीक का पूरा राज

Shakuntala Devi Birthday: हर साल 4 नवंबर का दिन भारते के इतिहास में एक ऐसी अद्भुत शख्सियत की याद दिलाता है, जिसने गणित की दुनिया में पूरी दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था. आज 4 नवंबर को महान गणितज्ञ शकुंतला देवी की जयंती है. उन्हें दुनिया भर में ह्यूमन कंप्यूटर के नाम से जाना जाता है. जब कंप्यूटर और आधुनिक कैलकुलेटर का दौर शुरुआती चरण में था, तब भारत की इस बेटी ने अपने जादुई मानसिक गणनाओं से बड़े-बड़े वैज्ञानिकों और कंप्यूटरों को भी पछाड़ दिया था. उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर आइए जानते हैं कि बिना कागज-कलम और कैलकुलेटर के वह बड़े से बड़ा गुणा कैसे कर लेती थीं और उनके दिमाग की रफ्तार कितनी तेज थी.
कंप्यूटर को हराने वाली ऐतिहासिक घटनाएं
शकुंतला देवी के दिमाग की गति को लेकर कई ऐसी प्रामाणिक घटनाएं हैं, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं. साल 1977 में अमेरिका की दक्षिणी कैथोलिक यूनिवर्सियी में उनका मुकाबला तत्कालीन सबसे तेज कंप्यूटरों में से एक यूनीवैक से हुआ था. वहां उनसे 201 अंकों की एक विशाल संख्या का 23वां मूल निकालने के लिए कहा गया. शकुंतला देवी ने बिना किसी हिचकिचाहट के सिर्फ 50 सेकंड में इसका सही जवाब दे दिया, जबकि उस समय के सुपर कंप्यूटर को इस सवाल का कोड प्रोसेस करने और उत्तर देने में 62 सेकंड का समय लगा था.
इसके बाद 18 जून 1980 को लंदन के इंपीरियल कॉलेज में उन्होंने एक और अविश्वसनीय रिकॉर्ड बनाया. कंप्यूटर द्वारा रैंडमली चुने गए 13-13 अंकों की दो विशाल संख्याओं का आपस में गुणा करने के लिए कहा गया. शकुंतला देवी ने सिर्फ 28 सेकंड के भीतर 26 अंकों का बिल्कुल सही उत्तर बोलकर सबको हैरान कर दिया. इस ऐतिहासिक कारनामे को 1982 की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह मिली थी.
बिना कैलकुलेटर कैसे करती थीं इतनी तेज गणना?
शकुंतला देवी के गणना करने के तरीके को लेकर कई शोधकर्ताओं और मनोवैज्ञानिकों ने अध्ययन किया. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आर्थर जेन्सेन ने उन पर बाकायदा एक रिसर्च की थी. उनके तरीके का सबसे बड़ा रहस्य यह था कि वह पारंपरिक भारतीय वैदिक गणित के सूत्रों और नंबर पैटर्न को बहुत गहराई से समझती थीं. वह किसी भी बड़ी संख्या को देखते ही उसके भीतर छिपे पैटर्न्स, जैसे कि वह संख्या किस संख्या का घन या मूल हो सकती है, उसे तुरंत पहचान लेती थीं.
वह बचपन से ही संख्याओं को एक खेल या भाषा की तरह देखती थीं. जहां एक सामान्य इंसान को लंबी गणना करने के लिए उसे हिस्सों में बांटना पड़ता है, वहीं शकुंतला देवी का मस्तिष्क संख्याओं को उनके संपूर्ण रूप में प्रोसेस करता था. उनकी फोटोग्राफिक मेमोरी और शॉर्ट-टर्म मेमोरी इतनी गजब की थी कि वह लाखों-करोड़ों के अंकों को एक बार देखकर हूबहू याद रख लेती थीं और बिना किसी मानसिक थकावट के उल्टे क्रम से भी उनका जवाब दे सकती थीं.
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कितना तेज और असाधारण था उनका दिमाग?
शकुंतला देवी के दिमाग में सूचनाओं को प्रोसेस करने की गति सामान्य इंसानों से कई गुना ज्यादा थी. जब वह कोई गणितीय सवाल सुनती थीं, तो उनका दिमाग बिना किसी सचेत प्रयास के, अवचेतन स्तर पर ही काम करना शुरू कर देता था. गणित के प्रति उनके इस असीम प्रेम और असाधारण क्षमता के कारण ही भारत सरकार और दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज ने उन्हें हमेशा सर्वोच्च सम्मान दिया. आज उनके जन्मदिन पर पूरा देश उनके इस बेजोड़ हुनर को नमन कर रहा है.
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