(Source: ECI/ABP News)
Chhatrapati Shivaji Maharaj History: कैसे हुई थी छत्रपति शिवाजी की मृत्यु, उनके पास कितने घोड़े थे?
Chhatrapati Shivaji Maharaj History: राजा शिवाजी थिएटर्स में रिलीज हो चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई थी.

- शिवाजी महाराज का निधन 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ किले में हुआ।
- मृत्यु का सटीक कारण बीमारी, जहर या एंथ्रेक्स माना जाता है।
- उनकी सेना में 30,000 से 40,000 घोड़े थे।
- शिवाजी महाराज के सात पसंदीदा युद्ध घोड़े थे।
Chhatrapati Shivaji Maharaj History: छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक फिल्म 'राजा शिवाजी' 1 मई को मराठी और हिंदी में सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. रितेश देशमुख स्टारर इस फिल्म को दर्शकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. इसी बीच आइए जानते हैं छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई थी और उनके पास कितने घोड़े थे?
कब हुआ था शिवाजी महाराज का निधन?
छत्रपति शिवाजी महाराज का निधन 3 अप्रैल 1680 को उनके साम्राज्य की राजधानी रायगढ़ किले में हुआ था. हालांकि उनकी मृत्यु का सटीक कारण सदियों से इतिहासकारों के बीच बहस का विषय बना हुआ है. कई ऐतिहासिक दस्तावेज, जिनमें ब्रिटिश रिकॉर्ड भी शामिल हैं, ऐसा बताते हैं कि उनके मृत्यु एक गंभीर बीमारी की वजह से हुई थी. यह कहा जाता है कि अपनी मृत्यु से लगभग 10 से 12 दिन पहले तक वे तेज बुखार और खूनी पेचिश से पीड़ित थे. बताया जाता है कि उनकी तबीयत सालों से गिर रही थी और आखिरी दिनों में उनकी हालत काफी ज्यादा बिगड़ गई थी.
उनकी मृत्यु को लेकर बहस
कई इतिहासकारों का ऐसा भी मानना है कि यह एक साजिश के तहत हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज को जहर दिया गया था. इसी के साथ कुछ पुर्तगाली रिकॉर्ड तो एंथ्रेक्स को भी एक संभावित वजह बताते हैं.
इस रहस्य को और गहरा करते हुए 1926-27 में रायगढ़ किले में खुदाई के दौरान मिले कंकाल के अवशेषों के बारे में कुछ लोगों का मानना है कि वे शिवाजी महाराज के हैं. हालांकि इस दावे पर इतिहासकारों की राय बंटी हुई है. इतिहासकार इंद्रजीत सावंत ने तो इन अवशेषों की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण का सुझाव भी दिया है.
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शिवाजी महाराज की घुड़सवार सेना
शिवाजी महाराज के पास शानदार घुड़सवार सेना थी. उनकी सेना तेज और फुर्तीले घोड़ों पर काफी ज्यादा निर्भर थी. ऐतिहासिक रिकार्ड बताते हैं कि शिवाजी महाराज के पास सात पसंदीदा घोड़े थे. ये युद्ध में उनके भरोसेमंद साथी थे. उन घोड़ों के नाम कृष्णा, विश्वास, गजरा, रणवीर, इंद्रायणी, तुरांगी और मोती थे. इनमें से कृष्णा को उनका सबसे खास और आखिरी घोड़ा माना जाता है.
इनके अलावा ऐतिहासिक अनुमानों के मुताबिक उनकी सेना में लगभग 30000 से 40000 के करीब घोड़े थे. उनकी सेना को पागा और सिलहदार में विभाजित किया गया था. पागा सेना में राजकीय घुड़सवार होते थे और सिलहदार सेना में खुद के घोड़े रखने वाले. उनकी सेना मुख्य रूप से भीमथड़ी नस्ल के घोड़ों का इस्तेमाल करती थी. ये घोड़े अपनी रफ्तार, सहनशक्ति और पहाड़ी इलाकों में चलने की क्षमता के लिए जाने जाते थे.
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