Delhi Malviya Nagar Fire: मालवीय नगर अग्निकांड में विदेशी नागरिकों की भी मौत, क्या उन्हें भी मिलेगा मुआवजा? जानें नियम
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में भीषण आग लग गई है, जिसमें करीब 21 लोगों की मौत हो चुकी है. चलिए जानें कि क्या जो विदेशी नागरिक इस हादसे में मरे हैं, उनको भी मुआवजा मिलेगा कि नहीं.

- मालवीय नगर होटल आग में 21 की मौत, विदेशी नागरिक भी शामिल.
- विदेशी नागरिकों को स्वतः मुआवजा नहीं, पर अनुग्रह राशि संभव.
- पीड़ित परिवार दूतावास के माध्यम से मुआवजा की मांग कर सकते.
- लापरवाही साबित होने पर होटल पर दीवानी या उपभोक्ता अदालत में केस.
Delhi Malviya Nagar Fire: दक्षिण दिल्ली का पॉश इलाका मालवीय नगर देर रात उस वक्त दहल उठा, जब वहां स्थित एक नामचीन होटल-रेस्टोरेंट में अचानक बेहद भीषण आग लग गई. इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों के जिंदा जलने से मौत की पुष्टि हो चुकी है. बताया जा रहा है कि इस होटल में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो इस आग की चपेट में आ गए और अपनी जान नहीं बचा सके. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग गहरे खौफ में हैं. आइए जानें कि इस घटना में जो विदेशी नागरिकों की मौत हुई है क्या उनको भी सरकार की तरफ से मुआवजा मिलेगा.
विदेशी नागरिकों के लिए मुआवजे के सरकारी नियम क्या हैं?
भारत में किसी भी होटल अग्निकांड में अगर किसी विदेशी नागरिक की जान जाती है, तो केंद्र या राज्य सरकार की तरफ से उन्हें कोई भी ऑटोमेटिक यानी स्वचालित कानूनी मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है. इसका सीधा मतलब यह है कि कानूनन सरकार विदेशी नागरिकों को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं है. हालांकि, ऐसी बड़ी और अप्रत्याशित मानवीय त्रासदियों के समय भारत सरकार 'प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष' (PMNRF) या फिर संबंधित राज्य सरकार की तरफ से मानवीय आधार पर अनुग्रह राशि यानी एक्स-ग्रेशिया देने का फैसला ले सकती है.
पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि मिलने की प्रक्रिया
हादसे का शिकार हुए विदेशी नागरिकों के परिजनों को वित्तीय सहायता दिलाने के लिए कुछ खास कानूनी रास्ते अपनाने पड़ते हैं. आमतौर पर जब भी देश में ऐसा कोई बड़ा हादसा होता है, तो प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या राज्य सरकारें मृतकों के परिवारों के लिए एक तय राहत राशि की घोषणा करती हैं. यह राहत राशि बिना किसी राष्ट्रीयता के भेदभाव के सभी पीड़ितों को दी जाती है, यानी इसमें भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों के परिवार शामिल होते हैं. इसके लिए दूतावास के माध्यम से औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं.
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होटल प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ सिविल लॉसूट का रास्ता
अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि आग होटल प्रबंधन की किसी बड़ी लापरवाही, फायर एग्जिट न होने जैसे सुरक्षा मानकों की अनदेखी या शॉर्ट-सर्किट के कारण लगी थी, तो कानूनन सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. ऐसी स्थिति में मृतक विदेशी नागरिक के कानूनी वारिस भारतीय अदालतों का दरवाजा खटखटा सकते हैं. वे होटल मालिक या वहां के प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा (टॉर्ट लायबिलिटी) दर्ज कराकर भारी हर्जाने और उचित मुआवजे की मांग देश की दीवानी अदालतों में कर सकते हैं.
कंज्यूमर फोरम के जरिए न्याय पाने का विकल्प
चूंकि विदेशी नागरिक उस होटल में पैसे देकर ठहरे हुए मेहमान थे, इसलिए तकनीकी रूप से वे होटल की सेवाओं के उपभोक्ता थे. इस आधार पर पीड़ित विदेशी नागरिकों के परिवार वाले होटल की खराब सेवाओं, सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक और लापरवाही के खिलाफ भारतीय उपभोक्ता अदालत (कंज्यूमर फोरम) में भी केस दर्ज कर सकते हैं. उपभोक्ता अदालतें सेवा में कमी पाए जाने पर होटल प्रबंधन पर भारी जुर्माना लगाने और पीड़ित परिवारों को बड़ा वित्तीय मुआवजा देने का आदेश जारी कर सकती हैं.
कानूनी प्रक्रिया में विदेशी दूतावास की अहम भूमिका
इस पूरी कानूनी लड़ाई और कागजी कार्रवाई को पूरा करने में संबंधित विदेशी नागरिक का दूतावास (एम्बेसी) सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. विदेशी दूतावास भारत में मौजूद कानूनी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करता है और पीड़ित परिवार की तरफ से 'लीगल हेयरशिप सर्टिफिकेट' और 'पावर ऑफ अटॉर्नी' जैसे जरूरी दस्तावेज तैयार करवाने में पूरी मदद करता है. इन आधिकारिक दस्तावेजों के बिना कोई भी विदेशी नागरिक भारतीय कानूनी व्यवस्था के तहत मुआवजे या अदालत में केस दर्ज करने की पात्रता हासिल नहीं कर सकता है.
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Source: IOCL

























