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वन नेशन वन इलेक्शन क्या होता? लाल किले से अपने भाषण में पीएम ने किया इसका जिक्र

पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर जोर दिया है. क्या आप जानते हैं कि दुनिया किन देशों में पहले से ये नियम लागू है और इससे क्या फायदा होता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस की 78वीं वर्षगांठ पर लाल किले से देश को संबोधित किया है. पीएम मोदी ने भाषण में एक बार फिर से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की जरूरत पर बल दिया है. उन्होंने कहा कि लाल किले से मैं राजनीतिक समुदाय से “वन नेशन, वन इलेक्शन” के विचार का समर्थन करने का आग्रह करता हूं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वन नेशन वन इलेक्श्न क्या होता है. 

पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी अपने आज 98 मिनट के भाषण में वन नेशन वन इलेक्शन पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे देश का एकजुट होना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव देश में गतिरोध पैदा करते हैं. आज  हर योजना और पहल ऐसा लगता है कि यह चुनाव चक्र से प्रभावित है और हर गतिविधि राजनीतिक विचारों से रंगी हुई है.

कमेटी

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति ने इसी साल मार्च में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी थीं. रामनाथ कोविंद समिति की यह रिपोर्ट कुल 18,626 पन्नों की है. इस रिपोर्ट में 2029 में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की गई है. 

क्या है ‘एक देश एक चुनाव’ का आइडिया?

वन नेशन वन इलेक्शन का अर्थ संसद, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव एक साथ एक ही समय पर कराने से है. आसान शब्दों में ऐसे समझा जा सकता है कि वोटर सिर्फ एक ही दिन में सरकार या प्रशासन के तीनों स्तरों के लिए वोटिंग करेंगे. 

इन देशों में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’

बता दें कि दुनिया के कई देशों में चुनाव एक साथ होते हैं. उदाहरण के लिए स्वीडन में हर चार साल में आम चुनाव के साथ राज्‍यों और जिला परिषदों के चुनाव होते हैं. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका में भी आम चुनाव और राज्‍यों के चुनाव एक साथ होते हैं. इन चुनावों के दौरान वोटर को अलग-अलग वोटिंग पेपर भी दिए जाते हैं. दुनिया के बाकी देशों में ब्राजील, फिलीपींस, बोलिविया, कोलंबिया,कोस्‍टोरिका, ग्वाटेमाला, गुयाना और होंडुरास जैसे अन्य देशों में भी राष्ट्रपति प्रणाली के तहत राष्ट्रपति और विधायी चुनाव एक साथ होते हैं.

‘वन नेशन वन इलेक्शन’ से क्या होगा फायदा

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से चुनाव पर होने वाला खर्च कम किया जा सतता है. आसाना भाषा में राजकीय कोष पर चुनाव का खर्च कम पड़ेगा. जिससे विकासकार्यों में और तेजी आएगी. इसके अलावा मतदान केंद्रों पर ईवीएम के इंतजाम,सुरक्षा और चुनाव के लिए कर्मचारियों की तैनाती की कवायद बार-बार नहीं करनी पड़ेगी. इससे चुनावी प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. इसके अलावा चुनाव एक बार होने से इससे वोट प्रतिशत में इजाफा होगा. वहीं चुनाव आयोग की ओर से बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं, एक बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे. 

चुनाव प्रकिया

‘वन नेशन वन इलेक्शन’ से देश की पूरी चुनाव प्रकिया बदल जाएगी. इससे पूरे देश में एक साथ चुनाव होंगे. बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब सरकार एक साथ चुनाव कराने के फैसले पर विचार कर रही है. सबसे पहले चुनाव आयोग ने पहली बार 1983 में इस बारे में सरकार को सुझाव दिया था. उस वर्ष प्रकाशित भारत के चुनाव आयोग की पहली वार्षिक रिपोर्ट में इसका विचार आया था. इसके बाद विधि आयोग की ओर से 1999 में इसका विचार आया था. विधि आयोग ने चुनाव सुधार पर अपनी रिपोर्ट में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी. वहीं 2015 में कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति, 2017 में नीति आयोग और 2018 में जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता वाले विधि आयोग ने एक साथ चुनाव पर अपनी मसौदा रिपोर्ट जारी की थी.

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