इस देश ने किया ऊंटों का पासपोर्ट बनाने का ऐलान, जानें क्यों उठाया जा रहा यह कदम?
ऊंटों के पालन और व्यापार को देखते हुए सरकार को एक ऐसे सिस्टम की जरूरत महसूस हुई, जिससे ऊंटों की सही पहचान हो सके, मालिकाना हक साबित किया जा सके, स्वास्थ्य और टीकाकरण की जानकारी सुरक्षित रहे.

जब भी पासपोर्ट की बात आती है तो हमारे दिमाग में इंसानों की यात्रा, विदेश जाना और पहचान पत्र की तस्वीर घूमने लगती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी जानवर को भी पासपोर्ट मिल सकता है. सऊदी अरब ने कुछ ऐसा ही अनोखा और चौंकाने वाला फैसला लिया है. इस खाड़ी देश ने अब ऊंटों के लिए भी आधिकारिक पासपोर्ट जारी करने की घोषणा कर दी है.
सऊदी अरब में ऊंट सिर्फ एक जानवर नहीं हैं, बल्कि वे वहां की संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा माने जाते हैं. इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि ऊंटों से जुड़े पूरे क्षेत्र को बेहतर तरीके से व्यवस्थित और आधुनिक बनाया जा सके. यह फैसला सऊदी अरब की महत्वाकांक्षी विजन 2030 योजना का हिस्सा है, जिसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाना और पारंपरिक क्षेत्रों को तकनीक से जोड़ना है.
किसने की घोषणा?
इस नई पहल की औपचारिक घोषणा पर्यावरण, जल और कृषि मंत्रालय के उप मंत्री मनसूर अलमुशैती ने की. उन्होंने बताया कि सरकार ने देश में कैमल पासपोर्ट सिस्टम को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है. उनके मुताबिक, इस पासपोर्ट की मदद से हर ऊंट की पहचान, मालिकाना हक और स्वास्थ्य से जुड़ी पूरी जानकारी एक ही डॉक्यूमेंट में दर्ज की जा सकेगी. इससे ऊंटों की देखभाल आसान होगी और उनके व्यापार में भी पारदर्शिता आएगी.
ऊंट पासपोर्ट की तस्वीर भी आई सामने
मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर ऊंट पासपोर्ट की तस्वीर भी साझा की है. यह पासपोर्ट हरे रंग का है, जिस पर सऊदी अरब का राष्ट्रीय प्रतीक बना हुआ है और साथ ही ऊंट की सुनहरे रंग की तस्वीर भी दिखाई देती है. सरकार का अनुमान है कि साल 2024 तक सऊदी अरब में करीब 22 लाख ऊंट हैं. धीरे-धीरे इन सभी ऊंटों को इस नए पासपोर्ट सिस्टम से जोड़ा जाएगा.
ऊंट पासपोर्ट की जरूरत क्यों पड़ी?
अरब देशों में ऊंटों का इतिहास हजारों साल पुराना है. पहले ऊंटों का इस्तेमाल यात्रा और परिवहन के लिए, रेगिस्तान में जीवन का सहारा बनने के लिए, संपत्ति और सम्मान के प्रतीक के रूप में किया जाता था. आज भी सऊदी अरब में ऊंटों को पाला जाता है, खरीदा-बेचा जाता है और कई बार प्रतियोगिताओं में शामिल किया जाता है. यहां तक कि ऊंटों की सौंदर्य प्रतियोगिताएं भी होती हैं, जिनमें कुछ ऊंट करोड़ों रुपये की कीमत में बिक जाते हैं. इतने बड़े पैमाने पर ऊंटों के पालन और व्यापार को देखते हुए सरकार को एक ऐसे सिस्टम की जरूरत महसूस हुई, जिससे ऊंटों की सही पहचान हो सके, मालिकाना हक साबित किया जा सके, स्वास्थ्य और टीकाकरण की जानकारी सुरक्षित रहे. इसी जरूरत से ऊंट पासपोर्ट की अवधारणा सामने आई.
ऊंट पासपोर्ट में क्या-क्या जानकारी होगी?
सरकार के अनुसार, ऊंट का पासपोर्ट एक पूरी पहचान फाइल की तरह काम करेगा. इसमें ऊंट का माइक्रोचिप नंबर, पासपोर्ट नंबर, ऊंट का नाम, जन्म तिथि, नस्ल, रंग, लिंग, जन्म स्थान, मालिक की जानकारी और जारी करने वाली अथॉरिटी का नाम, ऊंट की दाएं और बाएं तरफ से ली गई तस्वीरें शामिल होंगी. इसके अलावा, पासपोर्ट में एक टीकाकरण रिकॉर्ड भी होगा, जिसमें लगाए गए सभी टीकों की जानकारी, पशु चिकित्सक का नाम, हस्ताक्षर और मुहर साफ-साफ दर्ज होगी. इससे किसी भी बीमारी के समय तुरंत कार्रवाई करना आसान होगा.
इस सिस्टम से क्या फायदे होंगे?
सरकार का कहना है कि ऊंट पासपोर्ट से कई बड़े फायदे होंगे. जैसे ऊंटों की खरीद-बिक्री में भरोसा बढ़ेगा, मालिकाना हक को लेकर विवाद कम होंगे, ऊंटों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार होगा, पशुधन प्रबंधन और निगरानी मजबूत होगी, अवैध गतिविधियों और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, ऊंट पालन उद्योग ज्यादा आधुनिक और सुरक्षित बनेगा.
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Source: IOCL


























